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Sunday, 10 May 2026

बहु-मोर्चा युद्ध के दबाव में इज़राइली सेना: चीफ ऑफ स्टाफ ज़मीर ने कहा - 'तुरंत चाहिए 15,000 नए सैनिक, वरना सेना ढह जाएगी'

बहु-मोर्चा युद्ध के दबाव में इज़राइली सेना: चीफ ऑफ स्टाफ ज़मीर ने कहा - 'तुरंत चाहिए 15,000 नए सैनिक, वरना सेना ढह जाएगी'
-Friday World-10 May 2026
तेल अवीव, 10 मई 2026
इज़राइली सेना गंभीर मैनपावर संकट से जूझ रही है। इज़राइली रक्षा बलों (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयल ज़मीर ने नेसेट की विदेश मामलों और रक्षा समिति को बंद दरवाज़े की बैठक में चेतावनी दी है कि 'बहु-मोर्चा युद्ध' को जारी रखने के लिए सेना को तत्काल हजारों अतिरिक्त सैनिकों की जरूरत है। ज़मीर के मुताबिक, अगर सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए तो रिज़र्व फोर्स थकान के कारण 'ढह सकती है'। 

'मैं 10 रेड फ्लैग दिखा रहा हूँ': ज़मीर की सीधी चेतावनी

कई इज़राइली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ज़मीर ने मंत्रियों से असामान्य रूप से दो-टूक शब्दों में कहा: "मैं 10 रेड फ्लैग उठा रहा हूँ"। उन्होंने साफ किया कि महीनों से लगातार चल रहे ऑपरेशनों ने सैनिकों को शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया है। ज़मीर का कहना था, "रिज़र्विस्ट टिक नहीं पाएंगे"। 

IDF प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल एफी डेफ्रिन ने भी माना कि सेना में लगभग 15,000 सैनिकों की कमी है, जिनमें से करीब 8,000 लड़ाकू सैनिक हैं। सितंबर 2025 में भी सेना ने नेसेट को बताया था कि ऑपरेशनल जरूरत 12,000 अतिरिक्त सैनिकों की है, जिनमें 7,000 लड़ाकू सैनिक शामिल हैं। 

राजनीति नहीं, दुश्मन से लड़ रहा हूँ': ज़मीर का रुख

ज़मीर ने विधायकों से कहा कि वे राजनीतिक बहस में नहीं पड़ रहे। "मैं राजनीतिक या विधायी प्रक्रियाओं से नहीं निपट रहा हूँ – मैं बहु-मोर्चे पर युद्ध और दुश्मन को हराने से जूझ रहा हूँ।" इसी दबाव के चलते उन्होंने तीन बड़े कदमों की मांग रखी:

1. अति-रूढ़िवादी हरेदी पुरुषों की भर्ती: दशकों से हरेदी समुदाय को सैन्य सेवा से छूट मिली हुई है। अब सेना इसे खत्म कर सबके लिए अनिवार्य सेवा चाहती है।

2. सेवा अवधि 30 से 36 महीने करना: ज़मीर ने अनिवार्य सैन्य सेवा को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा ताकि मौजूदा सैनिकों पर दबाव कम हो।

3. रक्षा बजट में बढ़ोतरी: रिज़र्विस्ट्स पर ही हर महीने करीब 40 करोड़ शेकेल खर्च हो रहे हैं, वो भी तब जब हर 10,000 कर्मियों की लागत इतनी है। 2026 के बजट में औसतन 40,000 रिज़र्विस्ट्स की योजना थी, पर अभी सेना ने औसतन 1,00,000 रिज़र्विस्ट्स बुला रखे हैं। 

7 मोर्चों पर लड़ाई, थकती जा रही सेना

7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद से इज़राइल एक साथ कई मोर्चों पर उलझा है। ज़मीर ने 'स्वतंत्रता दिवस' समारोह में कहा कि सेना 'सभी मोर्चों पर तुरंत और मजबूती से लड़ाई में लौटने के लिए तैयार' है। मौजूदा हालात देखें तो: 

- गाज़ा: IDF का कहना है कि वह गाज़ा के 75% हिस्से को नियंत्रित करता है। गाज़ा सिटी पर पूर्ण कब्जे के लिए ज़मीर ने चेताया था कि इसके लिए लगभग 2,00,000 रिज़र्विस्ट्स जुटाने पड़ेंगे।
- लेबनान: इज़राइल अब भी लेबनान के बड़े हिस्से पर कब्जा किए हुए है और हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले कर रहा है। दक्षिणी लेबनान में तीसरी डिवीजन भी उतारी गई है।

- ईरान और सीरिया: सेना सीरिया के अंदर भी तैनात है और ईरान से युद्ध की स्थिति में अलर्ट पर है।
- वेस्ट बैंक: चौकियों की बढ़ती संख्या पर गार्ड ड्यूटी के लिए भी फोर्स लग रही है। 

ज़मीर का मानना है कि अब ये 'सिंगल-वॉर आर्मी' नहीं रही। IDF को आने वाले सालों तक कई मोर्चों पर एक साथ लड़ना होगा। इसी लिए 'डेप्थ कमांड' को जनरल स्टाफ यूनिट का दर्जा दिया जा रहा है। 

