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Thursday, 7 May 2026

तमिलनाडु का राजनीतिक भूकंप: विजय की TVK सत्ता के द्वार पर, BJP की 'चाणक्य' रणनीति और AIADMK का संकट!

तमिलनाडु का राजनीतिक भूकंप: विजय की TVK सत्ता के द्वार पर, BJP की 'चाणक्य' रणनीति और AIADMK का संकट!-Friday World-6 May 2026

नई दिल्ली/चेन्नई, 7 मई 2026। तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में ऐसा विस्फोटक मोड़ आया है कि पूरा देश स्तब्ध है। अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय की नई पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने मात्र दो साल में राज्य की राजनीति का गणित ही बदल दिया है। 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में TVK ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत (118) से सिर्फ 10 सीटें दूर है। 

यह 10 सीटों का अंतर अब राज्य में गठबंधन की तीव्र खींचतान का केंद्र बन गया है। भाजपा पर्दे के पीछे पूरी ताकत से सक्रिय हो गई है, कांग्रेस में घबराहट फैल गई है और AIADMK पूरी तरह धर्मसंकट में फंस गया है।

 118 – बहुमत का जादुई आंकड़ा

तमिलनाडु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है। TVK के पास फिलहाल 108 सीटें हैं। DMK को 59, AIADMK को 47 और कांग्रेस को मात्र 5 सीटें मिली हैं। 

विजय ने खुद दो सीटों से जीत हासिल की है। अब सवाल यह है कि बाकी 10 सीटों का समर्थन कहां से आएगा? इसी सवाल ने पूरे राज्य में सियासी घमासान मचा दिया है।

भाजपा की मास्टर स्ट्रोक: कांग्रेस को सत्ता से दूर रखो

सूत्रों के अनुसार, भाजपा विजय के नेतृत्व में TVK की सरकार बनाना चाहती है, लेकिन अपनी शर्त पर। भाजपा किसी भी कीमत पर यह नहीं चाहती कि विजय कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाएं। 

पड़ोसी राज्य केरल में कांग्रेस की मजबूत वापसी ने भाजपा को चिंतित कर दिया है। तमिलनाडु में भी कांग्रेस को सत्ता के करीब नहीं आने देने की रणनीति बनाई जा रही है। इसीलिए भाजपा अपने पुराने सहयोगी AIADMK पर दबाव बना रही है कि वह TVK को समर्थन दे।

भाजपा की यह ‘चाणक्य’ नीति स्पष्ट है – द्रविड़ दलों के पारंपरिक गढ़ में भी अपना प्रभाव बढ़ाना और कांग्रेस को कमजोर करना।

AIADMK में फूट का खतरा

भाजपा के दबाव ने AIADMK को अंदर से हिला दिया है। पार्टी में दो गुट साफ-साफ उभर आए हैं:

- एक गुट सत्ता में हिस्सेदारी के लालच में विजय को समर्थन देने के पक्ष में है।
- दूसरा गुट मानता है कि TVK को समर्थन देना AIADMK के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।

AIADMK की वरिष्ठ नेता लीमा रोज मार्टिन ने खुद स्वीकार किया है कि TVK और AIADMK के बीच बातचीत चल रही है। राजनीतिक विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि अगर AIADMK सही समय पर फैसला नहीं ले पाया तो महाराष्ट्र की शिवसेना वाली स्थिति (पार्टी का विभाजन) तमिलनाडु में दोहराई जा सकती है।

विजय की इमरजेंसी बैठक

इस बीच, कांग्रेस के पांचों विजयी उम्मीदवारों ने विजय को समर्थन की घोषणा कर दी है, लेकिन आंकड़ा अभी भी अधूरा है। गुरुवार (7 मई) को विजय ने अपनी पार्टी के सभी विजयी नेताओं की आपात बैठक बुलाई है। इस बैठक में अंतिम रणनीति तय होगी कि तमिलनाडु में नई सरकार किसके साथ और किसके समर्थन से बनेगी।

 द्रविड़ राजनीति का नया अध्याय

तमिलनाडु लंबे समय से द्रविड़ पार्टियों – DMK और AIADMK – का गढ़ रहा है। Periyar E.V. Ramasamy की विचारधारा पर चलने वाली इन पार्टियों ने decades तक राज्य में अपना दबदबा बनाए रखा। लेकिन इस बार थलापति विजय की अपार लोकप्रियता और उनकी नई पार्टी TVK ने पुराने समीकरणों को तोड़ दिया है।

विजय ने अपनी पार्टी को युवाओं, किसानों, मजदूरों और मध्य वर्ग के मुद्दों पर केंद्रित किया। उनकी फिल्मी छवि और साफ-सुथरी छवि ने उन्हें तमिलनाडु की राजनीति में तूफानी एंट्री दी।

 भाजपा के सामने चुनौतियां और अवसर

भाजपा के लिए यह स्थिति दोधारी तलवार है। अगर TVK की सरकार AIADMK के समर्थन से बनती है तो भाजपा को राज्य में पैर पसारने का मौका मिलेगा। लेकिन अगर बात नहीं बनी तो कांग्रेस-TVK गठबंधन की संभावना बढ़ जाएगी, जो भाजपा के लिए चिंता का विषय होगा।

केंद्रीय स्तर पर भाजपा AIADMK के साथ पुराना गठबंधन रखना चाहती है, लेकिन तमिलनाडु की मौजूदा जरूरत अलग है।

क्या होगा आगे?

1. TVK-AIADMK गठबंधन: सबसे संभावित परिदृश्य। AIADMK को कुछ महत्वपूर्ण विभाग और विधानसभा स्पीकर पद जैसे आश्वासन दिए जा सकते हैं।

2. TVK-Congress समर्थन: अगर AIADMK मना कर दे तो यह विकल्प खुला है, लेकिन भाजपा इसे रोकने की पूरी कोशिश करेगी।

3. अस्थिर सरकार: अगर कोई फैसला नहीं हुआ तो तमिलनाडु में अस्थिरता बढ़ सकती है।

: तमिलनाडु राजनीति का नया युग

थलापति विजय की TVK ने साबित कर दिया है कि तमिलनाडु में भी नई पार्टियां बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। द्रविड़ मॉडल की दीवार अब दरक रही है। भाजपा की चतुर कूटनीति और AIADMK का संकट इस पूरे ड्रामे को और रोचक बना रहा है।

7 मई की विजय की बैठक के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी। चाहे जो भी सरकार बने, एक बात तय है – तमिलनाडु का राजनीतिक भविष्य अब पहले जितना सरल नहीं रहा। नई पीढ़ी के नेता, नई पार्टियां और केंद्र की सक्रिय भूमिका मिलकर राज्य की राजनीति को नया आयाम देने जा रहे हैं।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-6 May 2026