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Wednesday, 20 May 2026

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन रज़ा नकवी एक सप्ताह में दूसरी बार तेहरान पहुंचे: ईरान-अमेरिका शांति वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका तेज

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन रज़ा नकवी एक सप्ताह में दूसरी बार तेहरान पहुंचे: ईरान-अमेरिका शांति वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका तेज
-Friday World-20 May 2026
तेहरान। मध्य पूर्व के संकट के बीच पाकिस्तान एक बार फिर डिप्लोमेटिक शटल डिप्लोमेसी का सबसे सक्रिय खिलाड़ी बनकर उभरा है। पाकिस्तान के गृह मंत्री सीनेटर सैयद मोहसिन रज़ा नकवी एक सप्ताह के अंदर दूसरी बार ईरान की राजधानी तेहरान पहुंच गए हैं। यह दौरा पूर्व घोषित नहीं था और इसे क्षेत्रीय शांति स्थापना के लिए पाकिस्तान के गंभीर प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है।

मई 2026 के इस महत्वपूर्ण मोड़ पर जब ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता ठप पड़ी हुई है, नकवी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और बातचीत को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश का प्रतीक है।

 क्यों हो रहा है नकवी का बार-बार तेहरान दौरा?

पाकिस्तानी और ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नकवी 16 मई 2026 को पहली बार अनऑफिशियल दो दिवसीय दौरे पर तेहरान गए थे। उस दौरान उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, संसद स्पीकर बागेर ग़ालिबाफ, गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी और विदेश मंत्री अब्बास अरागची से विस्तृत मुलाकातें कीं। अब मात्र कुछ दिनों बाद 20 मई को वे दूसरी बार तेहरान पहुंचे हैं।

यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब:
- अमेरिका-ईरान के बीच छह सप्ताह चले संघर्ष के बाद नाजुक युद्धविराम (Ceasefire) लागू है।

- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नवीनतम प्रस्ताव को “अपर्याप्त” बताया है।

- ईरान ने अमेरिका से अपनी मांगों पर ठोस जवाब की अपेक्षा जताई है।

- पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच संदेशवाहक की भूमिका निभा रहा है।

पाकिस्तानी डिप्लोमेटिक सूत्रों के मुताबिक, नकवी इस बार ईरानी नेतृत्व को अमेरिका की चिंताओं से अवगत करा रहे हैं और ईरान की चिंताओं को वाशिंगटन तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

 पाकिस्तान की मध्यस्थता: एक नई भूमिका

पाकिस्तान लंबे समय से ईरान और सऊदी अरब जैसे विरोधी खेमों के बीच संतुलन बनाए रखने वाला देश रहा है। लेकिन इस बार उसकी भूमिका और भी सक्रिय हो गई है। 

- पाक आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर कुछ समय पहले ही तेहरान जा चुके हैं।

- प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री इशाक डार क्षेत्रीय नेताओं से फोन पर लगातार संपर्क में हैं।

- अब गृह मंत्री मोहसिन नकवी दो-दो बार तेहरान पहुंचकर पाकिस्तान की “शटल डिप्लोमेसी” को नई ऊंचाई दे रहे हैं।

ईरानी मीडिया (तस्नीम, इरना आदि) ने इस यात्रा को “क्षेत्रीय शांति के लिए पाकिस्तान के प्रयास” बताया है। दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा, व्यापार, आतंकवाद विरोधी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है।

नकवी की मुलाकातों में क्या हुआ?

