-Friday World 2 Jun 2026
नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच विश्व की ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे 13 भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारत सरकार ने उच्च प्राथमिकता वाला व्यापक ऑपरेशन शुरू कर दिया है। यह कदम भारतीय खलासियों, नौसेना हितों और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
विदेश मंत्रालय, पोर्ट्स-शिपिंग मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के समन्वय से चलाए जा रहे इस ऑपरेशन में हर भारतीय जहाज और उसके चालक दल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। शिपिंग मंत्रालय के डायरेक्टर ओपेश कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता उन जहाजों को तुरंत निकालना है जो फिलहाल होर्मुज क्षेत्र में मौजूद हैं।
होर्मुज संकट: पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण चोक पॉइंट है। यहां से लगभग 20-25% वैश्विक कच्चा तेल गुजरता है। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव, हमलों और नौसैनिक गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र में यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ईरान ने कई बार क्षेत्र को "बंद" करने की धमकी दी है, जबकि अमेरिका ने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए अपनी पहल शुरू की है।
इसी बीच भारत ने अपने हितों की रक्षा के लिए स्वतंत्र और सक्रिय रणनीति अपनाई है। ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि **एक एलपीजी टैंकर, पांच क्रूड ऑयल टैंकर, एक केमिकल/प्रोडक्ट टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और एक ड्रेजर** सहित कुल 13 भारतीय ध्वज वाले जहाज इस क्षेत्र में हैं।
सरकार ने इन सभी जहाजों के लिए समन्वित योजना तैयार कर ली है। नौसेना और मर्चेंट नेवी के समन्वय से इन जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान किया जा रहा है।
सफल उदाहरण: मार्शल आइलैंड्स का टैंकर निकला
एक सकारात्मक खबर यह है कि मार्शल आइलैंड्स ध्वज वाला क्रूड ऑयल टैंकर **निसोस केरोस** (लगभग 2.7 लाख मेट्रिक टन कच्चा तेल लेकर) 25-26 मई को होर्मुज को सुरक्षित पार कर चुका है। यह 3 जून को विशाखापट्टनम पहुंचने वाला है। इस जहाज पर कोई भारतीय खलासी नहीं था, लेकिन इसका सफल ट्रांजिट क्षेत्र में तनाव के बावजूद सुरक्षित नेविगेशन की संभावना को दर्शाता है।
खलासियों की सुरक्षा: सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय खलासी सुरक्षित हैं। अब तक किसी भी भारतीय या विदेशी ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज पर भारतीय नागरिकों से जुड़ी कोई अप्रिय घटना रिपोर्ट नहीं हुई है।
शिपिंग मंत्रालय के इमरजेंसी कंट्रोल सेंटर पर खलासियों और उनके परिवारों से हजारों कॉल और ईमेल आ रहे हैं। पिछले 96 घंटों में ही 500 से अधिक कॉल और 1,332 ईमेल प्राप्त हुए हैं। अब तक 3,400 से अधिक भारतीय खलासियों को क्षेत्र से सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।
विदेश मंत्रालय ने ईरान यात्रा से बचने की सलाह दी है। ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को राजदूतावास से संपर्क कर तुरंत निकलने की सलाह दी गई है।
ऊर्जा सुरक्षा: 30 दिनों का एलपीजी स्टॉक तैयार
इस संकट को देखते हुए तेल मंत्रालय ने रिफाइनरियों को कम से कम **30 दिनों का एलपीजी स्टोरेज** बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। तीन प्रमुख ऑयल पीएसयू को अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के लिए प्लान तैयार करने को कहा गया है। सरकार व्यूहात्मक पेट्रोलियम रिजर्व पर भी तेजी से काम कर रही है।
यह कदम घरेलू एलपीजी आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाने और महंगाई पर नियंत्रण रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत की समुद्री कूटनीति: सक्रिय और सशक्त
भारत लंबे समय से होर्मुज संकट पर नजर रखे हुए है। ऑपरेशन संकल्प और ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा जैसे प्रयासों के तहत भारतीय नौसेना ने क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। नौसेना के युद्धपोत भारतीय जहाजों को एस्कॉर्ट करने के लिए तैयार हैं।
यह ऑपरेशन केवल जहाज निकालने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की समुद्री सुरक्षा नीति की परिपक्वता को दर्शाता है। भारत न तो किसी एक पक्ष का समर्थन कर रहा है और न ही तनाव बढ़ाने का पक्ष ले रहा है। वह केवल अपने नागरिकों, जहाजों और आर्थिक हितों की रक्षा पर जोर दे रहा है।
ऐतिहासिक संदर्भ
भारत हमेशा से खाड़ी क्षेत्र में शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है। लाखों भारतीय खाड़ी देशों में काम करते हैं और अरब सागर-होर्मुज मार्ग भारत की ऊर्जा आयात का मुख्य रास्ता है। 90% से अधिक कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है। इसलिए इस क्षेत्र में कोई भी अस्थिरता सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था, मुद्रास्फीति और विदेशी मुद्रा भंडार को प्रभावित करती है।
आगे की चुनौतियां और रणनीति
- नौसैनिक एस्कॉर्ट: जरूरत पड़ने पर भारतीय नौसेना जहाजों को एस्कॉर्ट करेगी।
- वैकल्पिक मार्ग: लंबे रूट से जहाजों को भेजने की तैयारी।
- डिप्लोमेसी: दोनों पक्षों से बातचीत कर सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करना।
- घरेलू तैयारियां: पेट्रोलियम उत्पादों के स्टॉक बढ़ाना और आयात स्रोतों में विविधता लाना।
उपसंहार: भारत तैयार है, सतर्क भी
होर्मुज में 13 जहाजों को निकालने का यह ऑपरेशन भारत की "सुरक्षा पहले" वाली नीति का प्रतीक है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार हर स्तर पर समन्वय बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय, शिपिंग मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और खुफिया एजेंसियां 24x7 निगरानी रख रही हैं।
भारत दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि वह अपने हितों की रक्षा करने में सक्षम है, लेकिन शांति और स्थिरता का पक्षधर भी है। जब तक क्षेत्र में तनाव कम नहीं होता, तब तक सतर्कता बरती जाएगी।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 2 Jun 2026