-Friday World Jul 30 2026
मिडिल ईस्ट में महीनों से सुलग रही ईरान और अमेरिका की जंग अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। अब तक जो टकराव फारस की खाड़ी तक सीमित था, वो अब भूमध्य सागर और मिस्र के सबसे अहम एनर्जी हब तक फैल गया है। बुधवार को मिस्र के रणनीतिक रूप से बेहद अहम डामिएटा पोर्ट पर खड़े एक अमेरिकी गैस टैंकर को निशाना बनाकर ड्रोन से हमला किया गया। हमले के बाद जोरदार धमाका हुआ और जहाज में भीषण आग लग गई।
क्या हुआ डामिएटा पोर्ट पर
ब्रिटेन की मरीन सिक्योरिटी कंपनी 'एम्ब्रे' के मुताबिक, निशाने पर अमेरिकी स्वामित्व वाला 'एनर्जोस विंटर' नाम का फ्लोटिंग स्टोरेज टैंकर था। धमाका इतना तेज था कि आग आसपास खड़े दूसरे LNG कैरियर 'गैसलाग सेलम' और एक टगबोट तक फैल गई। मिस्र के फायर फाइटर और तटीय सुरक्षा बलों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। राहत की बात ये रही कि जहाज पर मौजूद सभी नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया और इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।
ध्यान देने वाली बात ये है कि 'एनर्जोस विंटर' कोई आम टैंकर नहीं है। ये FSRU यानी Floating Storage and Regasification Unit है। इसकी LNG स्टोरेज क्षमता करीब 1,38,250 घन मीटर है। मिस्र के पेट्रोलियम मंत्रालय ने आग बुझने की पुष्टि की है, लेकिन ड्रोन हमले के आरोप पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
ट्रंप की चेतावनी: "अब हमारा वार होगा"
हमले के कुछ घंटों बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ईरान को सीधी चेतावनी दी। ट्रंप ने कहा, "अमेरिका ईरान पर बहुत जोरदार प्रहार करेगा। अब ईरान पर हमला करने की हमारी बारी है। वो जानते हैं कि ये आ रहा है।"
ट्रंप यहीं नहीं रुके। उन्होंने रूस पर प्रस्तावित प्रतिबंध बिल में ईरान पर भी भारी टैरिफ लगाने की वकालत की, ताकि कानून और सख्त हो सके। इस बयान के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
क्षेत्र में तनाव चरम पर
डामिएटा पर हमला ऐसे समय हुआ है जब मिडिल ईस्ट में चारों तरफ गोलाबारी और ड्रोन हमले बढ़ गए हैं। इस घटना से कुछ घंटे पहले ही अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित 'पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज' के ठिकानों पर संयुक्त एयरस्ट्राइक की थी।
वहीं ईरान ने भी जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य बेस पर बैलिस्टिक मिसाइल दागने का दावा किया है। ईरान ने होर्मुज की खाड़ी से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकी भी दोहराई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डामिएटा पोर्ट पर हमला इस बात का संकेत है कि अब ये जंग सिर्फ खाड़ी तक सीमित नहीं रही। भूमध्य सागर, लाल सागर और मिस्र जैसे देश भी अब सीधे इस संघर्ष की जद में आ गए हैं। डामिएटा मिस्र का सबसे बड़ा LNG निर्यात केंद्रों में से एक है। यहां पर हमले से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और गैस की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
आगे क्या
फिलहाल आग बुझा दी गई है, लेकिन सवाल ये है कि हमले के पीछे कौन था। किसी संगठन ने अभी तक जिम्मेदारी नहीं ली है। अमेरिका ने ईरान और उसके सहयोगी समूहों की तरफ इशारा किया है।
एक बात साफ है। ईरान-अमेरिका की ये जंग अब समंदर के रास्तों, एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर और तीसरे देशों तक पहुंच चुकी है। अगर आने वाले दिनों में इसी तरह टैंकरों और पोर्ट्स को निशाना बनाया गया, तो दुनिया को एक नए एनर्जी संकट के लिए तैयार रहना होगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Jul 30 2026