नेतन्याहू बनाम ज़मीर: रणनीति पर टकराव

गाज़ा में आगे की कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ज़मीर के बीच तनाव खुलकर सामने आया है। तीन घंटे की बैठक में ज़मीर ने चेतावनी दी कि बाकी गाज़ा पर कब्जा करने से सेना 20 साल बाद फिर उसी दलदल में फंस सकती है और बंधकों को नुकसान हो सकता है। 

ज़मीर ने अमेरिकी मदद से चल रहे गाज़ा सहायता कार्यक्रम को भी 'विफल' बताया। जब राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन-गवीर ने सहायता देने का विरोध किया, तो ज़मीर ने कहा: "तो मैं सुझाव देता हूँ कि बंधकों की वापसी को युद्ध के लक्ष्यों से हटा दें"। 

नेतन्याहू ने जवाब में कहा कि अब तक सेना बंधकों को छुड़ाने में नाकाम रही है। सरकार गाज़ा सिटी पर हमला तेज करना चाहती है, जबकि ज़मीर ने नियमित बटालियनों से एक-एक कंपनी घटाकर सैनिकों को रिज़र्व में वापस भेजने का फैसला किया है। सेना का मानना है कि युद्ध 'प्रभावी रूप से खत्म' हो चुका है, भले ही आधिकारिक ऐलान न हुआ हो। 

रिज़र्विस्ट्स पर टूटता दबाव: आत्महत्या के मामले बढ़े

लगातार कॉल-अप ने रिज़र्विस्ट्स की निजी और प्रोफेशनल जिंदगी ठप कर दी है। 'इमरजेंसी ऑर्डर' के तहत सेवा विस्तार से एक्टिव-ड्यूटी और रिज़र्व सैनिकों में आत्महत्या के मामले बढ़े हैं। कई सैनिकों ने इज़राइल के हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सेवा विस्तार को रद्द करने की मांग की। 

IDF ने माना कि 'हम थकान की डिग्री समझते हैं'। सैनिकों से बातचीत के बाद सेना ने पाया कि डिस्चार्ज में देरी से रिज़र्व सिस्टम को गंभीर नुकसान हुआ, टीमों का तालमेल बिगड़ा और एक्टिव-रिज़र्व ड्यूटी का ट्रांजिशन टूट गया। अब कमांडरों को 'स्वैच्छिक सेवा विस्तार पैकेज' दिए जाएंगे, अनिवार्य नहीं। 

आर्थिक कीमत: खत्म न होने वाला बिल

युद्ध का खर्च लगातार बढ़ रहा है। लेबनान, गाज़ा, सीरिया और वेस्ट बैंक में तैनाती के अलावा ईरान से युद्ध का अलर्ट है। किसी भी मोर्चे से सेना के निकलने की कोई योजना नहीं है, इसलिए बिल आता रहेगा और कोई नहीं जानता कब तक। 

गाज़ा पर पूर्ण कब्जे की योजना में नागरिकों को जबरन दक्षिण में विस्थापित करना, फिर गाज़ा सिटी को घेरना और रिहायशी इलाकों में घुसना शामिल है। ज़मीर ने चेताया कि इसके लिए अस्पताल बनाने और खुद सहायता पहुंचाने का इंतजाम करना होगा, क्योंकि 'वहां नागरिक ढांचा या मानवीय क्षमता नहीं है'। 

आगे क्या? तीन विकल्प, तीन संकट

1. हरेदी भर्ती कानून: अगर नेसेट हरेदी समुदाय की अनिवार्य भर्ती पास करती है तो इज़राइल में दशकों से चला आ रहा सामाजिक समझौता टूटेगा। हरेदी दल सरकार में हैं, इसलिए राजनीतिक संकट तय है।

2. सेवा अवधि बढ़ाना: 36 महीने की सेवा युवाओं और उनके परिवारों पर दबाव बढ़ाएगी। पहले से ही 'सर्विस इनइक्वालिटी' पर बहस गर्म है।
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3. युद्ध रोकना या बढ़ाना: ज़मीर 'एनसर्किलमेंट' यानी घेराबंदी और फायरपावर से थकाने की रणनीति चाहते हैं, न कि लापरवाह ग्राउंड हमला। पर नेतन्याहू 'अंतिम, निर्णायक हमले' के लिए दबाव बना सकते हैं। 

IDF चीफ ने साफ किया कि अब हर मोर्चे के लिए अलग 'टेम्पो, लक्ष्य और एंडगेम' चाहिए। पुरानी सोच कि 'दुश्मन क्या चाहता है बनाम क्या कर सकता है' अब नहीं चलेगी - इरादा और क्षमता को एक मानना होगा। 

: थकी सेना, दुविधा में सरकार

एयल ज़मीर मार्च 2025 में चीफ ऑफ स्टाफ बने थे। उनका मिशन साफ था: 'IDF को जीत की ओर ले जाना'। पर 14 महीने बाद वे '10 रेड फ्लैग' दिखा रहे हैं। 15,000 सैनिकों की कमी, 1 लाख रिज़र्विस्ट्स की तैनाती, आत्महत्या के बढ़ते मामले और बहु-मोर्चा युद्ध का दबाव - इज़राइली सेना अपने इतिहास के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। 

अब गेंद नेसेट के पाले में है। हरेदी भर्ती, सेवा विस्तार और बजट - तीनों पर फैसला होना है। ज़मीर का संदेश साफ है: 'अगर सैनिक नहीं मिले, तो जीत की बात बेमानी है'। और अगर रिज़र्विस्ट्स टूट गए, तो सेना 'खुद में ही ढह जाएगी'। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-10 May 2026