नई दिल्ली: राजधानी के सियासी गलियारों में केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार और फेरबदल को लेकर अटकलें चरम पर पहुंच गई हैं। सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले रविवार या सोमवार को अपनी कैबिनेट में बड़ा बदलाव कर सकते हैं। इस फेरबदल में कई नए चेहरों की एंट्री तय मानी जा रही है, जबकि मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी बड़े स्तर पर अदला-बदली संभव है।
चर्चा है कि भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव शक्तिकांत दास को केंद्रीय कैबिनेट में जगह मिल सकती है। वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को मानव संसाधन विकास मंत्रालय सौंपे जाने की प्रबल संभावना है। ऐसे में वित्त मंत्रालय की कमान शक्तिकांत दास को दिए जाने की अटकलें सबसे ज्यादा लगाई जा रही हैं।
क्यों जरूरी हो गया कैबिनेट फेरबदल?
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में यह पहला बड़ा फेरबदल होगा। 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सरकार अपने कामकाज को और धार देना चाहती है। इसके पीछे तीन बड़ी वजहें मानी जा रही हैं।
पहला कारण: क्षेत्रीय संतुलन साधना
महाराष्ट्र, बिहार, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों से कैबिनेट में प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है। 2026 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। महाराष्ट्र में शिवसेना के सांसद श्रीकांत शिंदे और बिहार से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। श्रीकांत शिंदे एकनाथ शिंदे के बेटे हैं और उन्हें मंत्री बनाकर महाराष्ट्र में NDA को मजबूती देने की कोशिश होगी।
दूसरा कारण: प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन
जिन मंत्रालयों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा या जहां विवाद हुए हैं, वहां बदलाव तय माना जा रहा है। 'नीट' पेपर लीक मामले के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मंत्रालय वापस लिया जा सकता है। उनकी जगह निर्मला सीतारमण को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी देने की चर्चा है। सीतारमण का लंबा प्रशासनिक अनुभव नई शिक्षा नीति को लागू करने में मददगार साबित हो सकता है।
तीसरा कारण: सहयोगी दलों को साधना
NDA के सहयोगी दलों को कैबिनेट में ज्यादा जगह देकर 2029 से पहले गठबंधन को मजबूत करने की रणनीति है। नीतीश कुमार अगर केंद्र में आते हैं तो बिहार में नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता भी साफ हो जाएगा।
पंजाब और पश्चिम बंगाल पर खास फोकस
पंजाब में जल्द विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। फिलहाल केंद्रीय मंत्रिमंडल में पंजाब का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। 2020 में कृषि कानूनों के विरोध में हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद से शिरोमणि अकाली दल सरकार से दूर है। रणवीत सिंह बिट्टू को भी दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा गया।
ऐसे में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की जगह किसी दूसरे सिख नेता को मौका दिया जा सकता है। इस रेस में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा का नाम भी चर्चा में है। हालांकि चड्ढा विपक्ष में हैं, लेकिन राजनीति में कुछ भी संभव है।
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के करीब 20 बागी सांसदों ने NDA को समर्थन देने का ऐलान किया है। इन बागी सांसदों में से किसी एक को केंद्रीय मंत्री बनाकर ममता बनर्जी को सीधी चुनौती दी जा सकती है। भाजपा बंगाल में अपना जनाधार बढ़ाना चाहती है और यह कदम सियासी समीकरण बदल सकता है।
किन मंत्रियों के बदल सकते हैं विभाग?
निर्मला सीतारमण के अलावा सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के मंत्रालयों में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। गडकरी के पास फिलहाल बहुत बड़ा कामकाज है। उनका कार्यभार कम करके दूसरे मंत्रियों को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
मनोहर लाल खट्टर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनके प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उन्हें कोई दूसरा बड़ा मंत्रालय दिया जा सकता है। धर्मेंद्र प्रधान के लिए यह फेरबदल अग्निपरीक्षा साबित हो सकता है। 'नीट' विवाद में देशभर में सरकार की आलोचना हुई थी। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय की छवि सुधारने के लिए नेतृत्व परिवर्तन जरूरी माना जा रहा है।
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद तेज हुईं अटकलें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले हफ्ते राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिले थे। आमतौर पर कैबिनेट विस्तार या फेरबदल से पहले प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को जानकारी देते हैं। इस मुलाकात के बाद ही दिल्ली में अटकलों का बाजार गर्म हुआ है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मोदी सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी के तहत यह फेरबदल कर रही है। नए चेहरों को मौका देकर, सहयोगी दलों को साथ लेकर और प्रदर्शन के आधार पर मंत्रियों की जिम्मेदारी तय करके सरकार अगली चुनाव के लिए मजबूत टीम बनाना चाहती है।
शक्तिकांत दास की एंट्री का क्या होगा असर?
अगर शक्तिकांत दास को वित्त मंत्री बनाया जाता है तो यह आर्थिक नीतियों के लिए बड़ा संकेत होगा। दास RBI गवर्नर रह चुके हैं और मौद्रिक नीति की गहरी समझ रखते हैं। कोविड के दौरान उनके काम की तारीफ हुई थी। वित्त मंत्रालय में उनकी मौजूदगी से बाजार को भी सकारात्मक संदेश जाएगा।
वहीं निर्मला सीतारमण को शिक्षा मंत्रालय मिलने पर उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा में सुधारों को रफ्तार मिल सकती है। उन्होंने वित्त मंत्री के तौर पर बजट में शिक्षा के लिए आवंटन बढ़ाया था। अब सीधे मंत्रालय संभालकर वह नई शिक्षा नीति 2020 को जमीन पर उतारने पर फोकस कर सकती हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल ये सब सिर्फ अटकलें हैं। अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को लेना है। लेकिन दिल्ली के सियासी गलियारों में जिस तरह चर्चाएं चल रही हैं, उसे देखते हुए अगले 48 घंटे बेहद अहम रहने वाले हैं।
अगर शक्तिकांत दास वित्त मंत्री बनते हैं, श्रीकांत शिंदे और नीतीश कुमार की एंट्री होती है, और पंजाब-बंगाल से नए चेहरों को जगह मिलती है, तो NDA और मजबूत होगा। यह फेरबदल सिर्फ मंत्रियों की अदला-बदली नहीं होगा। यह 2029 की तैयारी की दिशा में बड़ा सियासी कदम साबित होगा।
अब सबकी नजर प्रधानमंत्री के अगले फैसले पर टिकी है। आधिकारिक घोषणा प्रधानमंत्री कार्यालय से ही की जाएगी। तब तक कयासों का दौर जारी रहेगा।
जरूरी सूचना: यह लेख राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। कैबिनेट फेरबदल को लेकर कोई भी आधिकारिक जानकारी PMO की तरफ से ही जारी की जाएगी।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 27 Jun 2026