मध्य पूर्व की जटिल भू-राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने दावा किया है कि इरान के साथ चल रहे युद्ध (ऑपरेशन रोरिंग लायन) के दौरान उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की गुप्त यात्रा की और वहां राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान (MBZ) से मुलाकात की। इस मुलाकात को इजरायल ने “इजरायल-UAE संबंधों में ऐतिहासिक प्रगति” बताया, जबकि UAE ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह घटना क्षेत्रीय सुरक्षा, इरान के बढ़ते प्रभाव और अब्राहम समझौतों के भविष्य पर नई बहस छेड़ रही है।
क्या हुआ था? तथ्यों का विश्लेषण
मई 2026 के मध्य में नेतन्याहू के कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा कि इरान के साथ युद्ध के दौरान प्रधानमंत्री ने UAE का गुप्त दौरा किया। सूत्रों के अनुसार, 26 मार्च 2026 को ओमान सीमा के पास स्थित अल-ऐन शहर में दोनों नेताओं के बीच कई घंटों तक बैठक हुई। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, इरान के बढ़ते प्रभाव और मध्य पूर्व की स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
इजरायली बयान में कहा गया कि इस मुलाकात से दोनों देशों के बीच संबंधों में नया मोड़ आया है। UAE ने इजरायल को आयरन डोम सिस्टम और संबंधित कर्मियों की तैनाती भी की थी, जो युद्ध के दौरान सहयोग का संकेत देती है।
हालांकि, UAE के विदेश मंत्रालय ने तुरंत इस दावे का खंडन किया। आधिकारिक बयान में कहा गया कि “ऐसी किसी गुप्त यात्रा या इजरायली सैन्य प्रतिनिधिमंडल के आने की खबरें पूरी तरह बेबुनियाद हैं।” UAE ने जोर देकर कहा कि उसके इजरायल के साथ संबंध “गुप्त व्यवस्थाओं” पर आधारित नहीं हैं।
यह विरोधाभास क्षेत्रीय कूटनीति की नाजुकता को दर्शाता है। UAE जैसे देश खुलकर इजरायल के साथ संबंध नहीं दिखाना चाहते, क्योंकि इससे अरब दुनिया और मुस्लिम समुदाय में नाराजगी बढ़ सकती है।
अब्राहम समझौतों का विस्तार
2020 में अब्राहम समझौतों (Abraham Accords) के तहत UAE ने इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। तब से दोनों देशों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान में भारी वृद्धि हुई है।
- व्यापार: दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार अरबों डॉलर तक पहुंच गया है।
- सुरक्षा सहयोग: इरान के खतरे के खिलाफ संयुक्त रणनीति बनाना दोनों के लिए प्राथमिकता है।
- प्रौद्योगिकी: इजरायली इनोवेशन और UAE की फाइनेंशियल पावर का संयोजन क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर रहा है।
नेतन्याहू की कथित यात्रा इसी सहयोग को और मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है, खासकर जब इरान ने UAE पर भी जवाबी हमले किए थे।
इरान का कोण और क्षेत्रीय असर
इरान ने इस पूरे मामले को “अक्षम्य” बताया और उन देशों को चेतावनी दी जो इजरायल के साथ “सांठगांठ” कर रहे हैं। तेहरान के लिए UAE-इजरायल निकटता एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इससे इरान की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं प्रभावित होती हैं।
मध्य पूर्व में शिया-सुन्नी विभाजन, प्रॉक्सी युद्ध और तेल की राजनीति के बीच UAE ने खुद को संतुलित लेकिन व्यावहारिक रणनीति अपनाई है। वह इरान के साथ तनाव कम करना चाहता है, लेकिन इजरायल के साथ सुरक्षा सहयोग भी नहीं छोड़ना चाहता।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?
1. क्षेत्रीय गठबंधन: यह घटना सऊदी अरब, बहरीन, मोरक्को जैसे अन्य देशों को भी प्रभावित कर सकती है, जो अब्राहम समझौतों में शामिल हो सकते हैं।
2. इजरायली घरेलू राजनीति: कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, नेतन्याहू ने यह जानकारी इसलिए सार्वजनिक की क्योंकि उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नफ्ताली बेनेट भी UAE जाने वाले थे। यह इजरायल की आंतरिक सत्ता की लड़ाई को भी उजागर करता है।
3. अमेरिकी भूमिका: ट्रंप प्रशासन के दौरान अब्राहम समझौते हुए थे। वर्तमान में भी अमेरिका इस गठबंधन को मजबूत करने में सक्रिय है।
4. मुस्लिम दुनिया की प्रतिक्रिया: कई मुस्लिम देश और संगठन इस सहयोग को “धोखा” मानते हैं, जबकि कुछ इसे व्यावहारिक जरूरत मानते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
यह विवाद दोनों देशों के संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है या फिर और मजबूत भी कर सकता है। UAE जैसे देश आर्थिक विकास, सुरक्षा और प्रौद्योगिकी के लिए इजरायल के साथ संबंध बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से दूरी बनाकर रखना भी जरूरी समझते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि भले ही UAE ने यात्रा से इनकार किया हो, लेकिन दोनों देशों के बीच खुफिया और सैन्य स्तर पर सहयोग जारी रहेगा। इरान का बढ़ता परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय अस्थिरता इस सहयोग को और प्रासंगिक बनाती है।
बदलते समीकरण
नेतन्याहू की गुप्त यात्रा की खबर मध्य पूर्व की राजनीति की सच्चाई को उजागर करती है — यहां हित सर्वोपरि हैं, भावनाएं गौण। इजरायल और UAE दोनों ही इरान को संतुलित करने, आर्थिक विकास सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि अंतरराष्ट्रीय संबंध हमेशा जटिल होते हैं। जहां एक तरफ खुली दोस्ती का प्रदर्शन होता है, वहीं दूसरी तरफ गुप्त कूटनीति भी चलती रहती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इजरायल-UAE संबंध कितने खुलकर सामने आते हैं और क्षेत्र की शक्ति संतुलन में क्या बदलाव आता है।
मध्य पूर्व कभी सरल नहीं रहा। यहां हर मुलाकात, हर समझौता और हर इनकार बड़े खेल का हिस्सा होता है। नेतन्याहू-UAE विवाद भी इसी बड़े खेल का एक अध्याय है, जिसके प्रभाव पूरे क्षेत्र और उससे आगे तक महसूस किए जाएंगे।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 2 Jun 2026