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Monday, 29 June 2026

नीली क्षितिज का संरक्षक या विकास की कीमत? नरेन्द्र मोदी को सेशेल्स का 'Guardian of the Blue Horizon' सम्मान और भारत में वन कटान की वास्तविकता

नीली क्षितिज का संरक्षक या विकास की कीमत? नरेन्द्र मोदी को सेशेल्स का 'Guardian of the Blue Horizon' सम्मान और भारत में वन कटान की वास्तविकता -Friday World 30 Jun 2026

हिंद महासागर के शांत द्वीप राष्ट्र सेशेल्स ने 28 जून 2026 को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपना उच्चतम राष्ट्रपति सम्मान "Guardian of the Blue Horizon" प्रदान किया। यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास, जलवायु resilience और ब्लू इकोनॉमी में उनके वैश्विक नेतृत्व के लिए दिया गया। वहीं, भारत में विकास परियोजनाओं के लिए वन क्षेत्रों की मंजूरी और पेड़ कटान की खबरें भी चर्चा में रहती हैं। यह लेख दोनों पक्षों को तथ्यों के साथ संतुलित रूप से रखता है, ताकि पाठक पूर्ण चित्र देख सकें।

सेशेल्स सम्मान: नीली क्षितिज का नया गार्जियन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को यह सम्मान सेशेल्स की स्वतंत्रता के स्वर्ण जयंती (Golden Jubilee) के अवसर पर मिला। सेशेल्स कैबिनेट ने 24 जून 2026 को इस नए "Presidential distinction" को मंजूरी दी थी। मोदी इसके पहले और इकलौते प्राप्तकर्ता हैं।

"Guardian of the Blue Horizon" पर्यावरण संरक्षण और समुद्री संसाधनों के संरक्षण पर केंद्रित है। सेशेल्स जैसे छोटे द्वीपीय राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल हैं। यहां की अर्थव्यवस्था पर्यटन और ब्लू इकोनॉमी पर निर्भर है।

मोदी जी की सराहनीय पहलें:
- Mission LiFE: पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा।
- International Solar Alliance: सौर ऊर्जा का वैश्विक सहयोग।
- CDRI: आपदा-रोधी बुनियादी ढांचा।
- Ek Ped Maa Ke Naam: सामूहिक वृक्षारोपण।
- अंतरराष्ट्रीय सौर और जलवायु पहलें।

मोदी ने सम्मान को जलवायु संकट से लड़ रहे सभी देशों को समर्पित किया। सेशेल्स भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है – रक्षा, सुरक्षा, पर्यटन और समुद्री सहयोग के क्षेत्र में। यात्रा के दौरान भारत ने तेज गश्ती पोत और अन्य सहायता भी प्रदान की।

 भारत में वन संरक्षण और विकास: तथ्य और चुनौतियां
वैश्विक मंच पर पर्यावरणीय नेतृत्व दिखाते हुए भारत में विकास परियोजनाओं के लिए वन क्षेत्रों (forest land) की डाइवर्शन (diversion) की मंजूरियां भी जारी हैं। आधिकारिक आंकड़ों और विश्लेषणों के अनुसार:

हसदेव अरण्य (Hasdeo Aranya) जंगल, छत्तीसगढ़
- यह मध्य भारत का एक घना, जैव विविधता से भरपूर वन क्षेत्र है, जो आदिवासी समुदायों का भी घर है।
- कोयला खनन परियोजनाओं (जैसे Parsa East Kanta Basan - PEKB और Kente Extension) के लिए चरणबद्ध मंजूरियां मिली हैं।
- एक प्रस्ताव में लगभग 7 लाख पेड़ प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
- PEKB खदान के लिए पहले चरण में हजारों पेड़ काटे जा चुके हैं। कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए हैं, जिसमें वन अधिकारों (Forest Rights Act) का मुद्दा प्रमुख रहा।

