-Friday World Jul 15 2026
मध्य पूर्व का तनाव अब एक नई, भयावह दिशा में बढ़ रहा है। ईरान के बाद यमन ने भी दुनिया को चौंकाने वाली धमकी दी है। यमन ने साफ कहा है कि अगर सऊदी अरब यमन के इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले जारी रखता है, तो वह ‘बाब अल-मंडेब’ जलडमरूमध्य को बंद कर देगा। यह धमकी हॉर्मुज जलडमरूमध्य के संकट के बीच आई है, जहां पहले से ही जहाजों की आवाजाही प्रभावित है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह मार्ग बंद हुआ तो कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए तबाही का सबब बन जाएगा।
यमन की धमकी: बाब अल-मंडेब क्या है?
बाब अल-मंडेब (Bab-el-Mandeb) लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य है। यह स्वेज नहर का दक्षिणी प्रवेश द्वार है। यमन के अंसारुल्लाह (हूती) आंदोलन के राजनीतिक ब्यूरो सदस्य मोहम्मद अल-फराह ने कहा, “सऊदी अरब अगर यमन पर हमले नहीं रोकता तो हम हॉर्मुज की तरह बाब अल-मंडेब भी बंद कर देंगे।”
यह मार्ग वैश्विक शिपिंग का लगभग 10-12% हिस्सा संभालता है। यहां से रोजाना लाखों बैरल तेल, LNG और अन्य सामान गुजरता है। अगर यह बंद हुआ तो यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा।
हॉर्मुज और बाब अल-मंडेब: दो चोक पॉइंट्स
वर्तमान में अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पहले से ही अस्थिर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वहां से गुजरने वाले जहाजों पर 20% टैक्स लगाने की घोषणा की है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई की और कई जहाजों को निशाना बनाया। अब यमन की धमकी से दोनों महत्वपूर्ण मार्गों पर खतरा मंडरा रहा है।
हॉर्मुज से 20% वैश्विक तेल गुजरता है, जबकि बाब अल-मंडेब यूरोप और एशिया के बीच सबसे छोटा रास्ता प्रदान करता है। दोनों बंद होने पर तेल आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो सकती है।
तेल की कीमतें 200 डॉलर तक: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर दोनों जलडमरूमध्य प्रभावित हुए तो कच्चा तेल 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। वर्तमान में कीमतें 85 डॉलर के आसपास हैं। इतनी तेज बढ़ोतरी से:
- पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू लेंगी।
- मुद्रास्फीति बढ़ेगी।
- शेयर बाजारों में भारी गिरावट आएगी।
- विकासशील देशों में आर्थिक संकट गहराएगा।
भारत के लिए खतरा
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। हमारा 80-85% कच्चा तेल खाड़ी क्षेत्र से आता है। हॉर्मुज और बाब अल-मंडेब दोनों ही हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं।
- आयात प्रभावित: स्वेज नहर और इन जलडमरूमध्यों से गुजरने वाले जहाजों पर निर्भरता है।
- निर्यात प्रभावित: टेक्सटाइल, दवाएं, मशीनरी और बासमती चावल जैसे सामान यूरोप भेजे जाते हैं।
- महंगाई: पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ने से आम आदमी पर बोझ।
- रणनीतिक चिंता: भारत को वैकल्पिक मार्ग (केप ऑफ गुड होप) अपनाने पड़ सकते हैं, जो महंगे और समय लेने वाले हैं।
सरकार पहले से ही रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बढ़ा रही है और विविधीकरण पर जोर दे रही है।
यमन संकट की पृष्ठभूमि
यमन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। हूतियों ने लाल सागर में कई जहाजों पर हमले किए हैं। अब वे सऊदी हमलों के जवाब में बड़े कदम उठाने की तैयारी में हैं।
अमेरिका-ईरान युद्ध का प्रभाव
ट्रंप प्रशासन ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है। हॉर्मुज में नाकाबंदी और टैक्स की घोषणा ने स्थिति बिगाड़ दी। ईरान ने क्लस्टर मिसाइलों सहित जवाबी हमले किए। बहरीन जैसे देश भी प्रभावित हुए।
संभावित परिदृश्य
1. तनाव बढ़ना: यमन और ईरान मिलकर दोनों मार्ग बंद करें।
2. कूटनीतिक समाधान: सऊदी-यमन और अमेरिका-ईरान बातचीत शुरू करें।
3. आर्थिक युद्ध: तेल की कीमतों के जरिए दबाव।
यह संकट सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, वैश्विक है। भारत जैसे देशों को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है। विश्व समुदाय को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। शांति वार्ता और संयम ही एकमात्र रास्ता है।
शांति की कामना: हॉर्मुज और बाब अल-मंडेब दुनिया की धमनियां हैं। इन्हें बंद करने से कोई जीत नहीं होगी, सिर्फ आम लोगों का नुकसान होगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Jul 15 2026
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