-Friday World Jul 18 2026
दुनिया के नक्शे पर इजराइल खुद को लोकतंत्र, मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता का प्रतीक बताता रहा है। खासकर पश्चिमी देशों, विशेष रूप से अमेरिका में रहने वाले लाखों ईसाई इवेंजेलिकल (Evangelical) समुदाय के लिए इजराइल हमेशा से “परमेश्वर की भूमि” और बाइबिल की भविष्यवाणियों का जीवंत प्रमाण रहा। लेकिन हालिया घटनाक्रम और *वाशिंगटन पोस्ट* की विस्तृत रिपोर्ट इस समीकरण को तेजी से बदल रही है। इजराइल अब अपने सबसे मजबूत और भावनात्मक समर्थक वर्ग—अमेरिकी इवेंजेलिकल ईसाइयों—को खोने की कगार पर खड़ा दिखाई दे रहा है।
यह सिर्फ कुछ अलग-अलग घटनाओं की बात नहीं है। यह एक व्यवस्थित, बढ़ती हुई शत्रुता की कहानी है जो यरूशलेम के पुराने शहर से लेकर इजराइल के अन्य हिस्सों तक फैल रही है। पादरियों पर थूकना, चर्चों पर आपत्तिजनक नारे लिखना, शारीरिक हमले, पत्थरबाजी और धार्मिक प्रतीकों का अपमान—ये अब रोजमर्रा की घटनाएं बनती जा रही हैं।
रिपोर्ट क्या कहती है?
*वाशिंगटन पोस्ट* की जुलाई 2026 की रिपोर्ट “Jewish nationalists are attacking Christians in Israel” ने इस मुद्दे को वैश्विक पटल पर ला दिया। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इजराइली समाज के कुछ हिस्सों में ईसाइयों के प्रति बढ़ती शत्रुता अब छिपी नहीं रही। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये आरोप अब बाहरी संगठनों या फलस्तीनी समूहों के नहीं, बल्कि इजराइल की अपनी संस्थाओं की रिपोर्टों पर आधारित हैं।
Rossing Center for Education and Dialogue की 2025 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल और पूर्वी यरूशलेम में ईसाइयों के खिलाफ कुल 155 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें स्पिटिंग (थूक फेंकना), वंदलिज्म (तोड़-फोड़), अपमानजनक भाषा और शारीरिक हमले शामिल थे।
दूसरी ओर, Religious Freedom Data Center (RFDC) की निदेशक इजराइली यहूदी विद्वान Yisca Harani (यिशिका हारानी) की रिपोर्ट और भी ज्यादा चिंताजनक है। 2025 में उन्होंने 181 घटनाएं* दर्ज कीं। 2026 के पहले छह महीनों में ही यह आंकड़ा 88 से ऊपर पहुंच चुका है। यिशिका हारानी खुद इजराइली समाज की सदस्य हैं और ईसाई-यहूदी संवाद को बढ़ावा देने वाली हैं। उनकी रिपोर्ट को इजराइली संस्थानों द्वारा भी गंभीरता से लिया जा रहा है।
सबसे आम हमला: थूक फेंकना
रिपोर्ट के अनुसार, दर्ज कुल घटनाओं में लगभग **56 प्रतिशत** मामलों में **थूक फेंकना** सबसे आम तरीका रहा। यदि कोई व्यक्ति पादरी की पोशाक में हो या ईसाई पहचान वाला लगे तो अज्ञात युवा या उग्रवादी उसके चेहरे, वस्त्रों या रास्ते में थूक देते हैं। यरूशलेम के पुराने शहर (Old City) में यह घटना इतनी आम हो गई है कि कई पादरी अब अकेले घूमने से बचते हैं।
चर्च नेताओं ने इजराइली संसद (Knesset) के सामने गवाही देते हुए बताया कि पादरियों को लात मारना, थप्पड़ जड़ना और पत्थर फेंकना अब “नॉर्मल” होता जा रहा है। एक दक्षिणपंथी कार्यकर्ता ने तो थूक फेंकने को “प्राचीन यहूदी परंपरा” तक बता दिया, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया पैदा की।
इजराइली सरकार की भूमिका
सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन घटनाओं पर सरकार की प्रतिक्रिया बेहद नरम रही है। कई मामलों में हमलावरों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। Yisca Harani ने बार-बार कहा है कि अपराधियों को “पूर्ण प्रोत्साहन” मिल रहा है क्योंकि उन्हें पता है कि ऊपरी स्तर पर समर्थन है। कुछ उग्रवादी राजनीतिक दलों के नेताओं ने इन घटनाओं को हल्का बताने की कोशिश की, जिससे हमलावरों के हौसले और बढ़े।
