पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तूफान आ गया है। दक्षिण 24 परगना जिले के फलता विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस के विवादास्पद नेता और पूर्व प्रत्याशी जहांगीर खान को नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार कर लिया गया। पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने लंबे छिपे रहने के बाद इस ‘पुष्पा स्टाइल’ नेता को दबोचा। गिरफ्तारी की खबर आते ही फलता में TMC कार्यालय पर पहले से हो चुकी तोड़फोड़ की घटना भी सुर्खियों में आ गई। जहां एक तरफ BJP कार्यकर्ताओं पर TMC ऑफिस में तोड़फोड़ का आरोप है, वहीं दूसरी तरफ जहांगीर खान पर चुनावी हिंसा, वोटर धमकी और अन्य गंभीर आरोप लग रहे हैं। यह घटना बंगाल की बदलती सियासी हवा को साफ दर्शाती है।
फलता की सियासी आग: चुनावी गड़बड़ी से लेकर गिरफ्तारी तक
फलता विधानसभा सीट पर विधानसभा चुनाव के दौरान भारी विवाद हुआ था। आरोप लगे कि TMC कार्यकर्ताओं ने वोटरों को धमकाया, EVM में हेराफेरी की कोशिश की और बूथ कैप्चरिंग जैसी घटनाएं हुईं। चुनाव आयोग ने स्थिति की गंभीरता देखते हुए पूरे क्षेत्र में पुनर्मतदान (री-पोलिंग) का आदेश दिया। 21 मई को 285 बूथों पर नए सिरे से वोटिंग हुई।
जहांगीर खान, जिन्हें ‘फलता का पुष्पा’ भी कहा जाता है, ने री-पोलिंग से ठीक पहले चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे फलता के विकास के प्रति प्रतिबद्ध हैं, लेकिन सियासी दबाव और सुरक्षा चिंताओं के चलते मैदान छोड़ दिया। उनकी यह अचानक वापसी ने TMC में हलचल मचा दी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें 25 मई तक गिरफ्तारी से राहत दी थी, लेकिन इसके बाद वे फरार हो गए।
जून 2026 के पहले सप्ताह में STF ने गुप्त सूचना पर कार्रवाई की। नेपाल बॉर्डर के निकट जहांगीर खान को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, उनके खिलाफ चुनावी हिंसा, वोटरों को डराने-धमकाने, एक्सटॉर्शन और अन्य कई मामले दर्ज हैं। गिरफ्तारी के बाद उन्हें फलता पुलिस स्टेशन लाया गया जहां पूछताछ जारी है।
TMC ऑफिस में तोड़फोड़: पोस्ट-पोल वायलेंस की नई मिसाल?
जहांगीर खान की गिरफ्तारी से पहले फलता में TMC के पार्टी ऑफिस पर हमला हो चुका था। सूत्रों के मुताबिक, चुनाव परिणामों के बाद BJP समर्थक कार्यकर्ताओं की भीड़ ने ऑफिस में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। फर्नीचर तोड़े गए, कुर्सियां उलट दी गईं, दीवारों पर जय श्री राम के नारे लिखे गए और BJP के झंडे फहराए गए।
TMC कार्यकर्ताओं ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP कार्यकर्ता जानबूझकर TMC के मजबूत ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। वहीं BJP ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि स्थानीय लोग TMC के तानाशाही और गुंडागर्दी से त्रस्त थे, इसलिए स्वतःस्फूर्त विरोध हुआ।
पुलिस ने इस मामले में कुछ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है, लेकिन अभी तक कोई बड़ी गिरफ्तारी नहीं हुई। फलता में तनाव अभी भी बना हुआ है। केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि कोई नया उपद्रव न हो।
जहांगीर खान कौन हैं? ‘मैं झुकूंगा नहीं’ वाला लीडर
जहांगीर खान TMC के मजबूत चेहरे में से एक माने जाते हैं। अब्दुल्ला बोहरा या अभिषेक बनर्जी के करीबी बताए जाते हैं। फलता क्षेत्र में उनकी पकड़ काफी मजबूत थी। उन्होंने कई बार विवादास्पद बयान दिए। एक बार एक पुलिस अधिकारी से कहा था – “मैं झुकूंगा नहीं” – जो फिल्म पुष्पा का डायलॉग था। इस वजह से उन्हें ‘पुष्पा’ का टैग मिल गया।
