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Wednesday, 1 April 2026

अमेरिका-इज़राइल की युद्ध उन्माद नीति और उनके समर्थकों को अमेरिकी कंपनियों का इनाम: ओरेकल ने 6 बजे सुबह एक ईमेल से 30,000 नौकरियाँ छीन लीं, भारत में 12,000 युवा बेरोजगार!

अमेरिका-इज़राइल की युद्ध उन्माद नीति और उनके समर्थकों को अमेरिकी कंपनियों का इनाम: ओरेकल ने 6 बजे सुबह एक ईमेल से 30,000 नौकरियाँ छीन लीं, भारत में 12,000 युवा बेरोजगार!
-Friday World April 1,2026
सुबह के 6 बजे का ईमेल... और जीवन भर की मेहनत एक पल में खत्म! कोई फोन नहीं, कोई मीटिंग नहीं, कोई मानवीय संवाद नहीं – बस एक ठंडा, क्रूर ईमेल: “हमने फैसला कर लिया है कि आपकी भूमिका अब कंपनी में जरूरी नहीं रही।” यही संदेश अमेरिकी टेक दिग्गज ओरेकल ने हजारों कर्मचारियों को भेजा, जिससे वैश्विक स्तर पर लगभग 30,000 लोगों की नौकरियाँ चली गईं। भारत में अकेले 12,000 कर्मचारी प्रभावित हुए, जो कंपनी के कुल भारतीय वर्कफोर्स (लगभग 30,000) का बड़ा हिस्सा है।

 यह घटना महज एक कंपनी की लागत कटौती नहीं है। यह अमेरिकी कॉर्पोरेट संस्कृति की क्रूरता, AI के नाम पर हो रही लूट और इज़राइल समर्थक नीतियों से जुड़ी बड़ी तस्वीर का एक हिस्सा है। जब अमेरिका-इज़राइल गठजोड़ युद्ध और विनाश की नीति पर अड़ा हुआ है, तो उनके समर्थक अमेरिकी कंपनियाँ अपने कर्मचारियों को इस तरह का “इनाम” दे रही हैं – बेरोजगारी, आर्थिक असुरक्षा और मानसिक यातना! 

 6 बजे सुबह का ईमेल: ओरेकल का चौंकाने वाला फैसला 

31 मार्च 2026 की सुबह, जब ज्यादातर लोग अभी सो रहे थे या दिन की शुरुआत कर रहे थे, तभी ओरेकल के कर्मचारियों के इनबॉक्स में “Oracle Leadership” के नाम से ईमेल आया। ईमेल में साफ लिखा था – “कंपनी में बड़े बदलाव चल रहे हैं। इन बदलावों के कारण हमने यह फैसला लिया है कि आपकी मौजूदा भूमिका अब जरूरी नहीं रही। आज आपका अंतिम कार्य दिवस है।” 

कोई पूर्व सूचना नहीं, कोई HR कॉल नहीं, कोई चर्चा नहीं। कई कर्मचारियों को सुबह 6 बजे ही सिस्टम से लॉक आउट कर दिया गया। भारत में भी यही स्थिति रही। सोशल मीडिया और रेडिट पर प्रभावित कर्मचारियों ने अपनी कहानियाँ साझा कीं, जो दिल दहला देने वाली हैं। 

एक कर्मचारी ने लिखा – “मेरे पिता 20 साल से ओरेकल में काम कर रहे थे। उन्हें कैंसर है। कंपनी ने एक फोन तक नहीं किया, सिर्फ एक ईमेल भेजकर नौकरी से निकाल दिया। यह कंपनी राक्षस है।”

 दूसरे ने बताया – “16 घंटे की शिफ्ट के खिलाफ मैंने पहले ही विरोध किया था और इस्तीफा दे दिया था। लेकिन जो लोग कंपनी को खड़ा करने में पीठ बनकर खड़े रहे, उन्हें भी इसी तरह निकाल दिया गया।” 

भारत में ओरेकल के नेटसूट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर समेत कई टीमों पर भारी कटौती हुई। प्रोजेक्ट मैनेजर, इंडिविजुअल कंट्रीब्यूटर और मैनेजर स्तर के पदों पर छंटनी हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक महीने के अंदर और छंटनी की तैयारी चल रही है। 

 छंटनी का असली कारण: AI इन्वेस्टमेंट और कॉर्पोरेट लालच ओरेकल की आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं है, लेकिन प्रभावित कर्मचारियों और विश्लेषकों का कहना है कि यह छंटनी AI डेटा सेंटर्स और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश के लिए की गई है। कंपनी ने OpenAI और अन्य के साथ साझेदारी बढ़ाई है। “Stargate” जैसी बड़ी AI परियोजनाओं में भी ओरेकल शामिल है, जिसमें अरबों डॉलर का निवेश हो रहा है। 

नतीजा? कर्मचारियों की बलि चढ़ाकर लागत बचाना और AI के नाम पर मुनाफा बढ़ाना। टेक इंडस्ट्री में यह नया ट्रेंड बन गया है – पहले कर्मचारियों से काम लो, फिर AI के बहाने उन्हें दरवाजे दिखा दो। अमेरिकी कंपनियाँ भारत जैसे देशों को सस्ते टैलेंट का स्रोत मानती हैं, लेकिन जब फायदे की बात आती है तो इंसानियत को ताक पर रख देती हैं।

