-Friday World-April 16,2026
जब पूरा विश्व मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पर नजर टिकाए हुए है, तब चीन ने एशिया के दूसरे छोर पर अपनी रणनीतिक चाल चली है। अप्रैल 2026 में चीन ने स्कारबोरो शोल (Scarborough Shoal) के प्रवेश द्वार पर 352 मीटर लंबा फ्लोटिंग बैरियर लगा दिया है। यह कदम फिलीपींस के मछुआरों को उनके अपने एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) में घुसने से रोकने का स्पष्ट संकेत है।
सैटेलाइट इमेजरी (रॉयटर्स द्वारा 10-11 अप्रैल 2026 की तस्वीरें) साफ दिखाती है कि चीन ने न सिर्फ बैरियर लगाया है, बल्कि कोस्ट गार्ड के 10 जहाज और मेरिटाइम मिलिशिया की नावें भी तैनात कर दी हैं। यह घटना ठीक उसी समय हुई है जब अमेरिका का पूरा ध्यान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर केंद्रित है।
स्कारबोरो शोल: सिर्फ एक चट्टान नहीं, रणनीतिक महत्व का केंद्र
स्कारबोरो शोल फिलीपींस के लुजोन द्वीप से लगभग 120 समुद्री मील दूर स्थित एक चट्टानी एटॉल है। यह फिलीपींस के EEZ में आता है, लेकिन चीन इसे अपनी संप्रभुता का हिस्सा मानता है। 2012 के स्टैंडऑफ के बाद से चीन यहां प्रभावी नियंत्रण रखता है।
यह क्षेत्र मछली पकड़ने का समृद्ध इलाका है। चीन का नया बैरियर प्रवेश द्वार को लगभग बंद कर देता है, जिससे फिलीपींस के मछुआरों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है। फिलीपींस के कोस्ट गार्ड प्रवक्ता जे टारिएला ने इसे “गैरकानूनी” बताया और कहा कि चीन दबाव बढ़ा रहा है।
चीन की रणनीति “ग्रे जोन” टैक्टिक्स पर आधारित है — न तो पूर्ण युद्ध, न शांति। कोस्ट गार्ड जहाज, मेरिटाइम मिलिशिया (मछुआरों की नावों का इस्तेमाल) और अब फ्लोटिंग बैरियर के जरिए धीरे-धीरे नियंत्रण मजबूत किया जा रहा है।
चीन ने हॉर्मुज तनाव का फायदा उठाया?
निश्चित रूप से। अप्रैल 2026 में जब अमेरिका-ईरान के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव चरम पर है (ईरान ने शिपिंग को प्रभावित किया और अमेरिका ने ब्लॉकेड की धमकी दी), चीन ने साउथ चाइना सी में अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया।
निश्चित रूप से। अप्रैल 2026 में जब अमेरिका-ईरान के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव चरम पर है (ईरान ने शिपिंग को प्रभावित किया और अमेरिका ने ब्लॉकेड की धमकी दी), चीन ने साउथ चाइना सी में अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने समय की सही पसंद की है। अमेरिका का ध्यान मध्य पूर्व पर होने से इंडो-पैसिफिक में उसकी प्रतिक्रिया थोड़ी धीमी पड़ सकती है। चीन इस मौके का फायदा उठाकर “तथ्यों पर आधारित नियंत्रण” (facts on the ground) स्थापित करना चाहता है।
फिलीपींस और अमेरिका का जवाब
फिलीपींस पीछे हटने को तैयार नहीं है। राष्ट्रपति फर्डिनांड मार्कोस जूनियर ने अमेरिका के साथ सैन्य संबंधों को और मजबूत किया है। हाल ही में दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास (बालिकाटन 2026) की तैयारी की है, जिसमें जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य सहयोगी भी शामिल हो रहे हैं।
फिलीपींस ने अपने कोस्ट गार्ड और नौसेना के जहाज भेजे हैं। अमेरिका-फिलीपींस ने स्कारबोरो शोल के पास संयुक्त गश्त भी शुरू की है। लेकिन चीन इन गतिविधियों को “उकसावा” बताकर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- 2012: चीन-फिलीपींस स्टैंडऑफ के बाद चीन ने नियंत्रण हासिल किया।
- 2016: इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन कोर्ट ने फिलीपींस के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन चीन ने इसे ठुकरा दिया।
- 2025-2026: चीन ने कोस्ट गार्ड की मौजूदगी दोगुनी कर दी। अब फ्लोटिंग बैरियर के साथ स्थिति और कड़ी हो गई है।
चीन का दावा “नाइन-डैश लाइन” (या टेन-डैश लाइन) पर आधारित है, जिसे अधिकांश अंतरराष्ट्रीय समुदाय अस्वीकार करता है।
क्या बड़ा संकट आने वाला है?
दो मोर्चों पर तनाव:
1. हॉर्मुज स्ट्रेट: विश्व तेल व्यापार का 20% हिस्सा गुजरता है। यहां तनाव से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
2. साउथ चाइना सी: विश्व व्यापार का प्रमुख मार्ग। यहां चीन की आक्रामकता से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।
यदि दोनों क्षेत्रों में तनाव एक साथ बढ़ा तो एशिया-प्रशांत में बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका बढ़ जाएगी। फिलीपींस की 2026 में आसियान की अध्यक्षता भी इस मुद्दे को और महत्वपूर्ण बना रही है।
निष्कर्ष: रणनीतिक धैर्य या नई शीत युद्ध की शुरुआत?
चीन की यह चाल दिखाती है कि वह “सामरिक अवसरवाद” (strategic opportunism) का माहिर खिलाड़ी है। जब अमेरिका एक मोर्चे पर व्यस्त हो, चीन दूसरे मोर्चे पर अपनी स्थिति मजबूत कर लेता है।
फिलीपींस अकेला नहीं लड़ रहा — उसके पास QUAD, AUKUS और अमेरिका जैसे मजबूत सहयोगी हैं। लेकिन चीन की “सैलामी स्लाइसिंग” रणनीति (धीरे-धीरे छोटे-छोटे कदमों से नियंत्रण हासिल करना) को रोकना आसान नहीं।
विश्व अब देख रहा है कि क्या अंतरराष्ट्रीय कानून (UNCLOS) और 2016 का फैसला जीत हासिल कर पाएगा, या शक्ति का खेल फिर हावी हो जाएगा। फिलहाल स्कारबोरो शोल पर लगा 352 मीटर का बैरियर सिर्फ एक बैरियर नहीं — यह इंडो-पैसिफिक की भविष्य की शक्ति संतुलन का नया संकेत है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 16,2026