उनके कार्यकर्ता क्षेत्र में विकास कार्यों के साथ-साथ कथित रूप से माफिया स्टाइल गतिविधियों में भी शामिल रहे। कट मनी, राशन घोटाला, भूमि विवाद और चुनावी हिंसा जैसे आरोप उन पर पहले भी लग चुके हैं। TMC ने हमेशा इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया, लेकिन अब नई सरकार (BJP के नेतृत्व वाली) इन मामलों में सख्ती दिखा रही है।
बंगाल की बदलती तस्वीर: TMC पर सख्ती, BJP का एक्शन
यह गिरफ्तारी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे बंगाल की राजनीति में बदलाव का प्रतीक मानी जा रही है। 2026 के विधानसभा चुनाव में BJP ने बड़ी जीत हासिल की और सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने। नई सरकार ने TMC के पुराने नेताओं पर एक के बाद एक कार्रवाई शुरू की है।
- कट मनी घोटालों में कई TMC नेता गिरफ्तार।
- चुनावी हिंसा के मामलों में SIT गठन।
- भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति।
TMC ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने कहा कि BJP सरकार पुराने हिसाब चुकता कर रही है। वहीं BJP का कहना है कि कानून का राज स्थापित हो रहा है। कोई भी गुंडा, भले ही वह पूर्व विधायक या उम्मीदवार क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है।
स्थानीय प्रभाव और जनता की प्रतिक्रिया
फलता के आम लोग इस घटनाक्रम से राहत महसूस कर रहे हैं। कई महिलाएं और युवा कहते हैं कि TMC के स्थानीय गुंडों के कारण वे डर के माहौल में जी रहे थे। री-पोलिंग के दौरान भी भारी सुरक्षा बल तैनात थे।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, “जहांगीर खान के नाम से ही लोग कांप जाते थे। अब उम्मीद है कि क्षेत्र में शांति आएगी और विकास कार्य होंगे।”
दूसरी तरफ TMC समर्थक इसे साजिश बता रहे हैं। वे कहते हैं कि जहांगीर खान विकास के लिए काम करते थे, इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया।
सियासी विश्लेषण: क्या है आगे का रास्ता?
यह घटना बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद की पहली बड़ी कार्रवाई नहीं है, लेकिन सबसे चर्चित जरूर है। जहांगीर खान जैसे प्रभावशाली नेताओं की गिरफ्तारी से TMC के अंदर असंतोष बढ़ सकता है। कई कार्यकर्ता पहले ही BJP की ओर रुख कर चुके हैं।
TMC को अब अपनी रणनीति बदलनी होगी। हिंसा और धमकी की पुरानी राजनीति अब काम नहीं कर रही। वहीं BJP सरकार को भी कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए विकास पर फोकस करना होगा, ताकि आरोप राजनीतिक प्रतिशोध का न लगे।
कलकत्ता हाईकोर्ट और चुनाव आयोग की भूमिका भी अहम रही। कोर्ट ने जहांगीर खान को अस्थायी राहत दी थी, लेकिन सबूतों के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की।
: लोकतंत्र की जीत या सियासी बदला?
फलता की घटना बंगाल के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। जहांगीर खान की गिरफ्तारी और उनके ऑफिस में तोड़फोड़ ने दिखा दिया कि पुरानी ताकतें अब कमजोर पड़ रही हैं।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि लोकतंत्र में कानून सबसे ऊपर है। चाहे कोई कितना भी ताकतवर क्यों न हो, गलत काम की सजा जरूर मिलती है। फलता के लोग अब शांतिपूर्ण माहौल की उम्मीद कर रहे हैं।
TMC और BJP दोनों को चाहिए कि वे आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर विकास की बात करें। बंगाल की जनता अब सड़क, बिजली, शिक्षा और रोजगार चाहती है – न कि रोज नई सियासी जंग।
जहांगीर खान की कहानी अभी खत्म नहीं हुई। कोर्ट में क्या होता है, यह देखना बाकी है। लेकिन एक बात साफ है – बंगाल बदल रहा है। और यह बदलाव तेजी से हो रहा है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 8 Jun 2026