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बीजिंग, ८ अप्रैल २०२६ – ४० दिनों के खूनी संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच घोषित १५ दिनों के युद्धविराम को ईरान ने बेहद नाजुक और अनिश्चित बताया है। ईरान के राजदूत अब्दुलरेजा रहमानी फजली ने बीजिंग में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वाशिंगटन अब तक तीन बार अपना वादा तोड़ चुका है। इसलिए अमेरिका और पाकिस्तान पर पूर्ण अविश्वास है।
ईरान ने स्पष्ट मांग की है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, चीन, रूस, तुर्की और पाकिस्तान जैसे देश मिलकर सुरक्षा गारंटी दें कि अमेरिका दोबारा हमला नहीं करेगा। फजली ने रूस और चीन को "सच्चे दोस्त" कहकर धन्यवाद दिया, क्योंकि उन्होंने हॉर्मुज स्ट्रेट से संबंधित एक पक्षपाती प्रस्ताव पर वीटो का इस्तेमाल किया था।
अमेरिका पर अविश्वास का कारण
ईरानी राजदूत ने कहा, “अमेरिका ने अब तक तीन बार ईरान के साथ वादाखिलाफी की है। इसलिए हम किसी भी तरह के अंधे विश्वास में नहीं हैं।” उन्होंने याद दिलाया कि ट्रंप प्रशासन ने बमबारी को दो हफ्तों के लिए स्थगित करने की घोषणा की है, लेकिन ईरान इसे सिर्फ अस्थायी विराम मान रहा है।
फजली ने चेतावनी दी: “अगर अमेरिका दोबारा हमला करता है तो ईरान का जवाब जड़बातोड़ और व्यापक होगा। अमेरिका को पछतावा होगा।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतें अस्थिर हैं और हॉर्मुज स्ट्रेट का बंद होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
हॉर्मुज स्ट्रेट और इस्लामाबाद बैठक
युद्धविराम के हिस्से के रूप में ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के सुरक्षित गुजरने के लिए सीमित समय तक सहमति दे दी है। लेकिन उन्होंने साफ किया कि स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने का अंतिम फैसला वार्ताओं के नतीजे पर निर्भर करेगा।
शुक्रवार (१० अप्रैल २०२६) को इस्लामाबाद में महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। इस बैठक में हॉर्मुज स्ट्रेट से जुड़े मुद्दे, स्ट्रेट का भविष्य और व्यापक शांति समझौते पर चर्चा होगी। पाकिस्तान ने इस बैठक का आयोजन किया है और मध्यस्थ के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
ईरान ने पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना की है, लेकिन यह भी कहा है कि पाकिस्तान समेत अन्य देशों को अमेरिका को युद्ध दोबारा शुरू न करने के लिए गारंटी देनी चाहिए।
रूस और चीन को ‘सच्चे मित्र’ कहकर आभार
फजली ने रूस और चीन की खास तारीफ की। उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हॉर्मुज स्ट्रेट से संबंधित प्रस्ताव पर वीटो लगाकर ईरान की संप्रभुता और हितों की रक्षा की है। “वे हमारे सच्चे मित्र हैं जिन्होंने ईरान के खिलाफ पक्षपाती प्रस्ताव को रोका।”
ईरान की मांग है कि चीन, रूस, तुर्की और पाकिस्तान जैसे देश मिलकर एक विश्वसनीय सुरक्षा गारंटी तंत्र बनाएं ताकि मध्य पूर्व में स्थिरता बनी रहे।
पृष्ठभूमि: ४० दिनों का खूनी संघर्ष
मार्च २०२६ में शुरू हुए अमेरिका-ईरान तनाव ने ४० दिनों तक जारी रहा। इस दौरान अमेरिका और इजरायल ने ईरानी ठिकानों पर हमले किए, जबकि ईरान ने अपने बचाव में जवाबी कार्रवाई की। हॉर्मुज स्ट्रेट को प्रभावी रूप से अवरुद्ध करने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और तेल की कीमतों में तेज उछाल आया।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रयासों और चीन के दबाव के बाद ही यह युद्धविराम संभव हो सका। लेकिन दोनों पक्ष जीत का दावा कर रहे हैं और वार्ताओं में बड़ा अंतर है – ईरान पूर्ण प्रतिबंध हटाने, यूरेनियम संवर्धन का अधिकार, इजरायल के लेबनान हमलों को रोकने और युद्ध के नुकसान का मुआवजा मांग रहा है।
आगे क्या?
यह युद्धविराम सिर्फ १५ दिनों का है। अगर इस्लामाबाद बैठक में सकारात्मक नतीजा निकला तो व्यापक समझौता हो सकता है। लेकिन अगर अमेरिका फिर आक्रामक हुआ तो ईरान का जवाब और तीव्र होगा, जिससे मध्य पूर्व में आग और फैल सकती है।
ईरान का रुख साफ है – शांति चाहिए, लेकिन सुरक्षा के बिना नहीं। रूस और चीन जैसे मित्रों के समर्थन के साथ वे मजबूत स्थिति में हैं। वैश्विक समुदाय अब देख रहा है कि यह नाजुक युद्धविराम कितने समय तक टिक पाता है।
इस स्थिति में हर पक्ष को संयम और कूटनीति की जरूरत है। वैश्विक अर्थव्यवस्था और लाखों लोगों की जिंदगी इन बैठकों के नतीजे पर निर्भर है।
Sajjadali Nayani ✍
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