-Friday World-April 9,2026
वाशिंगटन/बीजिंग, ९ अप्रैल २०२६ – अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के साथ हुए युद्धविराम समझौते में विश्वासघात किया है। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के साथ १५ दिनों का युद्धविराम केवल ईरान और अमेरिका के बीच है, लेबनान को इसमें शामिल नहीं किया गया। इस घोषणा के तुरंत बाद इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत समेत विभिन्न इलाकों पर भीषण हवाई हमले तेज कर दिए।
ईरान ने इस विकास को "स्पष्ट विश्वासघात" और "आतंकवादी अमेरिका" का नया खेल बताया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, जो इस समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे, ने पहले दावा किया था कि युद्धविराम में लेबनान भी शामिल है, लेकिन अमेरिका और इजरायल दोनों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
अमेरिका ने तीन प्रमुख शर्तें तोड़ीं
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बुडापेस्ट में पत्रकारों से कहा, “मुझे लगता है कि ईरानियों में गलतफहमी हो गई है। युद्धविराम में लेबनान शामिल नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता केवल ईरान और अमेरिका के साथी देशों (इजरायल सहित) पर केंद्रित है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पीबीएस न्यूज अवर को दिए इंटरव्यू में कहा, “लेबनान को करार में शामिल नहीं किया गया। हिज्बुल्लाह के कारण उन्हें अलग रखा गया है। यह एक अलग संघर्ष है और हम इसे अलग ही हैंडल करेंगे।”
इस घोषणा के साथ अमेरिका ने युद्धविराम की तीन प्रमुख शर्तों का उल्लंघन किया:
1. पूरे क्षेत्र (मध्य पूर्व) में शांति स्थापित करने की प्रतिबद्धता।
2. लेबनान सहित सभी मोर्चों पर हमले रोकने का वादा।
3. पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देशों के माध्यम से दी गई गारंटी का सम्मान।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मुश्किल स्थिति
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कुछ दिनों पहले दावा किया था कि ईरान-अमेरिका युद्धविराम में लेबनान भी शामिल है और हिज्बुल्लाह पर हमले रुक जाएंगे। लेकिन अमेरिका और इजरायल के इनकार ने पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से असहज स्थिति में डाल दिया है। इस्लामाबाद में होने वाली हॉर्मुज स्ट्रेट संबंधी बैठक अब और जटिल हो गई है।
ईरान ने पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना की है, लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान अमेरिका और इजरायल के सामने अपनी मध्यस्थ भूमिका बचा पाएगा।
इजरायल के हमले और लेबनान में तबाही
अमेरिकी बयान के कुछ घंटों बाद ही इजरायल डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने लेबनान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिए। बेरूत के दक्षिणी उपनगरों, बekaा घाटी और दक्षिणी लेबनान में ५० से ज्यादा फाइटर जेट्स ने १० मिनट के अंदर १६० बम गिराए। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार सैकड़ों लोग मारे गए और घायल हुए।
लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील की और कहा, “यह युद्धविराम का घोर उल्लंघन है। अमेरिका और इजरायल मिलकर लेबनान को निशाना बना रहे हैं।”
ईरान की सख्त प्रतिक्रिया
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका को "आतंकवादी राज्य" करार देते हुए कहा कि यह विश्वासघात ईरान को और मजबूत बनाने का काम करेगा। ईरानी राजदूत अब्दुलरेजा फजली ने कहा, “अमेरिका ने एक बार फिर अपना चरित्र दिखा दिया। हम रूस, चीन और अपने अन्य सच्चे मित्रों के साथ मिलकर जवाब देंगे।”
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर इजरायल लेबनान पर हमले जारी रखता है और अमेरिका उसका समर्थन करता है तो ईरान न केवल हॉर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद कर सकता है, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई भी कर सकता है।
ट्रंप प्रशासन की दोहरी नीति
विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन की यह दोहरी नीति (Double Standard) स्पष्ट है। एक तरफ ईरान के साथ युद्धविराम की बात, दूसरी तरफ इजरायल को पूर्ण स्वतंत्रता देना। अमेरिका इजरायल को “अलग संघर्ष” बताकर खुद को जिम्मेदारी से मुक्त करने की कोशिश कर रहा है।
यह घटनाक्रम ईरान के उस बयान को सही साबित करता है जिसमें उसने कहा था कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता और रूस-चीन से सुरक्षा गारंटी मांगी गई थी।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
- तेल बाजार: हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव बढ़ने से तेल की कीमतें फिर बढ़ सकती हैं।
- लेबनान का संकट: लाखों लोग विस्थापित, अस्पताल भर चुके हैं, मानवीय मदद की सख्त जरूरत।
- कूटनीति: पाकिस्तान, चीन और रूस अब इस मुद्दे पर सक्रिय हो गए हैं। इस्लामाबाद बैठक में बड़े फैसले हो सकते हैं।
- ईरान की रणनीति: ईरान अब हिज्बुल्लाह को मजबूत समर्थन देने और क्षेत्रीय गठबंधन बनाने की तैयारी में है।
आगे क्या?
यह घटना १५ दिनों के युद्धविराम को और भी नाजुक बना रही है। अगर अमेरिका और इजरायल ने लेबनान पर हमले नहीं रोके तो ईरान अपना वादा निभाते हुए जड़बातोड़ जवाब दे सकता है।
दुनिया अब देख रही है कि क्या पाकिस्तान अपनी मध्यस्थ भूमिका निभा पाएगा या अमेरिका की दोहरी नीति पूरे मध्य पूर्व को फिर युद्ध की आग में झोंक देगी।
ईरान का संदेश साफ है – शांति तभी संभव है जब सभी मोर्चों पर हमले रुकें और विश्वासघात बंद हो। लेकिन फिलहाल अमेरिका और इजरायल का रुख “लेबनान अलग संघर्ष है” वाला है, जो क्षेत्र में शांति की उम्मीदों को गंभीर झटका दे रहा है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 9,2026