दमिश्क। मध्य पूर्व में शांति की कोशिशों के बीच सीरिया ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने इजरायल के साथ चल रही सामान्यीकरण वार्ताओं को नई चुनौती दे दी है। सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा (Ahmed al-Sharaa) ने वर्ष 2026 की डिक्री संख्या 109 जारी कर देश के सीमा शुल्क कानून में व्यापक संशोधन किया है। इस नए कानून ने इजरायली वस्तुओं के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध को फिर से लागू कर दिया है और इजरायली नागरिकों को सीरिया में प्रवेश करने से रोक दिया है।
यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब अमेरिका की मध्यस्थता में सीरिया-इजरायल के बीच सुरक्षा समझौते और सामान्यीकरण की बातें चल रही हैं, लेकिन इजरायल द्वारा सीरियाई क्षेत्र पर कब्जे के मुद्दे पर वार्ता ठप पड़ी हुई है।
डिक्री 109: पुराने बहिष्कार कानूनों की वापसी
नया सीमा शुल्क कानून पुराने 2006 के कानूनों को पूरी तरह बदल रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य सीमा नियंत्रण को आधुनिक बनाना, तस्करी पर अंकुश लगाना और बंदरगाहों-कस्टम सिस्टम को मजबूत करना बताया जा रहा है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा अनुच्छेद 112 (Article 112) को लेकर हो रही है।
इस अनुच्छेद के तहत:
- इजरायल बहिष्कार कानून (Arab Boycott of Israel) का उल्लंघन करने वाले किसी भी उत्पाद के सीरिया में प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध।
- सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले सामान पर रोक।
- इजरायली नागरिकों का सीरिया में प्रवेश पूर्णतः वर्जित।
यह प्रतिबंध फ्री जोन (मुक्त क्षेत्रों) में भी लागू होगा। कानून तीन महीने बाद पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा।
i24NEWS और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति अल-शरा इस डिक्री के जरिए असद युग के पुराने इजरायल-विरोधी कानूनों को बनाए रखते हुए अपनी घरेलू छवि को मजबूत करना चाहते हैं।
असद के बाद का नया सीरिया
दिसंबर 2024 में बशर अल-असद के शासन के अंत के बाद अहमद अल-शरा (जिन्हें पहले अबू मोहम्मद अल-जौलानी के नाम से जाना जाता था) सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति बने। नई सरकार को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मान्यता मिल रही है, प्रतिबंध हटाए जा रहे हैं और देश का पुनर्निर्माण शुरू हुआ है।
लेकिन इजरायल के साथ संबंध अभी भी सबसे संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। इजरायल ने असद के पतन के बाद सीरिया के कुछ हिस्सों (खासकर गोलान हाइट्स के आसपास) पर नियंत्रण बढ़ाया है और कई हवाई हमले किए हैं। सीरिया इन कब्जों को समाप्त करने की मांग कर रहा है, जबकि इजरायल सुरक्षा गारंटी और बफर जोन की मांग पर अड़ा हुआ है।
क्यों उठाया गया यह कदम?
विश्लेषकों के अनुसार, अल-शरा सरकार कई मोर्चों पर संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है:
1. घरेलू राजनीति: सीरिया में इजरायल-विरोधी भावना गहरी जड़ें रखती है। पुराने कानूनों को बनाए रखकर अल-शरा विपक्षी ताकतों और जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता बढ़ा रहे हैं।
2. वार्ता में मजबूत स्थिति: अमेरिकी मध्यस्थता के बावजूद इजरायल सीरियाई क्षेत्र छोड़ने को तैयार नहीं। इस डिक्री से अल-शरा यह संदेश दे रहे हैं कि वे इजरायल के साथ किसी भी समझौते में “राष्ट्रीय गरिमा” से समझौता नहीं करेंगे।
3. क्षेत्रीय संदेश: अरब दुनिया और मुस्लिम देशों को यह दिखाना कि नई सीरिया भी फिलिस्तीन और इजरायल-विरोधी मुद्दे पर पुरानी नीति से नहीं हटी है।
