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Wednesday, 15 April 2026

भारी झटका: अमेरिका ने रूस-ईरान से सस्ता तेल खरीदने की छूट समाप्त कर दी, भारत को महंगा पड़ेगा तेल

भारी झटका: अमेरिका ने रूस-ईरान से सस्ता तेल खरीदने की छूट समाप्त कर दी, भारत को महंगा पड़ेगा तेल!-Friday World-April 16,2026 
जब विश्व मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट की अनिश्चितता से जूझ रहा है, उसी समय भारत को एक बड़ा आर्थिक झटका लगा है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने रूसी और ईरानी तेल पर लगी प्रतिबंधों की अस्थायी छूट (waiver) को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला कर लिया है। रूसी तेल की छूट 11 अप्रैल 2026 को समाप्त हो चुकी है, जबकि ईरानी तेल की छूट 19 अप्रैल को खत्म होने वाली है।

ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने स्पष्ट कहा है कि कोई नया लाइसेंस या छूट नहीं दी जाएगी। यह फैसला भारत के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में रूस भारत का सबसे बड़ा सस्ता तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है।

क्यों दी गई थी छूट और अब क्यों समाप्त?

मार्च 2026 में ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण हॉर्मुज स्ट्रेट प्रभावित हुआ और वैश्विक तेल आपूर्ति में कमी आई। तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं। इस संकट को कम करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने 30 दिन की अस्थायी छूट दी थी, जिससे भारत समेत कुछ देश पहले से समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीद सकें।

अमेरिका का कहना था कि यह “स्टॉपगैप” उपाय है, जो रूस को ज्यादा फायदा नहीं पहुंचाएगा क्योंकि केवल पहले से लोडेड कार्गो शामिल थे। लेकिन अब, जब छूट की समयसीमा पूरी हो गई, तो वॉशिंगटन ने इसे बढ़ाने से इनकार कर दिया। विपक्षी डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने पहले ही इस छूट की तीखी आलोचना की थी, आरोप लगाया कि इससे रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए पैसा मिल रहा है।

भारत पर क्या असर पड़ेगा?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। 2022 के बाद से रूस से सस्ते तेल की खरीद ने भारत को अरबों डॉलर की बचत दी। रूस से आयात भारत के कुल तेल आयात का 40% से ज्यादा हिस्सा पहुंच गया था। छूट मिलने के बाद भारतीय रिफाइनरी कंपनियों (रिलायंस, IOC, BPCL आदि) ने फिर से बड़े ऑर्डर दिए थे।

अब छूट समाप्त होने से:
- रूसी तेल की नई खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हो जाएंगे।
- भारत को सऊदी अरब, UAE, इराक, अमेरिका या अन्य महंगे स्रोतों पर निर्भरता बढ़ानी पड़ेगी।
- रूसी तेल की तुलना में ये विकल्प 10-20% महंगे हो सकते हैं।
- परिणामस्वरूप पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में उछाल आ सकता है।
- रुपये में भुगतान (Rupee-Ruble) व्यवस्था भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों का दबाव बढ़ेगा।

भारत सरकार ने पहले ही अमेरिका से छूट बढ़ाने की उम्मीद जताई थी, लेकिन अब स्थिति अनिश्चित है।

 भारत के पास क्या विकल्प?

1. वैकल्पिक स्रोत: सऊदी, UAE, अमेरिका और वेनेजुएला से बढ़ी हुई खरीद। लेकिन ये महंगे हैं और शिपिंग समय भी ज्यादा लगता है।
2. रूस के साथ वैकल्पिक भुगतान: रुपया-रूबल मैकेनिज्म को और मजबूत करना, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों से बचना मुश्किल।
3. स्टॉक पाइलिंग: रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व का इस्तेमाल, लेकिन यह लंबे समय तक नहीं चलेगा।
4. घरेलू उत्पादन बढ़ाना: लेकिन भारत अभी भी आयात पर बहुत निर्भर है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव जारी रहा तो वैश्विक तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे भारत को दोहरी मार लगेगी — महंगा तेल + कम आपूर्ति।

 ट्रंप प्रशासन का बदलता रुख

ट्रंप प्रशासन ने पहले रूस पर सख्ती दिखाई थी। 2025 में भारत पर 25% टैरिफ भी लगाया गया था जब भारत रूसी तेल खरीद रहा था। फिर ईरान संकट के दौरान अस्थायी छूट दी गई। अब छूट न बढ़ाने का फैसला दर्शाता है कि अमेरिका अपनी “अमेरिका फर्स्ट” नीति पर अड़ा हुआ है और सहयोगी देशों को भी रूस-ईरान से दूरी बनाने के लिए दबाव डाल रहा है।

बड़े सवाल

क्या भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा और अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करेगा? या महंगे तेल को स्वीकार कर आर्थिक बोझ बढ़ाएगा? क्या भारत और रूस मिलकर कोई नया भुगतान रूट निकाल पाएंगे?

यह फैसला न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को चुनौती दे रहा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी नई अस्थिरता पैदा कर सकता है। भारत जैसे विकासशील देश, जो सस्ते तेल पर निर्भर हैं, अब महंगे विकल्पों के बीच फंस गए हैं।

अगर हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव लंबा खिंचा तो स्थिति और बिगड़ सकती है। भारत को अब कूटनीतिक कौशल और घरेलू ऊर्जा नीति में सुधार की जरूरत है। सस्ता तेल का दौर शायद खत्म हो रहा है, और महंगा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब दोनों पर बोझ बन सकता है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 16,2026