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Sunday, 28 June 2026

गुप्त सौदे, उन्नत हथियार: बिना राजनयिक रिश्तों के इज़राइल ने कतर-सऊदी अरब को बेची करोड़ों की रक्षा तकनीक

गुप्त सौदे, उन्नत हथियार: बिना राजनयिक रिश्तों के इज़राइल ने कतर-सऊदी अरब को बेची करोड़ों की रक्षा तकनीक -Friday World 28 Jun 2026
गुप्त सौदे, उन्नत हथियार: बिना राजनयिक रिश्तों के इज़राइल ने कतर-सऊदी अरब को बेची करोड़ों की रक्षा तकनीक

दुनिया की कूटनीति में दोस्ती और दुश्मनी के बीच की लकीरें अक्सर धुंधली हो जाती हैं। 28 जून 2026 को इज़राइली अखबार _हारेत्ज़_ में छपी एक रिपोर्ट ने इसी धुंध को और गहरा कर दिया। रिपोर्ट दावा करती है कि इज़राइल की दो सबसे बड़ी रक्षा कंपनियों - एल्बिट सिस्टम्स और इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) - ने कतर और सऊदी अरब को करोड़ों शेकेल की उन्नत रक्षा प्रणालियाँ और लड़ाकू विमानों के कल-पुर्जे बेचे हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि इज़राइल के इन दोनों देशों के साथ आज तक कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। 760a

1. रिपोर्ट में क्या-क्या खुलासे हुए?

कतर के शाही विमानों को इज़राइली सुरक्षा कवच
_हारेत्ज़_ के मुताबिक, 2020 से 2022 के बीच कतर के शाही बेड़े के विमानों पर एल्बिट सिस्टम्स की C-MUSIC मिसाइल रक्षा प्रणाली लगाई गई। इनमें कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद आले-सानी का निजी विमान भी शामिल है। C-MUSIC एक डायरेक्शनल इंफ्रारेड काउंटर मेज़र सिस्टम है जो कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलों से विमानों को बचाता है।

F-15QA लड़ाकू विमानों के लिए इज़राइली पुर्जे
रिपोर्ट में बताया गया कि इज़राइली कंपनियों ने बोइंग के ठेकों के तहत कतर के F-15QA लड़ाकू विमानों के लिए भी उन्नत पुर्जे सप्लाई किए। इन सौदों की कुल कीमत 150 मिलियन से 250 मिलियन डॉलर के बीच आंकी गई है।

सऊदी अरब से भी रिश्ता
कतर के अलावा सऊदी अरब को भी इज़राइली रक्षा उपकरण बेचे जाने का जिक्र है। ये सौदे ऐसे वक्त हुए जब सार्वजनिक रूप से दोनों देशों के बीच दूरी ही नजर आती रही है। 

2. ये सौदे कैसे मुमकिन हुए? बिना रिश्तों के हथियार कैसे बिके?

इज़राइल में हथियार निर्यात का सिस्टम बेहद सख्त है। कोई भी कंपनी रक्षा सौदा करने से पहले विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्सपोर्ट कंट्रोल एजेंसी (DECA) और इंटरनेशनल डिफेंस कोऑपरेशन डायरेक्टरेट से मंजूरी लेती है। कई संवेदनशील मामलों में प्रधानमंत्री की सीधी मंजूरी भी जरूरी होती है। 

_हारेत्ज़_ और _यरुशलम पोस्ट_ की पहले की रिपोर्ट्स बताती हैं कि एल्बिट, राफेल और IAI के कतर के साथ सौदों को इन्हीं एजेंसियों और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंजूरी दी थी। सौदों को अक्सर किसी तीसरे देश या विदेशी बिचौलिए के जरिए अंजाम दिया गया ताकि सीधे संबंध सामने न आएं। 

IAI का तो कतर के साथ “लंबे समय का रिश्ता” बताया गया। रिपोर्ट के मुताबिक IAI के तत्कालीन सीईओ ने दोहा के कम से कम 20 दौरे किए और कतर का एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल भी IAI मुख्यालय में ब्रीफिंग ले चुका है। हालांकि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इनमें से कई संपर्क और समझौते रद्द या बाधित हो गए। 

3. भू-राजनीति का नया खेल: दुश्मनी के बीच कारोबार

ईरान फैक्टर सबसे बड़ा
मध्य-पूर्व में ईरान को लेकर साझा चिंता इज़राइल और खाड़ी देशों को करीब ला रही है। अमेरिका लंबे समय से चाहता था कि सैन्य सहयोग के जरिए इज़राइल और अरब देशों के बीच राजनीतिक सामान्यीकरण हो। 2022 में इज़राइल और 6 अरब देशों ने ईरान की मिसाइलों और ड्रोन से निपटने के लिए एक एयर-डिफेंस प्लान पर हस्ताक्षर भी किए थे। 

अब्राहम अकॉर्ड्स की छाया
2020 में UAE, बहरीन और मोरक्को के साथ हुए अब्राहम अकॉर्ड्स ने इज़राइल के लिए खाड़ी के दरवाजे खोले। कतर और सऊदी अरब ने भले ही आधिकारिक रिश्ते न बनाए हों, लेकिन पर्दे के पीछे रक्षा सहयोग चलता रहा।

अमेरिका की भूमिका
मई 2026 में अमेरिका ने कतर को 4 बिलियन डॉलर के पैट्रियट मिसाइल सिस्टम और सऊदी अरब को 142 बिलियन डॉलर के हथियार बेचने की मंजूरी दी। इज़राइल को चिंता है कि इतने बड़े सौदे अमेरिका की “क्वालिटेटिव मिलिट्री एज” की गारंटी को कमजोर कर सकते हैं। फिर भी, इज़राइल खुद बोइंग जैसे अमेरिकी ठेकों के जरिए कतर के F-15 में पुर्जे सप्लाई कर रहा था। 

4. कंपनियों का क्या कहना है?

