-Friday World 4 Jul 2026
तेहरान की सड़कें आज एक बार फिर इतिहास रच रही हैं। चार दशक तक ईरान की कमान संभालने वाले आयतुल्लाह अली खामेनेई की शहादत के बाद पहली बार देश उनकी अंतिम विदाई की तैयारी में जुटा है। फरवरी 2026 के उस घातक हमले के करीब चार महीने बाद, जब अमेरिका-इजरायल युद्ध ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया, अब ईरानी जनता और दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय उनके सम्मान में एकजुट हो रहे हैं। यह महज एक अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि एक युग के अंत और प्रतिरोध की नई कहानी की शुरुआत है।
शहादत का वो दिन: 28 फरवरी 2026
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के पहले दिन ही आयतुल्लाह अली खामेनेई इस दुनिया से चले गए। उनके साथ परिवार के कई सदस्य भी शहीद हुए, जिनमें बेटी बशरी खामेनेई, दामाद मुस्बाह-उल-हुदा बाकरी, बहू ज़हरा हद्दाद आदेल और पोती ज़हरा मोहम्मदी गोलपायगानी शामिल थीं। हमले में उनके आवास को निशाना बनाया गया, जिसने पूरे ईरानी नेतृत्व को झकझोर दिया।
उस समय युद्ध की आग इतनी तीव्र थी कि उनके शव को तुरंत दफनाने का जोखिम बहुत अधिक था। सुरक्षा चिंताओं, निरंतर हमलों और राजनीतिक अस्थिरता के कारण अंतिम रसुमात को टाल दिया गया। अब, जब युद्ध में एक नाजुक संघर्ष विराम है और अमेरिका का ध्यान 4 जुलाई के उत्सव पर है, ईरान ने इस ऐतिहासिक मौके को भव्य रूप से मनाने का फैसला किया है।
13 जुलाई 1405 (3-4 जुलाई 2026): तेह़रान में वियोग का आगाज
ग्रैंड मसल्ला-ए-इमाम खुमैनी, तेहरान के विशाल प्रार्थना परिसर में खामेनेई का ताबूत और उनके परिवार के सदस्यों के ताबूत रखे गए हैं। हजारों-लाखों लोग यहां पहुंच रहे हैं। महिलाएं काली चादरों में, पुरुष आंसू पोछते हुए, युवा "मुश्त-ए-गिरह-कुं" (मुट्ठी बंद) का नारा लगाते हुए श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। ईरानी राज्य मीडिया के अनुसार, विदेशी डेलिगेशनों की भारी भीड़ है – रूस, पाकिस्तान, चीन, इराक और कई अन्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
तेहरान की सड़कों पर विशाल बैनर लगे हैं – "खामेनेई शहीद-ए-इनकिलाब" (क्रांति के शहीद)। सुरक्षा बलों की भारी तैनाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 2.65 लाख सैनिक और सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। तेहरान के मेयर अलिरेजा जकानी ने अनुमान लगाया है कि राजधानी में 1.5 से 2 करोड़ लोग इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
यह दृश्य 1989 में आयतुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी की अंतिम यात्रा की याद दिलाता है, जब लाखों लोग सड़कों पर उमड़ पड़े थे। खामेनेई की रसुमात उससे भी बड़े पैमाने पर आयोजित की जा रही है, क्योंकि वे 36 वर्षों तक ईरान के सुप्रीम लीडर रहे और क्षेत्रीय प्रतिरोध की प्रतीक बन गए।
पूरा कार्यक्रम: तेहरान से मशहद तक, ईरान से इराक तक
ईरानी अधिकारियों ने 13 से 18 जुलाई 1405 (लगभग 4 से 9 जुलाई 2026) तक का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है:
- तेहरान (3-5 जुलाई): वियोग समारोह और विशाल जुलूस। सोमवार को इमाम हुसैन स्क्वायर से आजादी स्क्वायर तक 10 किलोमीटर लंबा प्रोसेसन निकाला जाएगा।
