-Friday World-10 May 2026
होर्मुज जलडमरूमध्य — दुनिया की सबसे संवेदनशील समुद्री धमनियों में से एक — अब एक नई रणनीतिक गहराई से गूंज रही है। ईरानी नौसेना कमांडर रियर एडमिरल शाहराम ईरानी के ताजा बयान ने वैश्विक रक्षा विश्लेषकों का ध्यान खींचा है। उन्होंने पुष्टि की है कि ईरान की स्वदेशी हल्की पनडुब्बियां, जिन्हें नौसैनिक अधिकारी 'फार्स की खाड़ी की डॉल्फिन' कहते हैं, अब होर्मुज की तलहटी पर दीर्घकालिक अभियानों के लिए तैनात हैं। a38c
क्या है 'फार्स की डॉल्फिन'?
ये कोई जैविक डॉल्फिन नहीं, बल्कि ईरान द्वारा घरेलू स्तर पर निर्मित हल्की पनडुब्बियों का कोडनेम है। रियर एडमिरल शाहराम ईरानी के अनुसार, इन पनडुब्बियों की सबसे बड़ी ताकत है - 'बॉटम रेस्ट' क्षमता। यानी ये होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्र तल पर लंबे समय तक चुपचाप बैठ सकती हैं। इस दौरान ये दुश्मन के जहाजों को ट्रैक करने और जरूरत पड़ने पर नष्ट करने में सक्षम हैं।
कमांडर ईरानी ने रविवार को मेहर न्यूज एजेंसी से कहा: "हमारी हल्की पनडुब्बियां खतरों, क्षमताओं और जरूरतों के अनुसार होर्मुज के पानी में विस्तार और तैनाती कर रही हैं"।
डीना विध्वंसक के शहीदों को सलामी, फिर गहराई में वापसी
ईरानी नौसेना ने इन पनडुब्बियों की ताकत का प्रदर्शन भी किया। 'डीना' विध्वंसक के शहीदों की स्मृति में नामित एक ऑपरेशन के दौरान ये 'डॉल्फिन' होर्मुज में सतह पर आईं। सामरिक फॉर्मेशन पैंतरेबाज़ी कर ईरान की समुद्री रक्षा शक्ति दिखाई। इसके बाद ये पनडुब्बियां फिर से गहराई में उतर गईं और अपने मिशन पर लौट आईं।
कमांडर ईरानी ने बताया: "फार्स की खाड़ी की डॉल्फिन सतह पर आईं ताकि हमारे देश की नौसैनिक रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन हो सके। कई प्रदर्शन युद्धाभ्यास करने के बाद, वे अपने सौंपे गए मिशन जारी रखने के लिए डूब गईं"। 36d5
होर्मुज क्यों है इतना अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य मात्र 33 किमी चौड़ा है, लेकिन यहीं से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। ब्रेंट क्रूड हाल ही में 103 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य गतिविधि का असर सीधे वैश्विक बाजारों पर पड़ता है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा है कि उसने ईरानी बंदरगाहों से जुड़े 70 से ज्यादा जहाजों को रोका है, जिससे 13 अरब डॉलर का तेल कार्गो प्रभावित हुआ। इसी तनाव के बीच ईरान ने अपनी 'असममित नौसैनिक रणनीति' तेज कर दी है।
छोटी पनडुब्बी, बड़ी रणनीति
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान की ये हल्की पनडुब्बियां 'मिजेट सबमरीन' श्रेणी की हैं। इनका फायदा:
1. कम रडार प्रोफाइल: पानी की सतह के बेहद करीब होने से रडार पर देर से पकड़ में आती हैं
2. लागत में किफायती: बड़ी पनडुब्बियों के मुकाबले सस्ती और युद्ध में आसानी से बदली जा सकती हैं
3. घात लगाकर हमला: समुद्र तल पर बैठकर दुश्मन जहाज का इंतजार करना और अचानक हमला करना इनकी खासियत है 0f30a38c
हडसन इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट कहती है: "यह पूरी संरचना निर्णायक नौसैनिक लड़ाई जीतने के बजाय घर्षण और एट्रिशन पैदा करने के लिए डिजाइन की गई है"।
'डॉल्फिन' विवाद: असली पनडुब्बी या प्रशिक्षित जानवर?
पिछले हफ्ते पश्चिमी मीडिया में 'कामिकेज़ डॉल्फिन' की खबरें भी उछलीं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने लिखा कि ईरानी अधिकारी माइन लेकर चलने वाली डॉल्फिन का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहे हैं।
हालांकि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इसे खारिज किया: "मैं पुष्टि कर सकता हूं कि उनके पास डॉल्फिन नहीं हैं"। CNN के अनुसार, ईरान ने 2000 में सोवियत संघ से डॉल्फिन खरीदी थीं, लेकिन उनके अब तक सक्रिय होने का कोई सबूत नहीं है।
ईरानी कमांडर शाहराम ईरानी ने साफ किया कि 'फार्स की डॉल्फिन' नाम पनडुब्बियों को दिया गया है, जानवरों को नहीं।
होर्मुज में बढ़ता तनाव: आगे क्या?
1. तेल पर खतरा: ईरान ने बार-बार धमकी दी है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह होर्मुज बंद कर देगा। ये पनडुब्बियां उस धमकी को जमीन पर उतारने का साधन हैं।
2. अमेरिका की तैयारी: अमेरिका के पास बिना चालक वाली पनडुब्बियां हैं जो समुद्र तल को स्कैन कर माइन ढूंढ सकती हैं। लेकिन पूरे शिपिंग रूट को सुरक्षित करना समय लेने वाली प्रक्रिया है।
3. रूस की एंट्री: राष्ट्रपति पुतिन ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम को स्टोर करने का प्रस्ताव दिया है। इससे क्षेत्रीय समीकरण और जटिल हो गए हैं।
स्वदेशी ताकत का प्रदर्शन
ईरान लगातार अपनी नौसेना को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दे रहा है। 'ग़दीर' क्लास जैसी हल्की पनडुब्बियां पहले से उसके बेड़े में हैं। अब 'फार्स की डॉल्फिन' के जरिए वह संदेश दे रहा है कि होर्मुज में कोई भी गतिविधि उसकी नजर से छुप नहीं सकती।
IRGC नौसेना के तेज हमलावर जहाज भी 8 मई 2026 को होर्मुज में गश्त करते दिखे। फुटेज में भारी मशीनगनों और 'हिट-एंड-रन' रणनीति का इस्तेमाल दिखा।
गहराई में बैठी चुनौती
शाहराम ईरानी का बयान केवल सैन्य तैनाती की घोषणा नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा भी है। 'लंबे समय तक समुद्र तल पर बैठना' और 'दुश्मन जहाजों को नष्ट करना' जैसे शब्द विरोधियों के लिए सीधी चेतावनी हैं।
होर्मुज की भू-राजनीति अब सतह से नीचे चली गई है। जहां तेल टैंकर चलते हैं, वहीं अब 'फार्स की डॉल्फिन' खामोशी से इंतजार कर रही हैं। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि क्या ये डॉल्फिन सिर्फ निवारण के लिए हैं, या होर्मुज में कोई नई लहर उठने वाली है।
दुनिया की नजर अब इस 33 किमी की पट्टी पर है, जहां एक छोटी सी चिंगारी 103 डॉलर के तेल को 150 डॉलर तक ले जा सकती है। और उस चिंगारी को रोकने या भड़काने की ताकत, फिलहाल, समुद्र की तलहटी में बैठी है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-10 May 2026