-Friday World Jul 11 2026
मध्य पूर्व में तनाव की चिंगारियां भड़क रही हैं। इसराइल-ईरान संघर्ष, अमेरिकी हस्तक्षेप और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच गठबंधनों की होड़ के बीच एक अप्रत्याशित आवाज ने सुर्खियां बटोरी है—उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन। खबरों के अनुसार, किम ने अरब देशों से सीधा आग्रह किया है कि वे ईरान के साथ खड़े हों, अन्यथा भविष्य में उन्हें "ग्रेटर इज़राइल" के विस्तारवादी सपने का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि आज की निष्क्रियता कल उनकी जमीनें, संप्रभुता और भविष्य छीन सकती है।
यह बयान न केवल अपनी कड़ी भाषा के लिए चर्चित है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति में उत्तर कोरिया की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करता है।
एक जटिल संघर्ष
2026 के मध्य तक मध्य पूर्व में हालात बेहद तनावपूर्ण हो चुके हैं। ईरान पर अमेरिका-इसराइल के संयुक्त हमलों की रिपोर्ट्स ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रॉक्सी मिलिशिया समूहों (जैसे हिजबुल्लाह, हमास) के माध्यम से प्रभाव और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। इसराइल इन गतिविधियों को अपनी अस्तित्वगत सुरक्षा के लिए खतरा मानता है, जबकि ईरान इन्हें संप्रभु अधिकार और प्रतिरोध बताता है।
इसी बीच उत्तर कोरिया, जो खुद अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और परमाणु कार्यक्रम पर अडिग है, ईरान का समर्थन करने में सबसे आगे आ गया। किम जोंग उन का बयान इस समर्थन को नया आयाम देता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने अरब नेताओं से कहा: "आज अगर आप चुप रहे, तो कल ग्रेटर इज़राइल का दुःस्वप्न आपकी सीमाओं पर दस्तक देगा।"
"ग्रेटर इज़राइल" की अवधारणा ऐतिहासिक और विवादास्पद है। कुछ व्याख्याओं में इसे बाइबिलकालीन भूमि (नाइल से फरात नदी तक) के रूप में देखा जाता है, जिसमें कई अरब देशों के हिस्से शामिल हो सकते हैं। हालांकि मुख्यधारा के इसराइली राजनीति में यह आधिकारिक नीति नहीं है, लेकिन क्षेत्रीय संघर्षों में यह प्रचार का हथियार बन जाता है। किम ने इसी आशंका को भुनाते हुए अरब दुनिया को जागने का आह्वान किया।
किम का संदेश: रणनीति या प्रचार?
उत्तर कोरिया के आधिकारिक मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित इस बयान में किम ने स्पष्ट कहा कि अरब देशों की मौजूदा चुप्पी निष्पक्षता नहीं, बल्कि आत्मसमर्पण है। उन्होंने चेतावनी दी कि आज ईरान को अकेला छोड़ने का मतलब कल खुद की जमीनें गंवाना हो सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान उत्तर कोरिया की रणनीतिक महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। प्योंगयांग लंबे समय से ईरान के साथ तकनीकी और सैन्य सहयोग रखता रहा है—मिसाइल प्रौद्योगिकी, परमाणु विशेषज्ञता और प्रतिबंधों को दरकिनार करने के तरीके। दोनों देश अमेरिका के विरोधी खेमे में हैं और "साम्राज्यवाद विरोध" की साझा भाषा बोलते हैं।
किम का यह आह्वान अरब देशों (सऊदी अरब, यूएई, जॉर्डन, मिस्र आदि) के लिए चुनौती है। कई अरब राष्ट्र ईरान को क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी मानते हैं और अब्राहम समझौतों के तहत इसराइल के साथ सामान्यीकरण की राह पर हैं। फिर भी, फिलिस्तीनी मुद्दा और इसराइली कार्रवाइयों पर जनता का गुस्सा उन्हें संतुलन बनाए रखने को मजबूर करता है। किम की चेतावनी इसी संतुलन को चुनौती देती है।
ऐतिहासिक संदर्भ: उत्तर कोरिया और मध्य पूर्व
उत्तर कोरिया का मध्य पूर्व से संबंध नया नहीं है। 1970-80 के दशक में प्योंगयांग ने कई अरब और अफ्रीकी देशों को हथियार सप्लाई किए। ईरान-इराक युद्ध के दौरान दोनों पक्षों को समर्थन देने का आरोप लगा। आज भी उत्तर कोरिया ईरान को ballistic missile तकनीक मुहैया कराने का प्रमुख संदिग्ध है।
किम जोंग उन के शासन में यह समर्थन और मजबूत हुआ है। 2022-2025 के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरियाई हथियारों की भूमिका और ईरान के साथ बढ़ते संपर्क ने एक नया "एंटी-वेस्ट" ब्लॉक की चर्चा छेड़ दी है। रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया के बीच अनौपचारिक समन्वय बढ़ रहा है।
अरब देशों के लिए यह जटिल है। सऊदी अरब जैसे देश चीन के साथ आर्थिक संबंध और अमेरिका के साथ सुरक्षा साझेदारी दोनों बनाए रखना चाहते हैं। किम का बयान उन्हें "या तो-या फिर" की स्थिति में डालता है।
क्षेत्रीय प्रभाव और संभावित परिदृश्य
यदि अरब देश किम के आह्वान पर अमल करें, तो क्या होगा?
