-Friday World-19 May 2026
वे केवल एक उद्योगपति नहीं थे। वे भारतीय उद्योग के पिता थे, एक दूरदर्शी राष्ट्रनिर्माता, परोपकारी और मानवतावादी थे, जिन्होंने अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा देश की सेवा में समर्पित कर दिया।
नवसारी से मुंबई तक: एक साधारण शुरुआत
3 मार्च 1839 को गुजरात के छोटे से कस्बे नवसारी में एक पारसी परिवार में जमशेदजी का जन्म हुआ। उनके पिता नौशेरवानजी टाटा पारसी पादरियों के परिवार से थे, लेकिन उन्होंने परंपरा तोड़कर व्यापार का रास्ता चुना। जमशेदजी मात्र 14 वर्ष की आयु में पिता के साथ मुंबई आ गए। उन्होंने एल्फिंस्टन कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की और 1858 में स्नातक हुए।
1868 में, मात्र 29 वर्ष की आयु में, उन्होंने 21,000 रुपये की पूंजी से अपना पहला व्यापारिक उद्यम शुरू किया। शुरुआत छोटी थी — एक दिवालिया तेल मिल को खरीदकर उसे कपास मिल में बदल दिया, जिसका नाम रखा एलेक्जेंडर मिल। दो वर्ष बाद इसे मुनाफे के साथ बेच दिया। फिर 1874 में नागपुर में सेंट्रल इंडिया स्पिनिंग, वीविंग एंड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी की नींव रखी। 1 जनवरी 1877 को, जब महारानी विक्टोरिया को भारत की सम्राज्ञी घोषित किया गया, उसी दिन इम्प्रेस मिल (Empress Mills) शुरू हुई।
यह मिल केवल एक कारखाना नहीं था। जमशेदजी ने इसमें आधुनिक मशीनरी लगाई, बेहतर वेतन और कार्य स्थितियां दीं। उन्होंने कर्मचारियों के लिए आवास, पानी, चिकित्सा और शिक्षा की व्यवस्था की — वह समय जब ब्रिटिश कारखानों में मजदूरों का शोषण आम था। इम्प्रेस मिल ने साबित कर दिया कि भारतीय उद्यमी विश्वस्तरीय गुणवत्ता और नैतिकता के साथ व्यापार कर सकते हैं।
तीन महान सपने: स्टील, बिजली और विज्ञान
1880 के बाद जमशेदजी के जीवन में तीन बड़े लक्ष्य केंद्रित हो गए:
1. लोहा और स्टील का कारखाना
2. जलविद्युत ऊर्जा
3. विश्वस्तरीय वैज्ञानिक शिक्षा संस्थान
उनके जीवनकाल में इनमें से केवल ताज महल पैलेस होटल ही पूरा हो सका, लेकिन उनके बेटे दोराबजी और रतनजी टाटा ने इन सपनों को साकार किया।
टाटा स्टील (TISCO): जमशेदजी ने स्टील प्लांट की कल्पना की जब भारत में स्टील का उत्पादन नगण्य था। उन्होंने जर्मनी, अमेरिका और ब्रिटेन का दौरा किया, तकनीक सीखी। उन्होंने जमशेदपुर (तब सकची) में जगह चुनी जहां कोयला, लोहा और पानी उपलब्ध थे। 1907 में TISCO की स्थापना हुई और 1912 में पहला स्टील निकला। आज टाटा स्टील न केवल भारत बल्कि विश्व की प्रमुख स्टील कंपनियों में है। जमशेदपुर को “स्टील सिटी” कहा जाता है — एक मॉडल औद्योगिक शहर जहां कर्मचारियों को सर्वोत्तम सुविधाएं मिलती हैं।
टाटा पावर: उन्होंने मुंबई को सस्ती और स्वच्छ बिजली देने के लिए जलविद्युत परियोजनाओं की योजना बनाई। 1910 में टाटा हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर सप्लाई कंपनी शुरू हुई, जो आज भी मुंबई की बिजली का महत्वपूर्ण स्रोत है।
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु: जमशेदजी ने अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा इस संस्थान के लिए दान किया। उन्होंने विक्रम साराभाई, सी.वी. रामन जैसे वैज्ञानिकों की पीढ़ी तैयार करने का सपना देखा। IISc आज भारत के शीर्ष अनुसंधान संस्थानों में से एक है, जिसने नोबेल पुरस्कार विजेताओं और वैश्विक वैज्ञानिकों को जन्म दिया।
