- Friday World 27 Jun 2026
जब हम उच्च शिक्षा और यूनिवर्सिटी की बात करते हैं, तो ज्यादातर लोगों के मन में यूरोप के नाम घूमते हैं—बोलोग्ना, ऑक्सफोर्ड या कैम्ब्रिज। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे पुरानी लगातार चलने वाली यूनिवर्सिटी न तो इटली में है, न ब्रिटेन में, बल्कि उत्तरी अफ्रीका के मोरक्को में? फेज़ शहर की यूनिवर्सिटी ऑफ अल-कराउइन (University of al-Qarawiyyin) न सिर्फ इतिहास की किताबों में, बल्कि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और यूनेस्को की मान्यता के अनुसार, दुनिया की सबसे पुरानी उच्च शिक्षा संस्था है। इसकी स्थापना 859 ईस्वी में एक दूरदर्शी मुस्लिम महिला, फातिमा अल-फिहरी ने की थी।
यह कहानी सिर्फ एक इमारत की नहीं, बल्कि ज्ञान की प्यास, महिला सशक्तिकरण और इस्लामी स्वर्ण युग की बौद्धिक विरासत की है। आज भी यह संस्थान सक्रिय है और आधुनिक शिक्षा प्रणाली को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है।
फातिमा अल-फिहरी: एक महिला का सपना और दान
9वीं शताब्दी की शुरुआत। ट्यूनीशिया के कैरवान (Qairouan) शहर से एक समृद्ध व्यापारी परिवार फेज़ (Fez), मोरक्को में बसने आया। इस परिवार की बेटी थीं फातिमा अल-फिहरी। उनके पिता मुहम्मद अल-फिहरी एक सफल व्यापारी थे, जिन्होंने अपनी बेटियों को अच्छी शिक्षा दी। फातिमा और उनकी बहन मरयम दोनों ही ज्ञान की दीवानी थीं।
पिता की मृत्यु के बाद दोनों बहनों को काफी संपत्ति विरासत में मिली। फातिमा ने इस संपत्ति को व्यक्तिगत सुख-सुविधा में खर्च करने के बजाय एक बड़े उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया। उन्होंने फैसला किया कि फेज़ में एक मस्जिद और शिक्षा केंद्र बनवाया जाए, जहां न सिर्फ नमाज पढ़ी जाए, बल्कि ज्ञान का आदान-प्रदान भी हो।
859 ईस्वी में, रमजान के पहले दिन, फातिमा और उनकी बहन ने अल-कराउइन मस्जिद की नींव रखी। नाम उन्होंने अपने गृहनगर कैरवान के सम्मान में रखा। निर्माण में लगभग दो साल लगे। शुरू में यह एक मस्जिद था, लेकिन जल्द ही इसमें पढ़ाई-लिखाई शुरू हो गई। फातिमा खुद भी यहां शिक्षा ग्रहण करती थीं। उन्होंने इसे वक्फ (charitable endowment) के रूप में स्थापित किया, ताकि यह सदियों तक चले और किसी की व्यक्तिगत संपत्ति न बने।
अल-कराउइन: मस्जिद से यूनिवर्सिटी तक
शुरुआती दौर में अल-कराउइन में इस्लामी अध्ययन, कुरान, हदीस, फिक्ह (इस्लामी कानून), अरबी व्याकरण, गणित, खगोलशास्त्र, चिकित्सा और अन्य विषय पढ़ाए जाते थे। यहां का शिक्षण पद्धति अनोखी थी—छात्र शेख (शिक्षक) के चारों ओर अर्ध-वृत्ताकार में बैठते और चर्चा करते। यह तरीका आज भी कई जगहों पर देखा जा सकता है।
समय के साथ यह संस्थान पूरे इस्लामी दुनिया का बौद्धिक केंद्र बन गया। 10वीं से 14वीं शताब्दी के दौरान फेज़ इस्लामी स्वर्ण युग का प्रमुख केंद्र था। अल-कराउइन ने न सिर्फ मुस्लिम विद्वानों को, बल्कि यूरोपीय विद्वानों को भी आकर्षित किया। कई इतिहासकारों का मानना है कि यूरोप में पुनर्जागरण (Renaissance) को प्रभावित करने वाले कई विचार इसी जगह से निकले।
यहां की लाइब्रेरी भी बेहद प्रसिद्ध है, जिसमें दुर्लभ पांडुलिपियां संरक्षित हैं। यह संस्थान आधुनिक डिग्री प्रणाली का अग्रदूत माना जाता है—विभिन्न स्तरों (जैसे इजाजा) पर डिग्री देने की परंपरा यहीं से शुरू हुई।
