-Friday World-13 May 2016
दक्षिणी लेबनान के शांत गांवों में एक बार फिर से तबाही का सिलसिला शुरू हो गया है। इजरायली हवाई हमलों ने अरबसलीम (Arab Salim) और कफरा (Kafra) जैसे छोटे-छोटे शहरों को निशाना बनाया, जबकि एक ड्रोन हमले में सादियात रोड (Saadiyat Road) पर एक वाहन को सीधे टारगेट किया गया। ये हमले न केवल युद्धविराम का उल्लंघन हैं, बल्कि निर्दोष नागरिकों की जान लेने का एक क्रूर तरीका भी साबित हो रहे हैं। इस लेख में हम इस घटना की गहराई में उतरेंगे, ऐतिहासिक संदर्भ समझेंगे, मानवीय प्रभावों का विश्लेषण करेंगे और क्षेत्रीय जियोपॉलिटिक्स पर प्रकाश डालेंगे।
हमलों का विवरण: मौत का नया दौर
हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली वायुसेना और ड्रोन ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों पर एक साथ हमले किए। अरबसलीम और कफरा जैसे शहर, जो सामान्य दिनों में शांतिपूर्ण कृषि और स्थानीय जीवन के केंद्र हैं, अचानक बमों की बौछार का शिकार हो गए। इन हमलों में कई निर्दोष लोग घायल हुए और कुछ की जान चली गई।
सादियात रोड पर ड्रोन हमला विशेष रूप से चिंताजनक है। यह सड़क बेरूत को दक्षिणी लेबनान से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण धमनी है। यहां एक साधारण वाहन को निशाना बनाया गया, जिसमें यात्रा कर रहे लोग सामान्य दिनचर्या में व्यस्त थे। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय और स्थानीय मीडिया के मुताबिक, ऐसे हमलों में महिलाएं, बच्चे और आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। एक हमले में 12 वर्षीय बच्ची समेत पूरे परिवार की जान चली गई। ये आंकड़े केवल संख्या नहीं, बल्कि पूरी सभ्यता पर हमला हैं।
ये हमले ऐसे समय में हो रहे हैं जब कथित युद्धविराम (ceasefire) लागू माना जा रहा था। लेकिन इजरायल की तरफ से बार-बार उल्लंघन हो रहे हैं। लेबनान के राष्ट्रीय समाचार एजेंसी (NNA) ने इन हमलों को "आक्रामकता" करार दिया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: संघर्ष की जड़ें
लेबनान-इजरायल सीमा पर तनाव नया नहीं है। 1948 के अरब-इजरायली युद्ध से लेकर 2006 के लेबनान युद्ध तक, यह क्षेत्र हमेशा अस्थिर रहा है। हिजबुल्लाह जैसे संगठन इजरायली कब्जे और हमलों के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक बन चुके हैं, जबकि इजरायल इन्हें सुरक्षा खतरा मानता है।
हाल के वर्षों में, गाजा संघर्ष के बाद लेबनान में तनाव बढ़ा। इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में "सुरक्षा जोन" बनाने के नाम पर हमले तेज कर दिए। अरबसलीम, कफरा, नबातिएह और आसपास के इलाके बार-बार निशाने पर आते रहे। 2025-2026 के बीच के युद्धविराम के बावजूद, इजरायली ड्रोन और जेट नियमित रूप से लेबनानी आकाश का उल्लंघन कर रहे हैं।
ये हमले केवल सैन्य लक्ष्यों तक सीमित नहीं रहते। अक्सर स्कूल, अस्पताल, कृषि क्षेत्र और सड़कें भी प्रभावित होती हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट्स में इजरायली हमलों में सफेद फॉस्फोरस के इस्तेमाल का जिक्र भी आता है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
मानवीय संकट: पीड़ितों की कहानियां
