पेरिस समेत पूरा फ्रांस इस वक्त इतिहास की सबसे खतरनाक हीटवेव में से एक का सामना कर रहा है। जी-7 शिखर सम्मेलन खत्म होते ही देश के एक तिहाई हिस्से पर रेड अलर्ट लगा दिया गया है। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है और सरकार ने लोगों से घरों में रहने की अपील की है।
1. हालात क्यों हुए बेकाबू?
जी-7 मीटिंग के तुरंत बाद यूरोप पर पड़ी प्रचंड गर्मी की मार फ्रांस पर सबसे भारी पड़ी। मौसम विभाग के मुताबिक सोमवार को पारा और चढ़ने की आशंका है। देश के 33% हिस्से में रेड अलर्ट है। यानी हालात जानलेवा हो सकते हैं। 2003 की हीटवेव में फ्रांस ने 15,000 बुजुर्ग खो दिए थे। वही डर फिर लौट आया है।
2. सरकार के इमरजेंसी कदम
गर्मी को देखते हुए फ्रांसीसी सरकार ने तुरंत कई बड़े फैसले लिए:
- आउटडोर गेम्स पूरी तरह बंद: फुटबॉल, टेनिस से लेकर बच्चों के स्कूल स्पोर्ट्स तक सब रोक दिए गए।
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- जंगल की आग का खतरा: हीटवेव से जंगलों में आग लगने का डर है। इसलिए फायर ब्रिगेड और सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
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- शराब पर रोक: अस्पतालों पर बोझ कम करने के लिए सार्वजनिक जगहों पर शराब पीने और बेचने पर पाबंदी लगा दी गई है। ताकि मेडिकल टीमें सिर्फ हीट स्ट्रोक के मरीजों पर ध्यान दे सकें।
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- कूलिंग स्टेशन्स चालू*: पेरिस समेत बड़े शहरों में जगह-जगह कूलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। यहां पानी की फुहारें और धुंध छोड़ी जा रही है। एफिल टावर पर खास इंतजाम किए गए हैं ताकि टूरिस्ट बेहाल न हों।
3. आम लोगों के लिए एडवाइजरी जारी
हर घर में AC नहीं है। इसलिए सरकार ने लोगों को सलाह दी है:
1. दोपहर 12 से शाम 5 बजे तक घर से बाहर न निकलें।
2. बुजुर्ग और बच्चों का खास ध्यान रखें। 2003 में सबसे ज्यादा मौतें इन्हीं की हुई थीं।
3. पंखे, कूलर का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें।
4. पानी और लिक्विड लेते रहें। डिहाइड्रेशन से बचें।
4. जनजीवन पर असर
गर्मी ने फ्रांस की रफ्तार रोक दी है। हर साल होने वाले म्यूजिक फेस्टिवल अब सिर्फ रात में हो रहे हैं। भीड़ भी कम आ रही है। एफिल टावर देखने आने वाले टूरिस्ट परेशान हैं। ऑफिस जाने वाले लोग सुबह जल्दी निकल रहे हैं या वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं।
5. क्यों डरा रहा है 2003 का जख्म?
फ्रांस के लोग 2003 की हीटवेव भूले नहीं हैं। तब अगस्त में 15,000 से ज्यादा बुजुर्गों की मौत सिर्फ गर्मी की वजह से हो गई थी। अस्पताल भर गए थे। उस वक्त तैयारी नहीं थी। इस बार सरकार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। इसलिए पहले ही रेड अलर्ट और इमरजेंसी जैसे कदम उठा लिए गए।
6. यूरोप क्यों बन रहा है 'हीट चैंबर'?
क्लाइमेट एक्सपर्ट्स मानते हैं कि क्लाइमेट चेंज की वजह से यूरोप दुनिया के बाकी हिस्सों से दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है। पहले यूरोप में AC कल्चर नहीं था। घर मोटी दीवारों के बनते थे ताकि सर्दी से बचाव हो। अब वही घर गर्मी में तंदूर बन जाते हैं। फ्रांस, स्पेन, इटली हर साल नई हीटवेव झेल रहे हैं।
7. भारत के लिए सबक
फ्रांस के हालात भारत के लिए भी चेतावनी हैं। हमारे यहां हर साल लू से सैकड़ों मौतें होती हैं। फ्रांस की तरह हमें भी हीट एक्शन प्लान मजबूत करना होगा। कूलिंग शेल्टर, पानी की व्यवस्था और बुजुर्गों के लिए खास इंतजाम वक्त की जरूरत है।
8. आगे क्या?
मौसम विभाग का कहना है कि अगले 48 घंटे बेहद अहम हैं। अगर तापमान 42 पार गया तो हालात और बिगड़ सकते हैं। स्कूल-कॉलेज पहले ही बंद हैं। दफ्तरों में शिफ्ट बदली जा रही है। फ्रांस की इकोनॉमी पर भी इसका असर दिखना शुरू हो गया है। टूरिज्म सेक्टर को बड़ा झटका लगा है।
गर्मी सिर्फ मौसम नहीं है। ये अब पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी बन चुकी है। फ्रांस की ये तस्वीरें बताती हैं कि क्लाइमेट चेंज अब भविष्य की बात नहीं है। ये आज की कड़वी हकीकत है। घर में रहें, सुरक्षित रहें। क्योंकि जान है तो जहान है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 22 Jun 2026