- Friday World 24 Jun 2026
इस्लामाबाद, 24 जून 2026– ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पाकिस्तान की राजधानी में मुस्लिम दुनिया को एकजुट होने का ऐतिहासिक आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि ईरान इस्लामिक देशों की ओर “दोस्ती का हाथ” बढ़ा रहा है ताकि एक **नया क्षेत्रीय सुरक्षा आर्किटेक्चर** बनाया जा सके। पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की जैसे प्रमुख देशों को शामिल करते हुए पेजेश्कियान ने “संयुक्त मोर्चा” बनाने की वकालत की।
यह बयान ठीक उसी समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच स्विट्जरलैंड में पाकिस्तानी मध्यस्थता से शांति वार्ता चल रही है। विश्लेषक इसे मध्य पूर्व और इस्लामी दुनिया में भू-राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं।
पेजेश्कियान का ऐतिहासिक बयान
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के निमंत्रण पर एक दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर इस्लामाबाद पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री हाउस में द्विपक्षीय और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद मीडिया से बात की। उन्होंने जोर देकर कहा:
> “ईरान ने इस्लामिक देशों की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है जिसमें पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की शामिल हैं। हम आपसी समझ को बढ़ावा देना चाहते हैं और नए रीजनल सिक्योरिटी आर्किटेक्चर की नींव रखना चाहते हैं।”
पेजेश्कियान ने आगे कहा कि मुस्लिम देशों को अब बाहरी ताकतों पर निर्भर रहने की बजाय खुद की सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए एक संयुक्त मोर्चा बनाना चाहिए। उन्होंने इस नए ढांचे को “इस्लामी एकता की नई मिसाल” बताया।
'इस्लामिक नाटो' की दिशा में तेजी
पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की जैसे देश इस्लामिक नाटो (Islamic NATO) या एक संयुक्त सुरक्षा गठबंधन बनाने की चर्चा कर रहे थे। ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान इस प्रक्रिया में ईरान के सक्रिय शामिल होने का स्पष्ट संकेत है।
पाकिस्तानी सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच हुई बैठक में इस नए सुरक्षा आर्किटेक्चर पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के प्रस्ताव का स्वागत किया और कहा कि पाकिस्तान क्षेत्रीय स्थिरता और इस्लामी सहयोग के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
यात्रा का संदर्भ और महत्व
यह यात्रा ईरानी राष्ट्रपति की स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ दो दिवसीय वार्ता के ठीक बाद हुई। नूर खान एयरबेस पर राष्ट्रपति पेजेश्कियान का विमान “Minab 168” (ईरानी राष्ट्रपति विशेष विमान) भव्य स्वागत के साथ उतरा। लाल कार्पेट पर पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उच्च अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
दोनों नेताओं की बैठक में निम्नलिखित मुद्दों पर गहन चर्चा हुई:
- नए क्षेत्रीय सुरक्षा आर्किटेक्चर का खाका तैयार करना
- ईरान-अमेरिका शांति समझौते का क्रियान्वयन
- द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाना
- पाकिस्तान-ईरान फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को तेजी देना
- मध्य पूर्व में स्थिरता, खाड़ी सुरक्षा और इस्लामी देशों के बीच समन्वय
क्षेत्रीय सुरक्षा आर्किटेक्चर की आवश्यकता क्यों?
विश्लेषकों के अनुसार, मध्य पूर्व में पिछले वर्षों के संघर्षों — ईरान-इजराइल तनाव, गाजा संकट, लेबनान की अस्थिरता और अफगानिस्तान की स्थिति — ने इस्लामी देशों को एकजुट होने की मजबूरी दी है। अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया के बीच ईरान का यह आह्वान कई मायनों में दूरगामी है:
1. बाहरी हस्तक्षेप कम करना: मुस्लिम देश खुद अपनी सुरक्षा व्यवस्था बनाएं।
2. आर्थिक सहयोग; ऊर्जा, व्यापार और प्रौद्योगिकी में आपसी निर्भरता बढ़ाना।
3. सामूहिक सुरक्षा: आतंकवाद, ड्रग तस्करी और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर संयुक्त रणनीति।
4. इस्लामी एकता: सांप्रदायिक विभाजन से ऊपर उठकर व्यापक सहयोग।
पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में पुल की भूमिका निभा रहा है। उसकी अमेरिका, सऊदी अरब और ईरान तीनों के साथ अच्छी कूटनीतिक पहुंच इसे आदर्श मध्यस्थ बनाती है।
पाकिस्तान-ईरान संबंध: नई ऊंचाइयां
दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक समानताएं हैं। हाल के वर्षों में सीमा सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा परियोजनाओं (जैसे आईपी गैस पाइपलाइन) में सहयोग बढ़ा है। पेजेश्कियान की इस यात्रा को संबंधों को नई गति देने वाला माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा, “पाकिस्तान और ईरान भाईचारे के रिश्ते हैं। हम क्षेत्रीय शांति और समृद्धि के लिए साथ काम करेंगे।”
वैश्विक प्रतिक्रियाएं
- सऊदी अरब और तुर्की: दोनों देशों ने सकारात्मक संकेत दिए हैं।
- कतर: पहले से ही मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
- अमेरिका: ट्रंप प्रशासन इस्लामिक देशों के बीच एकजुटता को सतर्कता से देख रहा है, लेकिन ईरान शांति प्रक्रिया के साथ इसे सकारात्मक मान रहा है।
- चीन और रूस: दोनों देश इस नए ढांचे को अपनी क्षेत्रीय रणनीति के अनुकूल मान सकते हैं।
चुनौतियां और आगे का रास्ता
नया सुरक्षा आर्किटेक्चर बनाने में कई चुनौतियां हैं — सांप्रदायिक मतभेद, क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं, और बाहरी शक्तियों का प्रभाव। फिर भी, ईरान जैसे बड़े देश का शामिल होना इस पहल को मजबूती देगा।
अगले कुछ महीनों में इस्लामाबाद, रियाद, अंकारा और दोहा में उच्चस्तरीय बैठकें होने की संभावना है। अगर यह प्रक्रिया सफल हुई तो यह “इस्लामाबाद घोषणा” या “पेजेश्कियान पहल” के नाम से इतिहास में दर्ज हो सकती है।
इस्लामी दुनिया का नया अध्याय
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का इस्लामाबाद दौरा और उनका सुरक्षा आर्किटेक्चर का आह्वान सिर्फ एक राजकीय यात्रा नहीं है। यह मुस्लिम दुनिया में एकता, आत्मनिर्भरता और शांति की नई दिशा का संकेत है।
पाकिस्तान की कूटनीतिक परिपक्वता और ईरान की नई सरकार की रचनात्मक नीति मिलकर क्षेत्र को युद्ध से शांति की ओर ले जा रही है। दुनिया अब देख रही है कि क्या इस “दोस्ती के हाथ” को अन्य इस्लामी देश थामेंगे और एक मजबूत, स्वतंत्र क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा खड़ा कर पाएंगे।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 24 Jun 2026