कल्पना कीजिए – एक किसान सुबह अपने खेत में काम कर रहा है, अचानक आसमान से बम गिरते हैं। या एक परिवार सादियात रोड से बेरूत जा रहा है, बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए, और ड्रोन का हमला हो जाता है। ये कल्पना नहीं, हकीकत है।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, हाल के हमलों में सैकड़ों लोग शहीद हो चुके हैं। हजारों घायल हैं। विस्थापितों की संख्या लाखों में पहुंच गई है। दक्षिणी लेबनान के गांव खाली हो रहे हैं। लोग सिडोन (Sidon) और बेरूत की ओर पलायन कर रहे हैं।
महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। एक रिपोर्ट में बताया गया कि एक हमले में पिता और उसकी 12 वर्षीय बेटी समेत पूरे परिवार की जान चली गई। ऐसे मंजर देखकर दिल पिघल जाता है। लेबनान पहले से आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और शरणार्थी समस्या से जूझ रहा है। इन हमलों ने स्थिति को और बदतर बना दिया है।
अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठन जैसे रेड क्रॉस और यूनिसेफ ने मदद के लिए अपील की है, लेकिन इजरायली ब्लॉकेड और हमलों के कारण राहत कार्य मुश्किल हो गए हैं।
जियोपॉलिटिक्स: बड़े खिलाड़ियों की भूमिका
इस संघर्ष में अमेरिका, ईरान, सऊदी अरब और अन्य देशों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इजरायल को अमेरिका से अत्याधुनिक हथियार और समर्थन मिलता है। वहीं, हिजबुल्लाह को ईरान का समर्थन प्राप्त है।
ये हमले मध्य पूर्व में बड़े युद्ध की आशंका पैदा करते हैं। यदि लेबनान पूरी तरह उलझ गया तो पूरा क्षेत्र आग की चपेट में आ सकता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कई बार प्रस्ताव पारित कर चुकी है, लेकिन इजरायल अक्सर उन्हें नजरअंदाज करता रहा है।
भारत जैसे देशों की स्थिति संतुलित है। भारत लेबनान के साथ अच्छे संबंध रखता है और इजरायल के साथ भी रक्षा सहयोग करता है। लेकिन मानवीय मूल्यों के आधार पर, निर्दोष नागरिकों की हत्या की निंदा जरूरी है।
मीडिया और प्रचार युद्ध
पश्चिमी मीडिया अक्सर इजरायली दृष्टिकोण को प्रमुखता देता है, जबकि अरबी और स्वतंत्र मीडिया लेबनानी पीड़ितों की कहानियां दिखाते हैं। सोशल मीडिया पर लेबनानी नागरिक वीडियो शेयर कर सच्चाई सामने ला रहे हैं।
इजरायल "आत्मरक्षा" का हवाला देता है, लेकिन जब हमले सड़कों पर चल रहे सिविलियन वाहनों पर होते हैं, तो यह दावा कमजोर पड़ जाता है।
### भविष्य की राह: शांति संभव है?
शांति के लिए दोनों पक्षों को समझौता करना होगा। लेबनान की संप्रभुता का सम्मान, इजरायली कब्जे का अंत और हथियारों की दौड़ पर रोक जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को निष्पक्ष भूमिका निभानी चाहिए।
भारतीय दृष्टिकोण से देखें तो हम "वसुधैव कुटुम्बकम्" के सिद्धांत में विश्वास रखते हैं। हर निर्दोष जान की कीमत अनमोल है, चाहे वह लेबनान का हो या गाजा का।
निष्कर्ष: आवाज उठानी होगी
अरबसलीम, कफरा और सादियात रोड के हमले केवल स्थानीय घटना नहीं हैं। ये मानवता पर हमला हैं। हमें इन पीड़ितों की आवाज बनना चाहिए। सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलाएं, सरकारों से निंदा की मांग करें और मानवीय मदद पहुंचाने में सहयोग करें।
इजरायली आक्रामकता का यह सिलसिला रुकना चाहिए। लेबनान के लोग शांति के हकदार हैं। दुनिया को अब चुप नहीं रहना चाहिए।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-13 May 2016