ताज महल होटल: स्वाभिमान की कहानी
1903 में मुंबई के अपोलो बंदरगाह पर **ताज महल पैलेस होटल** खुला। किंवदंती है कि एक ब्रिटिश होटल में जमशेदजी को “केवल भारतीय होने” के कारण प्रवेश नहीं मिला, तो उन्होंने फैसला किया कि वे ऐसा होटल बनाएंगे जहां भारतीयों का स्वागत हो और जो ब्रिटिश होटलों से बेहतर हो।
4.21 करोड़ रुपये (उस समय की भारी राशि) खर्च कर बनाया गया यह होटल भारत का पहला ऐसा होटल था जिसमें बिजली, अमेरिकन फैन, जर्मन लिफ्ट, तुर्की स्नान और अंग्रेजी बटलर थे। यह स्वदेशी गौरव का प्रतीक बना। आज टाटा समूह के ताज होटल्स विश्वभर में भारतीय आतिथ्य की पहचान हैं।
परोपकार की मिसाल: संपत्ति से ज्यादा समर्पण
जमशेदजी ने अपनी अधिकांश संपत्ति शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यों के लिए दान कर दी। टाटा ट्रस्ट्स आज भी दुनिया के सबसे बड़े परोपकारी ट्रस्टों में शामिल हैं। उन्होंने कहा था — “व्यापार में ईमानदारी और स्पष्टता सबसे महत्वपूर्ण है।” उनका मानना था कि उद्योग राष्ट्र की सेवा का माध्यम होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत लाभ का।
वे कर्मचारी कल्याण के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने 8 घंटे काम, मातृत्व अवकाश, स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाओं की वकालत की — वह समय जब ये अवधारणाएं विकसित देशों में भी नई थीं।
विरासत जो आज भी जीवित है
जमशेदजी की मृत्यु के बाद उनके बेटों और नाती रतन टाटा ने इस विरासत को आगे बढ़ाया। आज टाटा समूह स्टील, ऑटोमोबाइल (टाटा मोटर्स), आईटी (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज), हवाई अड्डे, होटल, टेलीकॉम, चाय (टेटली), नमक और बहुत कुछ में फैला हुआ है।
टाटा समूह की कुल संपत्ति और प्रभाव भारत की जीडीपी का बड़ा हिस्सा है, लेकिन सबसे बड़ी बात — इसकी नैतिकता। टाटा कंपनियां अभी भी सामाजिक जिम्मेदारी, पर्यावरण संरक्षण और कर्मचारी कल्याण के लिए जानी जाती हैं।
19 मई: पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि
आज 19 मई को हम सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि एक युग को याद करते हैं। जमशेदजी ने साबित किया कि भारतीय उद्यमी विश्व को चुनौती दे सकते हैं। उन्होंने दिखाया कि धन कमाना और उसे राष्ट्रहित में लगाना दोनों संभव हैं।
उनकी दूरदर्शिता आज भी प्रेरणा देती है। जब भारत “आत्मनिर्भर भारत” और “विकसित भारत 2047” का सपना देख रहा है, तब जमशेदजी टाटा का जीवन हमें याद दिलाता है कि सपने बड़े देखो, मेहनत करो और देश को पहले रखो।
जमशेदजी नुस्सेरवानजी टाटा —
एक नाम जो उद्योग, परोपकार, दूरदर्शिता और राष्ट्रप्रेम का पर्याय बन गया।
उनकी जयंती पर हम उन्हें नमन करते हैं। उनकी स्मृति में हम वादा करते हैं कि हम उनके सपनों को पूरा करेंगे — एक समृद्ध, शिक्षित, औद्योगिक रूप से मजबूत और समानतापूर्ण भारत का निर्माण करेंगे।
“देश की सेवा में लगे रहो, ईमानदारी से काम करो — सफलता अपने आप आएगी।”
— जमशेदजी टाटा की यही भावना आज भी हर टाटा कर्मचारी और हर भारतीय उद्यमी को प्रेरित करती है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-19 May 2026