नई दिल्ली/अहमदाबाद: महंगाई की आग अब होटल और रेस्टोरेंट की थालियों तक पहुंच गई है। 1 मई 2026 से कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर (19 किलो) के भाव में भारी उछाल के बाद देशभर में खान-पान का खर्चा महंगा हो गया है। एक सिलिंडर पर लगभग 993 रुपये की बढ़ोतरी के बाद अब इसकी कीमत 3070 रुपये के पार पहुंच गई है। होटल-रेस्टोरेंट मालिकों ने चेतावनी दी है कि इस बढ़ोतरी का सीधा असर मेन्यू पर पड़ेगा और ग्राहकों को 10 से 15 प्रतिशत तक महंगाई झेलनी पड़ेगी। खासकर गुजरात की प्रसिद्ध थाली अब आम आदमी की जेब पर भारी पड़ने वाली है।
कमर्शियल गैस की कटोकटी ने मचा दिया हड़कंप
तेल कंपनियों द्वारा 1 मई से लागू किए गए इस फैसले ने पूरे फूड इंडस्ट्री को हिला दिया है। घरेलू सिलिंडर के भाव स्थिर रखे गए, लेकिन कमर्शियल सिलिंडर पर भारी भरकम बढ़ोतरी की गई। फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FHRAI) के पदाधिकारियों के अनुसार, गैस खपत फूड बिजनेस का सबसे बड़ा खर्चा है। एक बड़े रेस्टोरेंट में रोजाना कई सिलिंडर खर्च होते हैं। ऐसे में महंगे गैस से मासिक खर्चा लाखों में बढ़ गया है।
अहमदाबाद के प्रसिद्ध थाली रेस्टोरेंट के मालिक रुशभ पुरोहित ने कहा, “हम थाली का मेन्यू छोटा करने पर विचार कर रहे हैं। अगर 10 रुपये भी थाली महंगी हुई तो नियमित ऑफिस जाने वाले ग्राहक पर महीने में 300 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।”
गुजराती थाली पर सबसे ज्यादा असर
गुजरात की संस्कृति में गुजराती थाली का विशेष स्थान है। दाल-बाटी, शाक, रोटली, फरसान, मीठाई और छास समेत पूरी थाली अब महंगी होने वाली है। अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा जैसे शहरों में छोटे-बड़े रेस्टोरेंट और ढाबों पर पहले से ही दबाव था। अब गैस की बढ़ती कीमत ने स्थिति और खराब कर दी है।
उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, गैस की लागत में 40-50% की बढ़ोतरी का सीधा असर फूड कॉस्ट पर पड़ेगा। नतीजा?
- चाय-नाश्ता: 10-20 रुपये महंगा
- लंच-डिनर थाली: 30 से 80 रुपये तक बढ़ोतरी
- स्नैक्स और फरसान: 15-25% तक महंगा
- बेकरी प्रोडक्ट्स और प्रोसेस्ड फूड: अतिरिक्त असर
छोटे व्यापारियों की कमर टूट गई
बड़ा होटल तो किसी तरह मैनेज कर ले, लेकिन हाईवे के ढाबे, कॉलेज कैंटीन, छोटे रेस्टोरेंट, कैटरिंग वाले और क्लाउड किचन वाले व्यापारियों पर कहर टूट पड़ा है। अहमदाबाद के एक कैंटीन संचालक ने बताया, “हर आइटम पर 10-20 रुपये बढ़ गए हैं। मेन्यू बदलना पड़ रहा है। लोग अब बाहर खाना कम कर रहे हैं।”
वर्ष 2026 में अब तक कमर्शियल सिलिंडर पर कुल 1500 रुपये से ज्यादा का भाव वृद्धि हो चुका है। इससे पहले भी कई बार बढ़ोतरी हुई थी। परिणामस्वरूप कई छोटे प्रतिष्ठान बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं।
उद्योग की मांग और सरकार से अपील
FHRAI के उपाध्यक्ष प्रदीप शेट्टी ने स्पष्ट कहा, “गैस के भाव बढ़ने से जो डिश हम ग्राहकों को दे रहे हैं, उसमें 10-15% का भाव वृद्धि अपरिहार्य है। सरकार को इस क्षेत्र को राहत देनी चाहिए, अन्यथा नौकरियां प्रभावित होंगी और छोटे व्यापारी बर्बाद हो जाएंगे।”
उद्योग जगत की मांग है कि:
1. कमर्शियल सिलिंडर पर सब्सिडी या राहत पैकेज
2. जीएसटी में कमी
3. बिजली बिल पर छूट
4. छोटे रेस्टोरेंट के लिए विशेष सहायता
महंगाई का व्यापक असर
यह सिर्फ गैस की समस्या नहीं है। इसके साथ बेकरी सामग्री, सब्जी, तेल और अन्य कच्चे माल की कीमतें भी बढ़ रही हैं। नतीजा यह कि बाहर खाना अब लग्जरी आइटम बनता जा रहा है। मध्यम वर्गीय परिवार अब हफ्ते में एक बार की बजाय महीने में एक बार ही बाहर खाना पसंद कर रहे हैं।
क्या है समाधान?
- मेन्यू ऑप्टिमाइजेशन: कम गैस खपत वाली डिशेज को बढ़ावा
- एनर्जी एफिशिएंट उपकरण: इंडक्शन और सोलर कुकर का उपयोग
- बल्क खरीदारी: थोक में सामान खरीदकर लागत बचाना
- डिजिटल ऑर्डरिंग: डिलीवरी पार्टनरशिप से नए ग्राहक
लेकिन ये सब लंबे समय के उपाय हैं। तत्काल राहत की जरूरत है।
उपभोक्ताओं के लिए सलाह
- घर का खाना बढ़ाएं
- लोकल और सीजनल सामग्री का इस्तेमाल करें
- थाली शेयरिंग का विकल्प चुनें
- छोटे रेस्टोरेंट को सपोर्ट करें
कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में हुई यह भारी बढ़ोतरी सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि लाखों लोगों की रोजी-रोटी और खान-पान की आदतों को प्रभावित करने वाला फैसला है। गुजराती थाली की महक अब महंगाई की चादर से ढकती जा रही है। सरकार और उद्योग को मिलकर इस संकट का समाधान निकालना होगा, वरना फूड इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा अस्तित्व के संकट से जूझेगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-May 2,2026