-Friday World-April 3,3026
दुनिया हैरान है। ईरान, जिसे दशकों से आर्थिक पाबंदियों, सैन्य दबाव और राजनीतिक अलगाव का सामना करना पड़ा, आज अमेरिका जैसी महाशक्ति के सामने न केवल टिका हुआ है बल्कि लगातार चुनौती दे रहा है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी अड्डों पर उसके घातक ड्रोन और मिसाइल हमले ने साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों के बावजूद उसकी रणनीतिक क्षमता को कम आंकना गलती थी। अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकियाँ अब बेबसी की आवाज़ लगती हैं। सवाल उठता है—पचास साल की सख्त पाबंदियों के बावजूद ईरान ने यह हौसला, यह तकनीक और यह लचीलापन कहाँ से पाया?
जवाब सरल लेकिन गहरा है। दुनिया ने ईरान को सिर्फ़ इस्लामी शासन, मुल्लाओं के प्रभाव, महिलाओं पर पर्दा और सख्त सामाजिक नियमों की नज़र से देखा। लेकिन किसी ने गौर नहीं किया कि इसी दौरान ईरान शिक्षा, अनुसंधान और विज्ञान के क्षेत्र में चुपचाप एक क्रांति कर रहा था। पुरुषों के साथ-साथ महिलाएँ भी बराबरी से, बल्कि कई क्षेत्रों में आगे बढ़कर उच्च शिक्षा हासिल कर रही हैं। यही शिक्षा और रिसर्च की नींव है, जिसने ईरान को स्वदेशी ड्रोन, मिसाइल और रक्षा प्रौद्योगिकी का हथियार दिया।
शिक्षा में क्रांति: साक्षरता से विश्वस्तरीय अनुसंधान तक ईरान की शिक्षा व्यवस्था की कहानी 1979 की क्रांति के बाद की है। तब महिलाओं की साक्षरता दर मात्र 35-40% के आसपास थी। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। युवा महिलाओं (15-24 वर्ष) की साक्षरता दर लगभग 99% तक पहुँच गई है, जो विश्व के कई विकसित देशों से बेहतर है। कुल वयस्क साक्षरता दर 88-90% के आसपास है, जबकि युवा पीढ़ी में यह लगभग सार्वभौमिक स्तर पर है।
विश्व बैंक और यूनेस्को के आँकड़ों के अनुसार, ईरान में विश्वविद्यालयों में महिलाओं की भागीदारी 50-60% से अधिक है। कई वर्षों में यह 55-60% तक रही। चिकित्सा विज्ञान, बेसिक साइंस और ह्यूमैनिटीज़ जैसे क्षेत्रों में महिलाएँ 60-70% तक छात्राएँ हैं। यहां तक कि कुछ रिपोर्टों में STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथमेटिक्स) क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी 35-50% तक बताई जाती है, जो अमेरिका (करीब 12-13%) से कहीं अधिक है।
यह प्रगति संयोग नहीं है। ईरान सरकार ने शिक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर लड़कियों की नामांकन दर में भारी वृद्धि हुई। विश्वविद्यालयों में महिलाओं की संख्या 1990 के दशक से कई गुना बढ़ी। आज ईरान में लाखों महिलाएँ डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और रिसर्चर के रूप में काम कर रही हैं। हालांकि कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी अभी भी कम (20% के आसपास) है, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में वे पुरुषों से आगे निकल चुकी हैं। यह "ओवर-एजुकेटेड" महिलाओं की पीढ़ी है, जो घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ बौद्धिक योगदान दे रही है।
ईरान की शिक्षा प्रणाली ने मात्र साक्षरता नहीं बढ़ाई, बल्कि गुणवत्ता भी दी। अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में ईरानी छात्रों ने 2024 में खगोल विज्ञान, जीव विज्ञान, भौतिकी आदि में शानदार प्रदर्शन किया। देश ने STEM शिक्षा पर भारी निवेश किया, जिसका फल आज उसके रक्षा कार्यक्रमों में दिख रहा है।
रिसर्च और विज्ञान में अनदेखी उड़ान पाबंदियों के बावजूद ईरान ने रिसर्च आउटपुट में जबरदस्त प्रगति की। SCImago, Web of Science और Nature Index जैसे सूचकों के अनुसार, ईरान नैनोटेक्नोलॉजी में विश्व के शीर्ष 4-6 देशों में शामिल है। आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क्स में 6वाँ स्थान, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में 7वाँ, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में 8वाँ और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में 9वाँ स्थान—ये आंकड़े बताते हैं कि ईरान सिर्फ़ हथियार नहीं, बल्कि मूल प्रौद्योगिकी विकसित कर रहा है।
नैनोटेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, एनर्जी इंजीनियरिंग और एनालिटिकल केमिस्ट्री जैसे क्षेत्रों में ईरान की वैज्ञानिक प्रकाशन संख्या विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी है। पाबंदियों ने ईरान को मजबूर किया कि वह आयात पर निर्भर न रहे। परिणामस्वरूप रिवर्स इंजीनियरिंग, स्वदेशी नवाचार और विश्वविद्यालय-उद्योग सहयोग बढ़ा। ईरानी विश्वविद्यालय अब मिसाइल इंजन, ड्रोन सामग्री और स्मार्ट सिस्टम के विकास के केंद्र बन चुके हैं।
ईरान के ड्रोन और मिसाइल कार्यक्रम इसी शिक्षा-रिसर्च इकोसिस्टम का उत्पाद हैं। शाहेद-136 जैसे कम लागत वाले लंबी दूरी के ड्रोन ने दुनिया को चौंकाया। ये ड्रोन AI, नैनो-मटेरियल्स और एडवांस्ड इंजीनियरिंग का मिश्रण हैं। पाबंदियों के कारण पारंपरिक हवाई शक्ति कमजोर होने पर ईरान ने असममित युद्ध की रणनीति अपनाई—सस्ते, स्वदेशी और बड़े पैमाने पर उत्पादित ड्रोन और मिसाइल। विश्वविद्यालयों से निकले इंजीनियरों ने इन्हें विकसित किया। आज ईरान के पास हजारों ऐसे ड्रोन हैं, जो महंगे एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे पैट्रियट या THAAD) को थका सकते हैं।
यह तकनीक सिर्फ़ प्रतिलिपि नहीं, बल्कि नवाचार है। ईरान ने सॉलिड फ्यूल मिसाइल, प्रिसीजन गाइडेंस और स्वायत्त ड्रोन सिस्टम में प्रगति की। पाबंदियों ने "सेल्फ-रिलायंस" को मजबूत किया। विदेशी पार्ट्स की कमी में भी वे स्थानीय सामग्री और डिज़ाइन इस्तेमाल करते हैं।
महिलाएँ: शिक्षा की असली ताकत ईरान की कहानी में महिलाओं की भूमिका केंद्रीय है। वे न केवल छात्राओं के रूप में आगे हैं, बल्कि रिसर्च प्रोजेक्ट्स, प्रकाशनों और यहां तक कि उच्च पदों पर भी योगदान दे रही हैं। 2000 के दशक में महिलाओं की विश्वविद्यालय नामांकन दर 58% तक पहुँची। आज कई क्षेत्रों में वे पुरुषों से अधिक हैं।
यह प्रगति सामाजिक परिवर्तन का संकेत है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में प्रतिबंध हैं, लेकिन शिक्षा के द्वार महिलाओं के लिए खुले रहे। परिणामस्वरूप ईरान की वैज्ञानिक कार्यबल में महिलाओं की उपस्थिति बढ़ी। वे नैनो-मटेरियल्स, एयरोस्पेस और मेडिकल रिसर्च में सक्रिय हैं। शिक्षा ने महिलाओं को आत्मनिर्भर और बौद्धिक रूप से सशक्त बनाया, जो देश की समग्र ताकत बनी।
पाबंदियाँ बन गईं अवसर पचास साल की पाबंदियाँ ईरान के लिए अभिशाप नहीं, बल्कि उत्प्रेरक साबित हुईं। जब आयात बंद हुए, तो ईरान ने घरेलू क्षमता विकसित की। शिक्षा पर निवेश बढ़ाया गया। युवा वैज्ञानिकों को प्रोत्साहन मिला। आज ईरान का मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रम इस आत्मनिर्भरता का प्रमाण है। यह दर्शाता है कि तकनीकी प्रगति हमेशा धन या खुले बाज़ार पर निर्भर नहीं होती—इच्छाशक्ति, शिक्षा और रणनीतिक फोकस पर होती है।
दुनिया ने ईरान को सतही नज़र से देखा। "मुल्लाओं का देश" कहकर उसके बौद्धिक विकास को नजरअंदाज किया। लेकिन हकीकत यह है कि ईरान की सच्ची ताकत उसके विश्वविद्यालयों, लैबोरेटरियों और शिक्षित युवाओं—खासकर महिलाओं—में है। वे ही ड्रोन के इंजन डिज़ाइन कर रहे हैं, मिसाइलों की सटीकता बढ़ा रहे हैं और देश को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में टिकाए हुए हैं।
सच्ची ताकत शिक्षा में छिपी है ईरान की कहानी सबक देती है—कोई भी देश कितनी भी पाबंदियाँ झेले, अगर उसकी नींव शिक्षा और अनुसंधान पर मजबूत हो, तो वह अजेय हो सकता है। अमेरिका की सैन्य श्रेष्ठता के सामने ईरान का टिकना इसीलिए संभव हुआ क्योंकि उसने दशकों से युवाओं—मर्द और औरत दोनों—को ज्ञान का हथियार दिया।
भविष्य में अगर ईरान को समझना है, तो सिर्फ़ उसके शासन या सैन्य क्षमता को नहीं, बल्कि उसके कैंपस, लैब और महिलाओं की किताबों को देखना होगा। यही वह अनदेखी ताकत है, जिसने पूरी दुनिया को अचंभित कर रखा है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 3,3026