- क़ोम (5-6 जुलाई): धार्मिक केंद्र क़ोम में तशीअ-ए-जनाजा। यहां शिया विद्वानों और छात्रों की बड़ी संख्या में भागीदारी अपेक्षित है।
- इराक (7 जुलाई): शिया पवित्र स्थलों की यात्रा – बगदाद, काज़िमैन, नजफ और करबला। इमाम हुसैन (अ) की दरगाह में विशेष कार्यक्रम। यह इरान-इराक के गहरे धार्मिक संबंधों का प्रतीक है।
- मशहद (9 जुलाई): अंतिम तशीअ और दफन। खामेनेई का दफन इमाम रजा (अ) की हरम में होगा, जो उनके गृहनगर में है।
पूरे कार्यक्रम में "बरखास्त शवद" (उठ खड़ा हो) का नारा और मुट्ठी बंद प्रतीक को प्रमुखता दी गई है, जो प्रतिरोध और एकजुटता का संदेश देता है।
राजनीतिक और धार्मिक महत्व
यह आयोजन ईरान के लिए सिर्फ मातम नहीं, बल्कि अपनी मजबूती दिखाने का मौका भी है। युद्ध के बावजूद व्यवस्था टिकी हुई है। नये सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की भूमिका पर भी नजरें टिकी हैं, हालांकि सुरक्षा कारणों से उनकी भागीदारी सीमित रह सकती है।
दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ देशों के नेता व्यक्तिगत रूप से पहुंचे हैं, जबकि पश्चिमी मीडिया इसे "ईरान की प्रतिरोध की शक्ति" के रूप में देख रहा है। अल-जजीरा, न्यूयॉर्क टाइम्स, गार्डियन और बीबीसी जैसे मीडिया हाउस लगातार कवरेज दे रहे हैं।
ईरानी जनता के लिए खामेनेई "रहबर-ए-मुजाहिद" (मुजाहिद लीडर) थे। उन्होंने परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सहयोग (हिजबुल्लाह, हमास, हूती) और आर्थिक प्रतिबंधों के दौर में देश को संभाला। उनके समर्थक उन्हें न्यायप्रिय और सादगी पसंद नेता मानते हैं, जबकि आलोचक सख्त नीतियों का जिक्र करते हैं। लेकिन आज मातम के इन दिनों में एकता छाई हुई है।
ऐतिहासिक संदर्भ और तुलना
1989 में आयतुल्लाह खुमैनी की मौत के समय भी ईरान-इराक युद्ध की छाया थी। लाखों लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए थे। खामेनेई ने खुद उस विरासत को आगे बढ़ाया। अब उनकी विदाई भी उसी भव्यता के साथ हो रही है।
यह आयोजन शिया दुनिया के लिए करबला की याद ताजा करता है – शहादत, सब्र और प्रतिरोध की कहानी। करबला जाने का कार्यक्रम इसी भावना को मजबूत करता है।
चुनौतियां और सुरक्षा
युद्ध के बाद का माहौल संवेदनशील है। अमेरिकी और इजरायली खतरे बने हुए हैं। कुछ अमेरिकी आवाजें (जैसे लॉरा लूमर) ने भीड़ को "टारगेट रिच एनवायरनमेंट" बताया, जिसकी कड़ी आलोचना हुई। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लॉजिस्टिक्स की चुनौती भी बड़ी है – करोड़ों लोगों का प्रबंधन, ट्रैफिक, स्वास्थ्य सुविधाएं और विदेशी मेहमानों की सुरक्षा।
भविष्य की ओर
खामेनेई की विरासत ईरान की राजनीति, विदेश नीति और समाज पर गहरी छाप छोड़ गई है। उनके बाद नया नेतृत्व किस दिशा में जाएगा, यह देखना बाकी है। लेकिन इस अंतिम यात्रा से एक बात साफ है – ईरानी क्रांति की जड़ें गहरी हैं और जनता प्रतिरोध की राह पर अडिग है।
तेहरान की गलियों में आज जो आंसू बह रहे हैं, वे सिर्फ एक नेता के लिए नहीं, बल्कि एक विचारधारा, एक संघर्ष और एक सपने के लिए हैं।
"शहीद खामेनेई, तेरा मिशन जारी रहेगा" – यही नारा पूरे ईरान में गूंज रहा है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 4 Jul 2026