- Friday World Jul 17 2026
मध्य पूर्व का युद्ध अब नया रूप ले चुका है। जब पूरी दुनिया सोच रही थी कि अमेरिका की आधुनिक तकनीक और वायुसेना ईरान को कुछ दिनों में झुका देगी, तब ईरान ने साबित कर दिया कि वह युद्ध का लंबा खेल खेलने में माहिर है। 1980 के दशक के ईरान-इराक युद्ध से लेकर आज के 2026 के संघर्ष तक, ईरान की रणनीति एक ही है – टिके रहना, थकाना और मौके का इंतजार करना।
ईरान-इराक युद्ध: सबक जो आज भी याद है
ईरान-इराक युद्ध (1980-1988) में सद्दाम हुसैन को इराक के साथ नाटो देशों, सोवियत संघ और अरब देशों का समर्थन प्राप्त था। फिर भी ईरान ने 8 साल तक युद्ध को खींचा। मानव तरंगों (human wave attacks), असममित युद्ध और घरेलू उत्पादन पर निर्भरता से ईरान ने इराक को नाकों चने चबवा दिए। लाखों मौतें हुईं, लेकिन ईरान पीछे नहीं हटा।
आज का परिदृश्य अलग है, लेकिन ईरान की मानसिकता वही है। **"हम लंबी दौड़ के धावक हैं"** – यह वाक्य ईरानी नेतृत्व बार-बार दोहराता है।
अमेरिका की नई स्ट्राइक्स और ईरान की जवाबी कार्रवाई
जुलाई 2026 में अमेरिका ने ईरान पर फिर से स्ट्राइक्स शुरू किए। इस बार हमले उत्तर तक पहुंचे। CENTCOM के अनुसार, ये हमले ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता, तटीय निगरानी और सैन्य लॉजिस्टिक्स को निशाना बना रहे हैं, खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन को सुरक्षित करने के नाम पर।
ईरान ने जवाब तेजी से दिया। उसने कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। जॉर्डन में अमेरिकी बेस होने के कारण वहां भी भयंकर हमले हुए। कुवैत में ईरान ने डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचाया। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने इन हमलों को "आक्रामक अमेरिकी सेना के ठिकानों" पर जवाबी कार्रवाई बताया।
अमेरिका की गलती: "ये इराक नहीं है"
अमेरिका इस बार पूरी तैयारी के साथ आया, लेकिन उसने एक बड़ी गलती की – उसने ईरान को इराक समझ लिया।
- इस्राइल का गोला-बारूद संकट: कुछ महीने पहले ही इस्राइल का स्टॉक खत्म होने की खबरें आई थीं। अमेरिका को इसे भरने में समय लग रहा है। इस कारण इस्राइल सीधे ईरान पर बड़े हमले करने से हिचक रहा है और मुख्यतः लेबनान फ्रंट पर फोकस कर रहा है।
- डिफेंस सिस्टम की उलटी दौड़: ईरान के हमलों के बाद अमेरिका को दक्षिण कोरिया से अपना एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम रातोंरात हटाना पड़ा। कोरियाई सरकार से पूछे बिना यह कदम उठाया गया, जिससे नॉर्थ कोरिया के हमले का खतरा बढ़ गया।
- सऊदी की बेचैनी: सऊदी अरब ने पाकिस्तान से जेट मंगवाए और दक्षिण कोरिया-ब्रिटेन से हथियारों के ऑर्डर दिए। अमेरिका पर निर्भरता घटाने की कोशिश साफ दिखी।
- लॉकहीड मार्टिन पर पाबंदी अमेरिकी सरकार ने अपनी प्रमुख डिफेंस कंपनी लॉकहीड मार्टिन को निर्देश दिया कि फिलहाल किसी विदेशी देश को पैट्रियट या अन्य सिस्टम न बेचे। पहले अमेरिकी जरूरत पूरी करो – यही संदेश था।
पाकिस्तान की भूमिका: दोहरी खेल?
ईरान ने पाकिस्तान को अमेरिकी पिट्ठू मानते हुए उस पर भरोसा कम किया। कुछ महीने पहले पाकिस्तान को आगे करके अमेरिका ने समय खरीदने की कोशिश की थी। ईरान ने आगे की बैठकें यूरोप में शिफ्ट कर दीं। यह ईरानी खुफिया तंत्र की समझदारी को दर्शाता है।
युद्ध की लंबी दौड़: क्या होने वाला है?
विश्लेषक मान रहे हैं कि यह युद्ध अब लंबा खिंच सकता है। कारण:
1. ईरान की असममित क्षमता: हूती, हिजबुल्लाह और अन्य प्रॉक्सी के जरिए ईरान क्षेत्रीय स्तर पर दबाव बनाए रख सकता है।
2. हॉर्मुज जलडमरूमध्य: विश्व के तेल व्यापार का 20% इससे गुजरता है। ईरान इसे बंद करने या फीस लगाने की धमकी दे चुका है।
3. आर्थिक थकान: अमेरिका के लिए लंबा युद्ध महंगा साबित हो सकता है। घरेलू राजनीति और चुनावी दबाव भी हैं।
4. ईरानी समाज: बाहरी हमलों के बावजूद ईरानी राष्ट्रवाद मजबूत है। लोग पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे।
रक्तपात की आशंका बढ़ गई है। दोनों पक्षों के पास आधुनिक हथियार हैं, लेकिन ईरान की भौगोलिक गहराई, सुरंगें और छिपी हुई क्षमताएं इसे लंबा खींचने में मदद करेंगी।
ईरान को हल्के में लेना घातक
ईरान आसानी से पीछे नहीं हटेगा। उसके पास:
- घरेलू मिसाइल और ड्रोन उत्पादन
- क्षेत्रीय सहयोगी नेटवर्क
- लंबे युद्ध का अनुभव
है। अमेरिका के पास तकनीकी श्रेष्ठता है, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति और क्षेत्रीय सहयोग की कमी एक बड़ी चुनौती है।
भविष्य की दिशा
यह युद्ध अब केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक, कूटनीतिक और प्रचार युद्ध भी बन चुका है। हॉर्मुज पर नियंत्रण, क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और परमाणु मुद्दा मुख्य बिंदु हैं।
ईरान ने साबित किया है कि वह "लंबी दौड़" का खिलाड़ी है। अमेरिका को अब गहरी रणनीति की जरूरत है, न कि सिर्फ हवाई हमलों की। युद्ध का परिणाम अनिश्चित है, लेकिन एक बात तय है – **मध्य पूर्व कभी पहले जैसा नहीं रहेगा।
शांति की कामना करते हुए, सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की जाती है। क्षेत्र में और खून बहने से दुनिया की अर्थव्यवस्था और मानवता दोनों को भारी नुकसान होगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Jul 17 2026
#IranLongWar
#HormuzCrisis
#IranVsUS2026
#MiddleEastShowdown
#IransResilience
#Fridayworld