एल्बिट सिस्टम्स ने बयान में कहा, “एल्बिट की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियाँ इज़राइली रक्षा मंत्रालय की निगरानी और नियमों के तहत होती हैं”। यानी कंपनी ने सौदों से इनकार नहीं किया, बल्कि सरकारी मंजूरी की बात दोहराई। 

IAI और राफेल ने इस रिपोर्ट पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। लेकिन पुरानी रिपोर्ट्स में IAI के कतर दौरों और ब्रीफिंग का जिक्र है। 

5. कतर-सऊदी का दोहरा रुख: बयान कुछ, काम कुछ

सार्वजनिक मंचों पर कतर और सऊदी अरब इज़राइल के सबसे बड़े आलोचक रहे हैं। सितंबर में UN में कतर के अमीर ने गाज़ा संघर्ष को “फिलिस्तीनी लोगों के खिलाफ नरसंहार युद्ध” कहा। सऊदी विदेश मंत्रालय ने भी अगस्त में इज़राइल पर “भुखमरी” और “एथनिक क्लींजिंग” का आरोप लगाया। 

इसके बावजूद, पर्दे के पीछे सुरक्षा सहयोग जारी रहा। लीक दस्तावेजों के मुताबिक अमेरिका चाहता था कि सैन्य सहयोग से राजनीतिक सामान्यीकरण का रास्ता बने, लेकिन सभी बैठकें “गोपनीयता” में रखने की शर्त थी। 

6. इज़राइल के लिए फायदे और जोखिम

फायदे:
1. अर्थव्यवस्था: एल्बिट ने अकेले कतर से 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा के सौदे किए। राफेल के सौदे भी करोड़ों डॉलर के थे।
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2. रणनीतिक बढ़त: ईरान के खिलाफ खाड़ी देशों से अघोषित गठजोड़ मजबूत होता है।
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3. तकनीक टेस्टिंग: असली युद्धक्षेत्र जैसे माहौल में हथियारों की टेस्टिंग का मौका। 

जोखिम:

1. तकनीक लीक: इज़राइल ने खुद कतर में अमेरिकी रक्षा प्रणालियों को भेदा था, जिससे अमेरिकी हथियार बिक्री पर सवाल उठे।
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2. राजनीतिक बैकलैश: हमास से करीबी रखने वाले कतर को हथियार बेचने पर इज़राइल में ही सवाल उठते हैं।
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3. QME का खतरा: सऊदी को 142 बिलियन डॉलर के अमेरिकी हथियार और इज़राइली तकनीक मिलने से क्षेत्र में सैन्य संतुलन बदल सकता है। 

7. आगे क्या?

1. 7 अक्टूबर का असर: हमास के हमले के बाद कतर के साथ कई इज़राइली रक्षा संपर्क टूट गए। भविष्य के सौदे ठंडे बस्ते में जा सकते हैं।
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2. अमेरिकी दबाव: इज़राइल का कतर पर हवाई हमला अमेरिका-कतर के 42 बिलियन डॉलर के रक्षा सौदों को खतरे में डाल सकता है।
3. *सामान्यीकरण की उम्मीद*: ट्रंप प्रशासन सऊदी-इज़राइल रिश्तों पर जोर दे रहा है। गुप्त रक्षा सौदे शायद उसी की जमीन तैयार कर रहे हों। 

8. निष्कर्ष: कूटनीति का नया चेहरा

ये रिपोर्ट बताती है कि 21वीं सदी की कूटनीति नारों से नहीं, जरूरतों से चलती है। कतर जो सार्वजनिक रूप से इज़राइल को “रंगभेद सिस्टम” कहता है, वही अपने अमीर के विमान पर इज़राइली मिसाइल रक्षा सिस्टम लगवाता है। सऊदी अरब जो इज़राइल को मान्यता नहीं देता, वो इज़राइली तकनीक से लैस अमेरिकी हथियार खरीदता है। 

मध्य-पूर्व में दुश्मनी और दोस्ती अब ब्लैक एंड व्हाइट नहीं रही। ग्रे ज़ोन में हथियार, तकनीक और खुफिया जानकारी का लेन-देन ही नई विदेश नीति बन चुका है। इज़राइल के लिए ये सौदे पैसा और रणनीतिक गहराई लाते हैं, पर साथ ही सवाल भी: क्या दुश्मन के दुश्मन को हथियार बेचना कल खुद के लिए खतरा बन सकता है?

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 28 Jun 2026