इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे तक चली मैराथन शांति वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। ठीक उसी समय हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नई अनिश्चितता छा गई। रविवार को दो खाली सुपरटैंकर — Agios Fanourios Iऔर पाकिस्तानी ध्वज वाले Shalamar— आखिरी क्षण में यू-टर्न लेकर वापस लौट गए। तीसरा टैंकर Mobasa-B आगे बढ़ गया, लेकिन इस घटना ने वैश्विक शिपिंग कंपनियों और तेल बाजार में नई चिंता पैदा कर दी है।
विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस परिवहन का रास्ता हॉर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही तनावपूर्ण था। ईरान ने युद्ध के दौरान इस रास्ते पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर लिया था और अब वार्ता की असफलता के बाद सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण जहाजों का विश्वास डगमगा गया है।
वार्ता क्यों फेल हुई? दोनों पक्षों की दलीलें
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वांस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमने ईरान को अपना अंतिम और सबसे अच्छा प्रस्ताव दिया, लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया।” वांस के अनुसार ईरान ने परमाणु कार्यक्रम, हॉर्मुज का पूर्ण नियंत्रण और क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी अमेरिकी शर्तों को ठुकरा दिया।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने जवाब में कहा कि अमेरिका की मांगें “अत्यधिक” थीं। ईरान हॉर्मुज पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है और टोल वसूलने का अधिकार मांग रहा है। इसके अलावा ईरान युद्ध क्षतिपूर्ति, विदेशी संपत्ति मुक्ति और लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में युद्धविराम की मांग कर रहा था। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं कि वार्ता की असफलता की जिम्मेदारी विपक्षी पक्ष की है।
वार्ता की असफलता के कुछ घंटों बाद ही हॉर्मुज में यह घटना हुई, जिसने संकेत दिया कि नाजुक युद्धविराम अब और भी कमजोर हो गया है।
#हॉर्मुज में क्या हुआ? टैंकरों का यू-टर्न
शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, तीन बहुत बड़े क्रूड कैरियर (VLCC) ओमान की खाड़ी से हॉर्मुज की ओर बढ़ रहे थे। ईरान की तरफ से शुरुआती मंजूरी मिलने के बावजूद, ईरान के लाराक द्वीप के पास पहुंचते ही दो टैंकरों ने अचानक यू-टर्न ले लिया।
- Agios Fanourios I— इराक की ओर जा रहा था।
- Shalamar— पाकिस्तानी ध्वज वाला, UAE के दास द्वीप की ओर जा रहा था।
दोनों जहाज खाली थे और तेल लोड करने जा रहे थे, लेकिन सुरक्षा चिंताओं या राजनीतिक दबाव के कारण उन्होंने रास्ता बदल लिया। तीसरा टैंकर Mobasa-B अपना रास्ता जारी रखने में सफल रहा।
शिपिंग उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं जहाजों के बीमा प्रीमियम बढ़ाती हैं और कंपनियां रिस्क लेने से बचने लगती हैं। हॉर्मुज के आसपास ईरान द्वारा लगाए गए माइन्स को हटाने में ईरान को कठिनाई हो रही है, जिसके कारण पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती।
हॉर्मुज की वैश्विक अहमियत क्यों?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। इससे सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, UAE और कतर का अधिकांश तेल निर्यात गुजरता है। दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत इसी संकीर्ण जलमार्ग से होता है।
यदि यह रास्ता लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो:
- वैश्विक तेल कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
- भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे बड़े आयातक देशों की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित होगी।
- शिपिंग कंपनियां वैकल्पिक लेकिन लंबे और महंगे रास्ते चुनने को मजबूर होंगी।
ईरान का कहना है कि हॉर्मुज उसकी संप्रभुता का हिस्सा है और वह सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए टोल वसूल सकता है। अमेरिका इसे “अवैध” मानता है और पूर्ण स्वतंत्र नेविगेशन की मांग कर रहा है।
पाकिस्तान का रोल: मध्यस्थता और प्रभावित जहाज
पाकिस्तान ने इस्लामाबाद वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाई, लेकिन परिणाम शून्य रहा। अब पाकिस्तानी ध्वज वाले Shalamar टैंकर का यू-टर्न लेना इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय तनाव पड़ोसी देश पाकिस्तान को भी प्रभावित कर रहा है।
पाकिस्तान पहले ही ईरान से अपने जहाजों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति प्राप्त कर चुका था, लेकिन बढ़ते जोखिम के कारण शिपिंग कंपनियां सतर्क हो गई हैं। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तेल आयात पर काफी निर्भर है, इसलिए हॉर्मुज में कोई भी व्यवधान उसके लिए महंगा साबित हो सकता है।
आगे क्या? संभावित परिदृश्य
वार्ता की असफलता के बाद कई सवाल उठ रहे हैं:
- क्या युद्धविराम आगे बढ़ेगा या फिर टूट जाएगा?
- अमेरिका हॉर्मुज को “साफ” करने के लिए सैन्य कार्रवाई करेगा?
- ईरान माइन्स हटाने में सक्षम होगा या नहीं?
ट्रंप प्रशासन पहले ही संकेत दे चुका है कि अगर ईरान हॉर्मुज नहीं खोलता तो अमेरिकी नौसेना सक्रिय हो सकती है। वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि कोई भी अमेरिकी जहाज बिना अनुमति गुजरने की कोशिश करेगा तो उसे रोका जाएगा।
विश्व समुदाय — खासकर चीन, भारत और यूरोपीय देश — दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पहले ही शुरू हो चुका है और शिपिंग इंडस्ट्री में बीमा दरें बढ़ रही हैं।
निष्कर्ष: कूटनीति की असफलता, ऊर्जा सुरक्षा पर संकट
इस्लामाबाद वार्ता की नाकामी और हॉर्मुज में दो टैंकरों का यू-टर्न एक साथ घटित होना संयोग नहीं है। यह दिखाता है कि अमेरिका-ईरान के बीच गहरे अविश्वास ने क्षेत्रीय स्थिरता को कितना नुकसान पहुंचाया है। हॉर्मुज सिर्फ एक जलमार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की धमनी है।
यदि दोनों पक्ष जल्द ही कोई समझौता नहीं करते तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, मुद्रास्फीति बढ़ सकती है और कई विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाएं दबाव में आ सकती हैं।
फिलहाल स्थिति नाजुक बनी हुई है। पाकिस्तानी जहाज का शामिल होना यह भी याद दिलाता है कि मध्य पूर्व का तनाव अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रभाव डाल रहा है। उम्मीद है कि कूटनीति की नई कोशिशें सफल होंगी और हॉर्मुज जलमार्ग शीघ्र ही सुरक्षित एवं खुला हो जाएगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 12,2026