-Friday World - 14 May 2026
नई दिल्ली, 14 मई 2026: जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बीजिंग में शी जिनपिंग से ईरान युद्ध समाप्त करने की अपील करने वाले हैं, ठीक उसी समय भारत की राजधानी में BRICS शिखर सम्मेलन में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का भव्य स्वागत हो रहा है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अराघची का स्वागत किया और दोनों नेताओं के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता हुई।
यह मुलाकात कई मायनों में खास है। भारत ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह, ऊर्जा सुरक्षा और सांस्कृतिक संबंधों की लंबी परंपरा रखता है। BRICS मंच पर ईरान की बढ़ती भागीदारी पश्चिमी दबाव से मुक्त होने का विकल्प प्रदान कर रही है।
भारत की “बहु-संरेखण” (Multi-Alignment) नीति यहां साफ दिखाई दे रही है। एक तरफ QUAD के जरिए अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया के साथ संबंध, दूसरी तरफ BRICS में चीन-रूस-ईरान के साथ सक्रियता। जयशंकर ने बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, द्विपक्षीय व्यापार और युद्ध के वैश्विक प्रभावों पर चर्चा की।
भारत की रणनीतिक स्थिति
भारत ईरान से तेल आयात करता रहा है। युद्ध के कारण ऊर्जा कीमतों में उछाल आया है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती है। BRICS में भारत ईरान को वैकल्पिक समर्थन दे रहा है, जबकि अमेरिका-चीन वार्ता पर भी नजर रखे हुए है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका भी निभा सकता है। चाबहार परियोजना ईरान के लिए महत्वपूर्ण है और भारत इसे अफगानिस्तान व मध्य एशिया तक पहुंच के लिए इस्तेमाल करता है।
विस्तृत पृष्ठभूमि और प्रभाव
ईरान-भारत संबंध प्राचीन काल से चले आ रहे हैं। आधुनिक समय में दोनों देशों ने कई समझौते किए हैं। युद्ध के बावजूद भारत संतुलित रुख बनाए हुए है। BRICS में चीन और रूस ईरान के मजबूत समर्थक हैं, जिससे यह मंच ईरान के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।
ट्रंप-शी बैठक के समानांतर BRICS की यह गतिविधि दिखाती है कि दुनिया अब एक केंद्र पर निर्भर नहीं है।
- BRICS के जरिए ईरान को आर्थिक सहायता
- भारत की मध्यस्थता से युद्ध विराम
- क्षेत्रीय सुरक्षा में नया संतुलन
Sajjadali Nayani ✍
Friday World - 14 May 2026