सीरिया-इजरायल संबंधों का इतिहास
सीरिया और इजरायल के बीच 1974 का डिसएंगेजमेंट एग्रीमेंट (UNDOF बफर जोन) लंबे समय से टिका हुआ था। लेकिन 2024-25 के घटनाक्रमों ने इसे चुनौती दी। इजरायल ने दक्षिणी सीरिया में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है, जिसे सीरिया “कब्जा” मानता है।
अल-शरा ने पहले कहा था कि वार्ताएं “मुश्किल” हैं लेकिन “डेड-एंड” पर नहीं पहुंची हैं। वे 1974 की सीमा रेखा पर वापसी की मांग कर रहे हैं। वहीं इजरायल सुरक्षा चिंताओं (ईरानी प्रभाव समाप्त करने) का हवाला दे रहा है।
आर्थिक और व्यावहारिक प्रभाव
सीरिया और इजरायल के बीच पहले से ही कोई व्यापार नहीं था, इसलिए इस प्रतिबंध का सीधा आर्थिक नुकसान सीमित माना जा रहा है। लेकिन इसका प्रतीकात्मक महत्व बहुत बड़ा है।
- विदेशी कंपनियां जो इजरायल से व्यापार करती हैं, उन्हें सीरिया में सावधानी बरतनी होगी।
- फ्री जोन और पुनर्निर्माण परियोजनाओं में अंतरराष्ट्रीय निवेश प्रभावित हो सकता है।
- सीमा सुरक्षा और कस्टम प्रक्रियाएं सख्त होंगी, जो तस्करी रोकने में मदद करेगी।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
- इजरायल: इस कदम को “पुरानी शत्रुता” का प्रतीक बताया जा रहा है। इजरायली मीडिया इसे वार्ताओं के लिए नकारात्मक संकेत मान रहा है।
- अमेरिका: ट्रंप प्रशासन सीरिया के साथ संबंध सुधारने और इजरायल-सुरक्षा समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यह डिक्री अमेरिकी प्रयासों को जटिल बना सकती है।
- अरब देश: कई अरब देश (जिन्होंने अब्राहम समझौतों के तहत इजरायल से संबंध बनाए) इस कदम को पुरानी सोच मान सकते हैं, जबकि कुछ इसे समर्थन देंगे।
अल-शरा की रणनीति: संतुलन की कला
अहमद अल-शरा की सरकार कई चुनौतियों से घिरी है — आर्थिक पुनर्निर्माण, संप्रदायिक सद्भाव, आतंकवाद का खतरा और अंतरराष्ट्रीय मान्यता। इस डिक्री के जरिए वे दिखा रहे हैं कि विदेश नीति में वे व्यावहारिक हैं लेकिन मूल सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे।
विश्लेषक मानते हैं कि यह कदम अल-शरा को घरेलू स्तर पर “मजबूत नेता” के रूप में स्थापित करने का हिस्सा है, ताकि आगे चलकर इजरायल के साथ किसी समझौते पर सहमति बन सके।
आगे क्या?
वर्तमान में अमेरिका की मध्यस्थता में वार्ताएं जारी हैं। फोकस 1974 के बफर जोन को बहाल करने पर है, जबकि गोलान हाइट्स जैसे बड़े मुद्दे बाद में उठाए जाएंगे।
यदि दोनों पक्ष समझौते पर पहुंचते हैं तो यह मध्य पूर्व में नया अध्याय हो सकता है। लेकिन फिलहाल डिक्री 109 ने तनाव को बढ़ा दिया है।
सीरिया का यह कदम याद दिलाता है कि युद्ध के बाद का शांति निर्माण कितना जटिल होता है। पुरानी दुश्मनियां, घरेलू राजनीति और क्षेत्रीय हित — सब कुछ एक-दूसरे में उलझा हुआ है।
अहमद अल-शरा की सरकार को अब साबित करना होगा कि वे पुराने कानूनों को बनाए रखते हुए भी नई शुरुआत कर सकते हैं। इजरायल को भी अपने सुरक्षा हितों के साथ-साथ सीरियाई संप्रभुता का सम्मान करना होगा।
सीरिया द्वारा इजरायली वस्तुओं और नागरिकों पर प्रतिबंध फिर से लागू करना महज एक कानूनी औपचारिकता नहीं है। यह नई सीरिया की विदेश नीति, घरेलू राजनीति और क्षेत्रीय संतुलन की रणनीति का आईना है।
वार्ताओं के इस नाजुक दौर में यह डिक्री दोनों पक्षों के लिए एक परीक्षा है — क्या वे पुरानी दुश्मनी को आगे बढ़ाएंगे या शांति और स्थिरता का रास्ता चुनेंगे?
मध्य पूर्व की शांति इस सवाल का जवाब निर्भर करती है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-20 May 2026