- Friday World-25 May 2026
तेहरान। फार्स न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की संसद (इस्लामिक कंसल्टेटिव असेंबली) ने मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबाफ़ को एक बार फिर स्पीकर पद पर निर्विरोध चुन लिया है। अमेरिका के साथ संवेदनशील वार्ताओं के बीच यह चुनाव ईरान की आंतरिक एकता और रणनीतिक निरंतरता का प्रबल प्रतीक बनकर उभरा है। ग़ालिबाफ़ ने 276 मतों में से भारी बहुमत हासिल करते हुए सातवीं बार यह जिम्मेदारी संभाली। यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब ईरान क्षेत्रीय तनाव, आर्थिक चुनौतियों और परमाणु मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है।
ग़ालिबाफ़ का सफर: सैन्य कमांडर से संसद के सर्वोच्च पद तक
मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबाफ़ ईरानी राजनीति के एक अनुभवी और विवादास्पद चेहरे हैं। 1961 में जन्मे ग़ालिबाफ़ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व कमांडर रह चुके हैं। उन्होंने तेहरान के मेयर के रूप में लंबे समय तक सेवा की और 2020 से लगातार स्पीकर पद संभाल रहे हैं। उनकी पृष्ठभूमि उन्हें सुरक्षा, प्रशासन और कूटनीति का दुर्लभ मिश्रण प्रदान करती है।
ग़ालिबाफ़ को प्रिंसिपलिस्ट (मूल्यवादी) गुट का प्रमुख नेता माना जाता है। वे सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के करीबी माने जाते हैं और IRGC के साथ उनके गहरे संबंध उन्हें मजबूत आधार देते हैं। संसद में उनका पुनः चुनाव साबित करता है कि मौजूदा चुनौतीपूर्ण दौर में ईरान स्थिर और मजबूत नेतृत्व चाहता है।
US वार्ताओं में टॉप नेगोशिएटर की भूमिका
फार्स न्यूज और अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग़ालिबाफ़ अमेरिका के साथ चल रही अप्रत्यक्ष वार्ताओं में ईरान के प्रमुख वार्ताकार हैं। हालिया घटनाक्रम में पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर चर्चा हो रही है। मुख्य मुद्दे हैं:
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना
- ईरान के यूरेनियम स्टॉकपाइल का प्रबंधन
- आर्थिक प्रतिबंधों में राहत
- फ्रोजेन एसेट्स को अनफ्रीज करना
- फरवरी 2026 के संघर्ष के बाद सीजफायर को मजबूत करना
ये वार्ताएं 2026 की शुरुआत में अमेरिका-इजराइल हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाइयों के बाद शुरू हुईं। ग़ालिबाफ़ ने स्पष्ट कहा है कि “धमकी की छाया में कोई समझौता नहीं होगा”, लेकिन साथ ही प्रगति की संभावना भी जताई है। उनकी दोहरी भूमिका—संसद स्पीकर और प्रमुख वार्ताकार—ईरान को मजबूत पोजिशन देती है। संसद का समर्थन उन्हें घरेलू स्तर पर मजबूती प्रदान करेगा।
संसद चुनाव: आंकड़े और महत्व
सोमवार को हुए आंतरिक चुनाव में 285 सदस्यों की संसद में 270 से अधिक सांसदों ने भाग लिया। ग़ालिबाफ़ को भारी समर्थन मिला, जबकि अन्य उम्मीदवारों का प्रदर्शन मामूली रहा। यह चुनाव 12वीं संसद के नए सत्र में हुआ, जहां ग़ालिबाफ़ अब सातवीं बार स्पीकर बन गए हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, यह पुनः चुनाव ईरान की राजनीतिक व्यवस्था की निरंतरता दर्शाता है। कम मतदान प्रतिशत वाली हालिया संसदीय चुनावों के बावजूद, प्रिंसिपलिस्ट बहुमत बरकरार है। ग़ालिबाफ़ की जीत से संसद और कार्यपालिका के बीच तालमेल बढ़ेगा, खासकर राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के नेतृत्व में।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संदर्भ
ईरान वर्तमान में कई मोर्चों पर सक्रिय है। गाजा, लेबनान और यमन में जारी संघर्षों के बीच ईरान की “एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस” नीति जारी है। ग़ालिबाफ़ ने हमेशा फिलिस्तीन के मुद्दे पर मजबूत रुख अपनाया है। US वार्ताओं के बावजूद वे “प्रतिरोध की संस्कृति” को कमजोर नहीं होने देंगे।
चीन और रूस जैसे सहयोगी देशों के साथ ईरान के संबंध मजबूत हैं। ग़ालिबाफ़ को चीन मामलों का विशेष प्रतिनिधि भी बनाया गया है, जो बीजिंग के साथ आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को गति देगा।
आर्थिक चुनौतियां और संसद की भूमिका
ईरान प्रतिबंधों, मुद्रास्फीति और मुद्रा अवमूल्यन से जूझ रहा है। ग़ालिबाफ़ की प्राथमिकताएं हैं:
- घरेलू उत्पादन बढ़ाना
- आयात पर निर्भरता कम करना
- युवाओं के लिए रोजगार सृजन
- भ्रष्टाचार पर अंकुश
उनके कार्यकाल में संसद ने कई सुधारवादी कानून पारित किए, हालांकि कार्यान्वयन चुनौतीपूर्ण रहा। पुनः चुनाव के साथ वे इन मुद्दों पर और तेजी ला सकते हैं।
आलोचनाएं और विवाद
ग़ालिबाफ़ पर भ्रष्टाचार, परिवारवाद और प्रशासनिक कमियों के आरोप भी लगे हैं। उनके बेटे के कनाडा जाने और लक्जरी खर्च की खबरें सुर्खियां बनीं। फिर भी, सुप्रीम लीडर का समर्थन और IRGC का बैकअप उन्हें राजनीतिक रूप से मजबूत बनाए रखता है।
कुछ हार्डलाइनर गुट (जैसे पायदारी फ्रंट) उनकी व्यावहारिक कूटनीति से असहमत हैं, लेकिन संसद में उनका बहुमत बरकरार है।
भविष्य की दिशा: स्थिरता या परिवर्तन?
ग़ालिबाफ़ का पुनः चुनाव ईरान को स्पष्ट संदेश देता है—संक्रमण के इस दौर में कोई बड़ा बदलाव नहीं। US के साथ कोई भी समझौता ईरान की संप्रभुता, परमाणु अधिकार और क्षेत्रीय प्रभाव को बनाए रखते हुए होगा।
विश्व भर के विश्लेषक इस विकास पर नजर रखे हुए हैं। यदि वार्ताएं सफल हुईं तो ईरान को आर्थिक राहत मिल सकती है, जो घरेलू स्थिरता बढ़ाएगी। विफलता की स्थिति में तनाव बढ़ सकता है।
मजबूत ईरान, सशक्त नेतृत्व
मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबाफ़ का स्पीकर पद पर पुनः निर्वाचन ईरान की लोकतांत्रिक प्रक्रिया (ईरानी संदर्भ में) और रणनीतिक परिपक्वता का प्रमाण है। US वार्ताओं के बीच यह फैसला दिखाता है कि तेहरान न तो दबाव में है और न ही अस्थिर।
ईरान जैसे प्राचीन सभ्यता वाले देश के लिए यह क्षण महत्वपूर्ण है। ग़ालिबाफ़ जैसे नेता, जो सैन्य अनुशासन और राजनीतिक कौशल का मिश्रण हैं, देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं—बशर्ते घरेलू एकता और अंतरराष्ट्रीय समझदारी बनी रहे।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-25 May 2026