1. एंटी-इसराइल गठबंधन मजबूत होना: ईरान समर्थित मिलिशिया और अरब राज्यों के बीच समन्वय बढ़ सकता है, जो क्षेत्र को और अस्थिर करेगा।
2. तेल और ऊर्जा संकट: हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल कीमतें आसमान छू सकती हैं।
3. परमाणु प्रसार का खतरा: उत्तर कोरिया की परमाणु विशेषज्ञता ईरान तक और गहराई से पहुंच सकती है।
4. वैश्विक ध्रुवीकरण: अमेरिका-चीन राइवलरी में नया मोर्चा खुल सकता है।
दूसरी ओर, अरब देशों की निष्क्रियता या इसराइल के साथ गठबंधन जारी रखने पर किम की चेतावनी "प्रचार" साबित हो सकती है। कई विशेषज्ञ इसे उत्तर कोरिया की ध्यान आकर्षित करने की कोशिश मानते हैं, क्योंकि घरेलू अर्थव्यवस्था और भुखमरी की चुनौतियों के बीच किम को बाहरी दुश्मन दिखाकर जनता को एकजुट रखना पड़ता है।
ग्रेटर इज़राइल: की वास्तविकता?
"ग्रेटर इज़राइल" शब्द भावनाओं को भड़काने वाला है। कुछ साजिश सिद्धांतों में इसे इसराइल की विस्तारवादी नीति बताया जाता है, जिसमें वेस्ट बैंक, गाजा, लेबनान, सीरिया और आगे तक के क्षेत्र शामिल हैं। वास्तव में, आधुनिक इजरायल की नीतियां सुरक्षा, बस्ती विस्तार और क्षेत्रीय श्रेष्ठता पर केंद्रित हैं, लेकिन पूर्ण "ग्रेटर इज़राइल" कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं है।
फिर भी, गाजा युद्ध, वेस्ट बैंक की बस्तियां और लेबनान सीमा पर टकराव ने इस आशंका को हवा दी है। किम ने इसी भय को हथियार बनाया है। अरब जनता में इस बयान का असर पड़ सकता है, क्योंकि फिलिस्तीन मुद्दा अभी भी भावनात्मक है।
उत्तर कोरिया की घरेलू और वैश्विक स्थिति
किम जोंग उन का शासन केंद्रीकृत और व्यक्तिपरक है। परमाणु हथियार उनके शासन की रीढ़ हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद वे मिसाइल परीक्षण जारी रखते हैं। ईरान समर्थन से प्योंगयांग को हथियार बिक्री, तकनीकी आदान-प्रदान और कूटनीतिक समर्थन मिल सकता है।
हालांकि, उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था कमजोर है। भोजन की कमी, बुनियादी ढांचे की दयनीय स्थिति और COVID के बाद की चुनौतियां बरकरार हैं। बाहरी मोर्चे पर सक्रियता घरेलू ध्यान भटकाने का तरीका भी हो सकता है।
भविष्य की दिशा
किम की चेतावनी पर अरब देशों की प्रतिक्रिया निर्णायक होगी। यदि सऊदी अरब या यूएई जैसे देश ईरान के करीब आए, तो क्षेत्रीय गठबंधन बदल सकते हैं। वहीं, यदि वे अमेरिका-इसराइल के साथ बने रहे, तो उत्तर कोरिया-ईरान अक्ष और मजबूत होगा।
संयुक्त राष्ट्र और बड़े शक्तियों को इस तनाव को कम करने के लिए कदम उठाने चाहिए। कूटनीति, संवाद और समझौते ही स्थायी समाधान हो सकते हैं। युद्ध की राह केवल विनाश की ओर ले जाती है।
एक नया युग?
किम जोंग उन का बयान सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि बदलते विश्व व्यवस्था का संकेत है। जहां पारंपरिक शक्तियां कमजोर पड़ रही हैं, वहां नए खिलाड़ी (उत्तर कोरिया जैसे) अपनी जगह बना रहे हैं। अरब दुनिया को फैसला करना है—एकजुट होकर क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करें या बाहरी ताकतों के बीच पिसते रहें।
ग्रेटर इज़राइल का सपना या दुःस्वप्न, दोनों ही पक्षों के लिए खतरा है। शांति तभी संभव है जब सभी पक्ष संप्रभुता, सुरक्षा और समृद्धि के साझा हित को प्राथमिकता दें। फिलहाल, किम की आवाज ने बहस छेड़ दी है—अब समय है कि अरब दुनिया, ईरान और विश्व समुदाय इसका जवाब दें।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Jul 11 2026