राष्ट्रीय स्तर पर आंकड़े:
- जुलाई 2023 से मई 2026 तक पर्यावरण मंत्रालय ने वन भूमि पर **28 लाख से अधिक पेड़** काटने की मंजूरी दी (Down To Earth विश्लेषण के अनुसार)। लगभग 22,000 हेक्टेयर से ज्यादा वन क्षेत्र शामिल।
- प्रस्तावों की स्वीकृति दर 80% से अधिक रही।
- खनन, जलविद्युत और पुनर्वास परियोजनाएं इनमें प्रमुख हैं।
- 2014 से 2025 तक के कुछ आंकड़ों के अनुसार, लगभग 1.91 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र गैर-वन उपयोग के लिए डाइवर्ट किया गया, जिसमें करोड़ों पेड़ प्रभावित होने के दावे हैं (विपक्षी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे सहित)।

Compensatory Afforestation (CAMPA):
सरकार का दावा है कि हर कटे पेड़ के बदले नए पौधे लगाए जाते हैं और Net Present Value (NPV) जमा किया जाता है। वन (संरक्षण) अधिनियम के तहत मंजूरी प्रक्रिया में पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (EIA), ग्राम सभा सहमति और अन्य शर्तें शामिल हैं।

 विकास बनाम संरक्षण: संतुलन की चुनौती
भारत जैसे विकासशील देश में बुनियादी ढांचा, ऊर्जा सुरक्षा और रोजगार की जरूरतें वन संरक्षण से टकराती हैं। 

सरकार का पक्ष:
- वन क्षेत्र बढ़ाने के प्रयास (Green India Mission, वृक्षारोपण अभियान)।
- आर्थिक विकास से प्राप्त संसाधनों का उपयोग पर्यावरण संरक्षण में।
- ऊर्जा सुरक्षा के लिए स्वदेशी कोयला उत्पादन।
- बॉर्डर सुरक्षा और रणनीतिक परियोजनाओं के लिए तेज मंजूरियां।

चिंताएं और आलोचना:
- घने प्राचीन वनों (old growth forests) का नुकसान जैव विविधता और कार्बन सिंक को प्रभावित करता है।
- आदिवासी अधिकारों और वन्यजीवों पर असर।
- जलवायु लक्ष्यों (Paris Agreement, Net Zero) के साथ तालमेल।
- हसदेव जैसे क्षेत्रों में स्थानीय विरोध और कानूनी लड़ाई।

भारत का कुल वन क्षेत्र लगभग 21-24% है (ISFR रिपोर्ट), लेकिन गुणवत्ता और घनत्व महत्वपूर्ण हैं। सरकार वन क्षेत्र बढ़ाने का दावा करती है, जबकि स्वतंत्र रिपोर्ट्स वास्तविक नुकसान की बात करती हैं।

 वैश्विक संदर्भ में भारत
सेशेल्स सम्मान भारत की **वैश्विक छवि** को मजबूत करता है। भारत G20, ISA और अन्य मंचों पर जलवायु नेतृत्व दिखाता है। साथ ही, घरेलू स्तर पर विकास की गति बनाए रखना चुनौती है। 

संभावित रास्ता:
- सतत खनन प्रौद्योगिकी (less destructive mining)।
- पुनर्वनीकरण की सख्त निगरानी।
- सौर, पवन और हाइड्रोजन जैसी हरित ऊर्जा पर तेजी।
- सामुदायिक भागीदारी वाले संरक्षण मॉडल।

नीली क्षितिज और हरी भूमि दोनों की रक्षा
"Guardian of the Blue Horizon" प्रधानमंत्री मोदी के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को मान्यता देता है। यह भारत की सॉफ्ट पावर और पर्यावरणीय कूटनीति को रेखांकित करता है। वहीं, हसदेव अरण्य और अन्य क्षेत्रों में वन डाइवर्शन के मामले विकास बनाम संरक्षण की कठिन बहस को सामने लाते हैं।

भारत को दोनों पक्ष संभालने होंगे – आर्थिक प्रगति और पारिस्थितिकी संतुलन। सेशेल्स जैसे छोटे देशों के साथ सहयोग और घरेलू जंगलों की सुरक्षा एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं। 

भविष्य की दिशा: यदि compensatory afforestation वास्तविक हरे-भरे जंगलों में बदल जाए, आदिवासी अधिकार सुरक्षित रहें और हरित ऊर्जा संक्रमण तेज हो, तो "नीली क्षितिज" और "हरी भूमि" दोनों सुरक्षित रह सकती हैं। 

नोट: पर्यावरण संरक्षण हर नागरिक की जिम्मेदारी है। वृक्षारोपण करें, जागरूक रहें।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 30 Jun 2026