गिनीज और यूनेस्को की मान्यता
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स स्पष्ट रूप से अल-कराउइन को "दुनिया की सबसे पुरानी लगातार चलने वाली उच्च शिक्षा संस्था" मानता है। यूनेस्को ने फेज़ की मदीना को विश्व धरोहर घोषित किया है और अल-कराउइन को इसके केंद्र के रूप में मान्यता दी है।
तुलना करें तो:
- इटली की बोलोग्ना यूनिवर्सिटी (1088 ईस्वी) को यूरोप की सबसे पुरानी माना जाता है।
- अल-कराउइन इससे लगभग 229 साल पहले स्थापित हुई।
यह सिर्फ उम्र की बात नहीं, बल्कि निरंतरता की भी है। अल-कराउइन आज भी बिना रुके चल रही है, जबकि कई प्राचीन संस्थान समय के साथ लुप्त हो गए।
आधुनिक युग में अल-कराउइन
1963 में इसे आधिकारिक रूप से मोरक्को की राज्य यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला। आज यहां इस्लामी अध्ययन, कानून, भाषा, साहित्य और अन्य विषयों की पढ़ाई होती है। पारंपरिक शिक्षण पद्धति के साथ-साथ आधुनिक सुविधाएं भी जुड़ चुकी हैं।
यह यूनिवर्सिटी सिर्फ मोरक्को की नहीं, बल्कि पूरे मुस्लिम दुनिया और मानवता की साझा विरासत है। यहां पढ़े कई विद्वान बाद में बड़े-बड़े योगदान देते रहे। उदाहरण के लिए, मध्यकालीन यूरोप में अरबी ज्ञान का अनुवाद अल-कराउइन जैसे केंद्रों से प्रभावित था।
महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल
फातिमा अल-फिहरी की कहानी 9वीं शताब्दी में महिला शिक्षा और नेतृत्व की मिसाल है। उस दौर में जब संसाधन सीमित थे, एक महिला ने अपनी सारी संपत्ति ज्ञान के प्रसार पर लगा दी। उन्होंने न सिर्फ मस्जिद बनवाई, बल्कि एक ऐसी संस्था खड़ी की जो सदियों तक ज्ञान का दीपक बनी रही।
आज के समय में जब महिला शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है, फातिमा की कहानी याद दिलाती है कि सशक्तिकरण की जड़ें हमारे इतिहास में गहरी हैं। उनकी बहन मरयम ने भी अल-अंदरुस मस्जिद बनवाई, जो फेज़ की दूसरी महत्वपूर्ण इमारत है।
क्यों भुला दिया जाता है यह इतिहास?
अक्सर यूरोकेंद्रित इतिहास लेखन के कारण अल-कराउइन जैसी उपलब्धियां पृष्ठभूमि में चली जाती हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि इस्लामी स्वर्ण युग ने विज्ञान, चिकित्सा, गणित और दर्शन में जो योगदान दिया, वह आधुनिक सभ्यता की नींव है। अल-कराउइन इसी योगदान का जीवंत प्रमाण है।
फेज़ शहर खुद एक जीवंत संग्रहालय है—संकीर्ण गलियां, पारंपरिक बाजार, और प्राचीन इमारतें आज भी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। अल-कराउइन यहां का गौरव है।
ज्ञान की निरंतरता
अल-कराउइन हमें याद दिलाती है कि ज्ञान की यात्रा सीमाओं से परे है। एक महिला की दूरदृष्टि ने न सिर्फ एक यूनिवर्सिटी बनाई, बल्कि पूरे विश्व को शिक्षा का नया मॉडल दिया। आज जब हम डिजिटल युग में नई-नई यूनिवर्सिटीज देख रहे हैं, तब भी इस 1165+ साल पुरानी संस्था की प्रासंगिकता बरकरार है।
फातिमा अल-फिहरी का संदेश साफ है—शिक्षा सबसे बड़ा सदका है। उनकी विरासत हमें प्रेरित करती है कि ज्ञान को संरक्षित रखें, फैलाएं और अगली पीढ़ी को सौंपें।
यह लेख मूल शोध, ऐतिहासिक तथ्यों और विश्वसनीय स्रोतों (गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, यूनेस्को, ऐतिहासिक दस्तावेज) पर आधारित है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 27 Jun 2026