पहले दौरे के दौरान:
- राष्ट्रपति पेजेश्कियन के साथ मुख्य बैठक 3 घंटे चली, जिसमें निजी मुलाकात भी 90 मिनट तक चली।

- गृह मंत्री मोमेनी के साथ सीमा सुरक्षा और द्विपक्षीय सहयोग पर विस्तृत बातचीत।

- संसद स्पीकर ग़ालिबाफ से भी मुलाकात हुई।

दूसरे दौरे में फोकस मुख्य रूप से ईरान के नवीनतम प्रस्ताव और अमेरिका की प्रतिक्रिया पर है। पाकिस्तान ईरान को यह समझाने की कोशिश में है कि बातचीत जारी रखना ही दोनों पक्षों के हित में है, क्योंकि नया संघर्ष पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है।

 पाकिस्तान-ईरान संबंध: गहरी जड़ें

पाकिस्तान और ईरान के बीच संबंध केवल डिप्लोमेसी तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश:

- 900 किलोमीटर से ज्यादा साझा सीमा साझा करते हैं।

- व्यापार, ऊर्जा, परिवहन (आईटीपी प्रोजेक्ट) और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में गहरे हित रखते हैं।

- दोनों देश आतंकवाद और ड्रग तस्करी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

हालांकि कभी-कभी सीमा पर तनाव भी होता रहा है, लेकिन दोनों देशों ने हमेशा संवाद के रास्ते खुला रखे हैं। नकवी की यात्रा इसी विश्वास को और मजबूत करने का प्रयास है।

 क्षेत्रीय संदर्भ: क्यों महत्वपूर्ण है यह यात्रा?

मध्य पूर्व में हालिया घटनाक्रम बेहद संवेदनशील है:
- ईरान और इजराइल के बीच टकराव।

- हॉर्मुज की खाड़ी में तनाव (जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई)।

- अमेरिका का ईरान पर दबाव और ईरान का परमाणु कार्यक्रम।

- क्षेत्रीय देशों (सऊदी, यूएई, कतर) का शांति की अपील।

पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति, उसके परमाणु शक्ति होने और मुस्लिम दुनिया में उसकी साख के कारण वह इस मध्यस्थता के लिए उपयुक्त देश माना जा रहा है। पाकिस्तान न तो ईरान का दुश्मन है और न ही अमेरिका का। वह दोनों के साथ संतुलित संबंध रखना चाहता है।

 मोहसिन रज़ा नकवी कौन हैं?

सीनेटर सैयद मोहसिन रज़ा नकवी पाकिस्तान के एक प्रमुख राजनेता हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके नकवी वर्तमान में गृह मंत्री के रूप में देश की आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और प्रांतीय समन्वय संभाल रहे हैं। उनकी डिप्लोमेटिक सक्रियता इस बात को दर्शाती है कि पाकिस्तान इस संकट को केवल विदेश मंत्रालय तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि पूरे सरकारी तंत्र को इसमें शामिल कर रहा है।

 आगे क्या?

डिप्लोमेटिक सूत्रों के अनुसार, नकवी की यह यात्रा ईरान से प्रस्ताव लेकर अमेरिका या अन्य पक्षों तक पहुंचाने का हिस्सा हो सकती है। पाकिस्तान का लक्ष्य है कि युद्धविराम स्थायी शांति में बदले और क्षेत्र में नया संघर्ष टला रहे।

फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक माहौल में चल रही है। ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की है।

 शांति का पुल

मोहसिन रज़ा नकवी की एक सप्ताह में दूसरी तेहरान यात्रा सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं है। यह पाकिस्तान की परिपक्व विदेश नीति, क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और कठिन समय में मध्यस्थता की क्षमता का प्रमाण है।

जब पूरी दुनिया मध्य पूर्व में नए युद्ध की आशंका जता रही है, तब पाकिस्तान शांति का संदेश लेकर आगे बढ़ रहा है। अब देखना यह है कि ईरान और अमेरिका इस मध्यस्थता को कितना गंभीरता से लेते हैं और बातचीत का सिलसिला फिर से शुरू होता है या नहीं।

क्षेत्रीय शांति न केवल पाकिस्तान-ईरान के हित में है, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया, खाड़ी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी जरूरी है।

पाकिस्तान का संदेश साफ है — युद्ध नहीं, बातचीत ही समाधान है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-20 May 2026