इजराइल खुद को “ईसाइयों का सबसे बड़ा दोस्त” बताता है। पर्यटन, तीर्थयात्रा और सैन्य सहयोग के मामले में ईसाई समुदायों से गहरे संबंध हैं। लेकिन अगर वही ईसाई अब यरूशलेम की सड़कों पर असुरक्षित महसूस करने लगें तो यह इजराइल की वैश्विक छवि के लिए बड़ा झटका है।
अमेरिकी इवेंजेलिकल्स: इजराइल का सबसे बड़ा समर्थक वर्ग
अमेरिका में करीब 80-100 मिलियन से ज्यादा लोग खुद को इवेंजेलिकल ईसाई मानते हैं। इनमें से बड़ा हिस्सा “Christian Zionism” का समर्थक है। इनके लिए इजराइल की स्थापना बाइबिल की भविष्यवाणी का पूरा होना है। वे इजराइल को आर्थिक, राजनीतिक और सैन्य सहयोग देते हैं। अमेरिकी कांग्रेस में इनका प्रभाव बहुत बड़ा है।
लेकिन *वाशिंगटन पोस्ट* रिपोर्ट चेतावनी दे रही है—अगर ये घटनाएं अमेरिका के चर्चों, टेलीविजन शोओं और सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर पहुंचीं तो इजराइल का यह समर्थन आधार खिसक सकता है। पहले भी कुछ इवेंजेलिकल नेता इजराइल की नीतियों पर सवाल उठा चुके हैं, लेकिन अब धार्मिक भावनाएं भी घायल हो रही हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ और जड़ें
ईसाइयों के खिलाफ यह शत्रुता नई नहीं है। दशकों से यरूशलेम के पुराने शहर में कुछ उग्र-यहूदी समूहों द्वारा पादरियों पर थूकने की घटनाएं रिपोर्ट होती रही हैं। लेकिन 2023-2026 के बीच इनमें तेज वृद्धि देखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि:
- बढ़ता हुआ राष्ट्रवाद (Jewish nationalism)
- कुछ धार्मिक समूहों में “मिशनरी” ईसाइयों के प्रति अविश्वास
- राजनीतिक ध्रुवीकरण
- इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उग्र भाषण
इन सबने मिलकर माहौल को जहरीला बना दिया है।
फलस्तीनी ईसाई समुदाय लंबे समय से ऐसे भेदभाव की शिकायत करता रहा है। अब मुख्यधारा के ईसाई नेता भी उसी भाषा में बोल रहे हैं। यह इजराइल के लिए दोहरी चुनौती है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
Yisca Harani ने स्पष्ट कहा है कि कई पीड़ित पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि कोई कार्रवाई नहीं होगी। Rossing Center की रिपोर्ट भी इंगित करती है कि वास्तविक संख्या दर्ज मामलों से कहीं ज्यादा हो सकती है।
कई ईसाई समुदाय अब इजराइल आने वाले तीर्थयात्रियों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। कुछ चर्चों ने सुरक्षा बढ़ा दी है।
आगे क्या?
इजराइल सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा। सख्त कानून, जागरूकता अभियान, दोषियों पर कार्रवाई और ईसाई नेताओं के साथ संवाद जरूरी है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो:
1. अमेरिकी इवेंजेलिकल समर्थन कम होगा, जो राजनीतिक रूप से बहुत महंगा साबित हो सकता है।
2. इजराइल की “धार्मिक स्वतंत्रता” की छवि धूमिल होगी।
3. पर्यटन उद्योग को नुकसान पहुंचेगा (ईसाई तीर्थयात्री बड़ी संख्या में आते हैं)।
4. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलगाव बढ़ेगा।
दोस्ती का परीक्षण
इजराइल और ईसाई समुदाय के बीच संबंध सदियों पुराने हैं। यीशु मसीह खुद यहूदी थे। यरूशलेम दोनों के लिए पवित्र है। लेकिन आज जब ईसाई पादरी यरूशलेम की गलियों में डरते हुए चल रहे हैं तो यह सिर्फ सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि मूल्यों का प्रश्न है।
*वाशिंगटन पोस्ट* ने सही कहा—अगर इजराइल सच में ईसाइयों का दोस्त है तो उसे अपने घर में भी उन्हें सुरक्षित महसूस कराना होगा। अन्यथा, सबसे मजबूत समर्थक भी दूर जाते दिखाई देंगे।
यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले दिनों में अमेरिकी चर्चों, कांग्रेस और मीडिया में इस पर बहस तेज होगी। इजराइल के पास अभी समय है अपनी छवि सुधारने का, लेकिन घड़ी तेजी से चल रही है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Jul 18 2026
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