ट्रंप, इज़राइल समर्थन और अमेरिकी कंपनियों का “इनाम” यह छंटनी महज आर्थिक फैसला नहीं लगता। ओरेकल के चेयरमैन लैरी एलिसन इज़राइल के खुलेआम समर्थक रहे हैं। कंपनी ने इज़राइल के साथ कई टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप की हैं। जब गाजा में युद्ध और विनाश जारी है, तब ओरेकल जैसी कंपनियाँ इज़राइल को टेक्नोलॉजी सपोर्ट दे रही हैं। 

दिलचस्प बात यह है कि ओरेकल के कई कर्मचारियों ने पहले प्रो-फिलिस्तीन आवाज़ उठाई थी। 68 कर्मचारियों ने ओपन लेटर पर साइन किए थे, जिसमें कंपनी की इज़राइल नीति की आलोचना की गई थी। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि प्रो-फिलिस्तीन कर्मचारियों को कंपनी के अंदर दबाव का सामना करना पड़ रहा था।

 ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिकी कंपनियाँ इज़राइल समर्थक नीतियों को बढ़ावा दे रही हैं। “स्टारगेट” जैसी AI परियोजनाओं में ट्रंप समर्थित फंड्स शामिल हैं। यानी एक तरफ युद्ध उन्माद को सपोर्ट, दूसरी तरफ अपने ही कर्मचारियों को बेरोजगार बनाना – यही है अमेरिकी कॉर्पोरेट और राजनीतिक गठजोड़ की सच्चाई।

 जब इज़राइल-हमास संघर्ष या ईरान-इज़राइल तनाव बढ़ता है, तब अमेरिकी कंपनियाँ अपने मुनाफे और “सुरक्षा” के नाम पर ऐसे फैसले लेती हैं जो आम इंसान को कुचल देते हैं। भारत जैसे देशों में हजारों युवा इंजीनियर इन कंपनियों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन जब वक्त आता है तो उन्हें “डिस्पोजेबल” समझ लिया जाता है। 

 प्रभावित परिवारों की पीड़ा और सामाजिक असर भारत में 12,000 परिवारों पर यह छंटनी सीधा हमला है। कई कर्मचारी EMI, घर का किराया, बच्चों की पढ़ाई और मेडिकल खर्च से जूझ रहे हैं। कैंसर से लड़ रहे 20 साल के अनुभवी कर्मचारी को बिना किसी सहानुभूति के निकाल दिया जाना मानवता की हत्या है। 

सोशल मीडिया पर कर्मचारियों की पोस्ट्स देखकर लगता है कि यह क्रूरता है। एक यूजर ने लिखा – “जिन लोगों ने कंपनी को बनाया, उन्हें एक ईमेल से निकाल दिया। यह सिस्टम ही राक्षसी है।” 

भारतीय IT सेक्टर पहले से ही छंटनी की मार झेल रहा है। ओरेकल जैसी बड़ी कंपनियों का यह कदम अन्य कंपनियों के लिए भी खराब मिसाल है। युवाओं में बेरोजगारी, तनाव और भविष्य की अनिश्चितता बढ़ रही है। 

 क्या सीख मिलती है? यह घटना हमें कई सबक देती है: 

1. कॉर्पोरेट वफादारी का भ्रम — कंपनियाँ कर्मचारियों को कभी “परिवार” नहीं मानतीं। वे सिर्फ प्रॉफिट मशीन हैं। 

2. AI का अंधा पीछा — टेक्नोलॉजी का विकास मानव कल्याण के लिए होना चाहिए, न कि नौकरियों की बलि चढ़ाकर। 

3. अमेरिकी नीति का असर — जब अमेरिका-इज़राइल गठबंधन युद्ध और विनाश को बढ़ावा देता है, तो उसका आर्थिक असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। उनके समर्थक कॉर्पोरेट्स कर्मचारियों को “इनाम” के रूप में बेरोजगारी देते हैं। 

4. भारत को आत्मनिर्भर बनना होगा — विदेशी कंपनियों पर अत्यधिक निर्भरता खतरनाक है। स्वदेशी टेक इकोसिस्टम को मजबूत करना जरूरी है। 

ओरेकल की यह छंटनी सिर्फ 30,000 नौकरियों की कहानी नहीं है। यह पूंजीवादी लालच, युद्ध उन्माद और मानव मूल्यों की गिरावट की कहानी है। जब अमेरिका और इज़राइल की नीतियाँ दुनिया को अस्थिर कर रही हैं, तब उनकी कंपनियाँ आम लोगों की जिंदगी को और अस्थिर कर रही हैं।

 भारतीय युवाओं को अब समझना होगा कि असली सुरक्षा अपनी स्किल्स, उद्यमिता और राष्ट्रहित में है। विदेशी कंपनियाँ जब चाहें तब ईमेल भेजकर सपनों को तोड़ सकती हैं।

 यह समय है सोचने का – क्या हम ऐसे सिस्टम का हिस्सा बनना चाहते हैं जो युद्ध को सपोर्ट करे और इंसानों को कुचले? या हम एक नया, न्यायपूर्ण और मानवीय आर्थिक मॉडल बनाएंगे? 

सावधान रहें, एकजुट रहें। सच्चाई की आवाज़ दबने नहीं दी जा सकती। 🌍⚖️

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World April 1,2026