-Friday World-26 May 2026
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिर आसमान छू रही हैं। ईरान-अमेरिका-इज़रायल तनाव के चलते वैश्विक कच्चे तेल के भाव बढ़ने से भारतीय तेल कंपनियों ने भी पिछले 11 दिनों में ही 7.5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102 रुपये के पार पहुंच गई है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि आजादी के समय एक लीटर पेट्रोल सिर्फ 27 पैसे का था? यानी आज के 102 रुपये में उस वक्त लगभग 378 लीटर पेट्रोल खरीदा जा सकता था! यह आंकड़ा न सिर्फ हैरान करने वाला है, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था, सरकारी नीतियों और वैश्विक घटनाओं के प्रभाव को समझने का एक रोचक आईना भी है।
आइए, 1928 से 2026 तक के इस लंबे सफर को विस्तार से समझते हैं।
1928: भारत का पहला पेट्रोल पंप
भारत में पेट्रोल की शुरुआत 1928 में मुंबई से हुई। बॉम्बे (अब मुंबई) में पहला पेट्रोल पंप लगाया गया था। उस समय पेट्रोल की कीमत सिर्फ **6 पैसे प्रति लीटर** थी। उस दौर में पेट्रोल गैलन में बिकता था। एक गैलन लगभग 4.5 लीटर होता था, यानी एक गैलन पेट्रोल की कीमत करीब 27 पैसे।
उस समय आधुनिक डिजिटल पंप नहीं थे। एक बड़ा गोलाकार डायल वाला हैंडपंप इस्तेमाल होता था, जिसकी सूई घूमकर बताती थी कि कितना पेट्रोल भरा गया है। कारें बहुत कम थीं और पेट्रोल मुख्य रूप से अमीर वर्ग और सरकारी अधिकारियों तक ही सीमित था।
1947: स्वतंत्र भारत में पेट्रोल की सस्ती
15 अगस्त 1947 को जब भारत आजाद हुआ, तब पेट्रोल की कीमत 27 पैसे प्रति लीटर थी। डीजल और भी सस्ता — मात्र 15 से 20 पैसे प्रति लीटर। उस समय औसत मासिक वेतन 100 से 150 रुपये था।
तुलनात्मक आंकड़े (दिल्ली के वर्तमान भाव के आधार पर):
- 1947 में 102 रुपये में ≈ 378 लीटर पेट्रोल
- 1947 में 102 रुपये में ≈ 476 लीटर डीजल
लेकिन याद रखिए — उस समय न तो सड़कें इतनी थीं, न गाड़ियों की संख्या, और न ही आज जैसी औद्योगिक मांग।
1947 से 1970 तक: नियंत्रित और सस्ता दौर
द्वितीय विश्व युद्ध (1939-45) के बाद तेल की भारी कमी थी। सरकार ने पेट्रोल पर कोटा सिस्टम और कूपन व्यवस्था लागू कर दी थी। डॉक्टर, जज और जरूरी सेवाओं वाले लोगों को ज्यादा कूपन मिलते थे। आम लोग अपनी गाड़ियां गैरेज में बंद रख देते थे, चोरी के डर से।
1970 तक पेट्रोल की कीमत 90 पैसे प्रति लीटर थी। इस पूरे दौर में तेल बाजार विदेशी कंपनियों — बर्मा शेल, स्टैंडर्ड वेक्यूम और कैल्टेक्स — के नियंत्रण में था।
1970 का दशक: राष्ट्रीयकरण और पहली बड़ी कटौती
1973 की वैश्विक तेल संकट (ओपेक संकट) ने पूरी दुनिया को हिला दिया। अरब देशों ने तेल निर्यात कम कर दिया, जिससे कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू गईं। भारत में पेट्रोल 1980 तक 5.10 रुपये और 1985 तक 8 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया।
इंदिरा गांधी सरकार ने विदेशी कंपनियों का राष्ट्रीयकरण कर दिया:
- 1974 में ESSO → HPCL (हिंदुस्तान पेट्रोलियम)
- 1976 में बर्मा शेल → BPCL (भारत पेट्रोलियम)
- IOCL (Indian Oil) पहले से ही सरकारी कंपनी थी और आज भी देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी है।
1990 से 2008: उदारीकरण और उछाल
1991 के आर्थिक सुधारों के बाद धीरे-धीरे तेल बाजार खुला। लेकिन असली बदलाव 2002-2008 में आया, जब सरकार ने पेट्रोल-डीजल को बाजार-आधारित मूल्य निर्धारण की दिशा में ले जाना शुरू किया।
- 2004: पेट्रोल 33.71 रुपये
- 2008: वैश्विक कच्चा तेल 147 डॉलर प्रति बैरल(सबसे ऊंचा स्तर) → भारत में पेट्रोल 51 रुपये
2014-2026: नई ऊंचाइयां और उतार-चढ़ाव
- 2014: पेट्रोल 72.43 रुपये
- 2015: वैश्विक तेल की कीमतों में भारी गिरावट → पेट्रोल 60 रुपये तक गिरा
- 2024: पहली बार 100 रुपये पार
- 2026 (वर्तमान): 102 रुपये के आसपास
आज की स्थिति क्यों?
ईरान-इज़रायल-अमेरिका तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 65 से 98 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच गई हैं। भारत 85% तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय घटनाएं सीधे हमारी जेब पर असर डालती हैं।
सरकार एक्साइज ड्यूटी, वैट, डीलर कमीशन और अन्य टैक्स के जरिए भी काफी राजस्व कमाती है। पेट्रोल-डीजल पर टैक्स सरकार की आय का बड़ा स्रोत है।
कीमतों का पूरा इतिहास (संक्षिप्त तालिका)
| वर्ष | पेट्रोल (₹ प्रति लीटर) |
| 1947 | 0.27
| 1970 | 0.90
| 1990 | 4.20
| 2004 | 33.71
| 2008 | 51.00
| 2014 | 72.43 |
| 2026 | 102+ |
क्या बदला? क्रय शक्ति और जीवनशैली*
1947 में 150 रुपये वेतन पर 378 लीटर पेट्रोल मिलता था। आज औसत आय बहुत बढ़ गई है, लेकिन महंगाई और गाड़ियों की संख्या भी बढ़ गई है। एक समय था जब पेट्रोल लग्जरी था, आज यह जरूरत बन गया है।
भविष्य की चुनौती
पेट्रोल की कीमतों का यह सफर सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक स्वतंत्रता, वैश्विक निर्भरता और ऊर्जा नीति का इतिहास है। भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहन, हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा इस निर्भरता को कम कर सकते हैं।
जब तक हम कच्चे तेल पर निर्भर रहेंगे, तब तक अंतरराष्ट्रीय घटनाएं हमारी जेब प्रभावित करती रहेंगी।
तो अगली बार जब आप पेट्रोल पंप पर 100+ रुपये देते हैं, तो याद रखिए — यह सिर्फ ईंधन नहीं, बल्कि 78 सालों की आर्थिक यात्रा का एक छोटा सा हिस्सा है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-26 May 2026