-Friday World Jul 20 2026
अल-अज़राक पर हमले से हिली पूरी खाड़ी
पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने दावा किया है कि उसकी वायुसेना ने जॉर्डन में स्थित अमेरिका के 'अल-अज़राक एयरबेस' पर शनिवार तड़के एक बड़ा मिसाइल और ड्रोन हमला किया। IRGC के अनुसार इस हमले में अमेरिकी फाइटर जेट्स के शेल्टर और एयरक्राफ्ट पार्किंग रैंप को निशाना बनाया गया।
ईरानी सरकारी मीडिया के हवाले से कहा गया कि हमले में कम से कम दो अमेरिकी लड़ाकू विमान पूरी तरह नष्ट हो गए और तीन अन्य को भारी नुकसान पहुंचा। IRGC ने यह भी कहा कि इस ऑपरेशन में F-16, F-35 और टैंकर विमानों को टारगेट किया गया।
अमेरिका और जॉर्डन की सरकारों ने अब तक इन बातो को छुपाए रखी लेकिन सोशल मिडिया ओर स्वतंत्र मीडिया ने अमेरिका-इजरायल के गोदी मिडिया की पोल खोलकर रख दी
जॉर्डन से अपील: "अपनी पवित्र भूमि से अमेरिकी सैनिकों को खदेड़ो"
हमले के साथ ही IRGC ने एक बयान जारी कर जॉर्डन की सेना और जनता से अपील की कि वे "आक्रामक और इस्लाम विरोधी अमेरिकियों" के हितों को निशाना बनाएं। बयान में कहा गया कि जॉर्डन की पवित्र भूमि पर तैनात अमेरिकी सैनिक वैध लक्ष्य हैं।
जॉर्डन की तरफ से प्रतिक्रिया में कहा गया कि वायु रक्षा प्रणालियों ने ईरान से आए कई मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया। जॉर्डन सरकार के प्रवक्ता ने X पर लिखा कि "राज्य की वायुसेना पूरी तरह अलर्ट पर है और किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार है"।
ये हमला अकेला नहीं: कुवैत, बहरीन भी निशाने पर
IRGC ने कहा कि अल-अज़राक के साथ-साथ कुवैत और बहरीन में भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।
- कुवैत: IRGC ने Camp Arifjan में अमेरिकी सैन्य सहायता केंद्र और Ali Al Salem एयरबेस पर रडार सुविधा को नष्ट करने का दावा किया। कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने माना कि "बार-बार हुए ईरानी हमलों" में उसके एक तेल संयंत्र को नुकसान पहुंचा।
- बहरीन: शेख ईसा एयरबेस जहां अमेरिकी लड़ाकू विमान तैनात हैं, और Batelco नामक इंटेलिजेंस डेटा सेंटर को निशाना बनाने की बात कही गई।
ईरान ने इसे "कुरान के आदेश" के तहत जवाबी कार्रवाई बताया: "जो तुम पर हमला करे, तुम भी उसी तरह हमला करो"।
पृष्ठभूमि: सीजफायर टूटने के बाद नया तूफान
यह ताजा टकराव फरवरी में शुरू हुए संघर्ष के बाद आया है। पिछले महीने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक सहमति बनी थी, लेकिन वो अब टूट चुकी है।
अमेरिका ने 17 जुलाई की रात ईरान के दक्षिणी हिस्सों में सैन्य और बुनियादी ढांचे पर लगातार सातवीं रात हमले किए थे। US CENTCOM ने कहा कि इन हमलों में निगरानी केंद्र, हथियार भंडार और समुद्री क्षमताओं को निशाना बनाया गया। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार पिछले तीन हफ्तों में अमेरिकी हमलों में 50 लोग मारे गए और 500 से ज्यादा घायल हुए।
इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में सभी अमेरिकी ठिकानों को अपनी मिसाइलों की रेंज में बताया।
क्षेत्रीय असर: तेल, हवाई सेवा और सुरक्षा अलर्ट
हमलों के बाद खाड़ी देशों में अलर्ट बढ़ गया है।
- कुवैत में एक पावर और वाटर डिसेलिनेशन प्लांट में आग लग गई और कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर संचालन निलंबित रहा।
- सऊदी अरब के अल-खार्ज और यानबू में चेतावनी सायरन बजे।
- बहरीन में ड्रोन इंटरसेप्शन के मलबे से घरों और गाड़ियों को नुकसान पहुंचा।
ईरान ने अपने दक्षिणी प्रांतों - होरमुजगान, बुशहर, खुजिस्तान और सिस्तान-बलूचिस्तान में 11वीं-12वीं की परीक्षाएं भी सुरक्षा कारणों से रद्द कर दीं।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
विश्लेषकों का मानना है कि अल-अज़राक एयरबेस पर हमला प्रतीकात्मक रूप से बहुत बड़ा है क्योंकि यह बेस अमेरिका के लिए पश्चिम एशिया में F-35, F-15 और F-16 जैसे विमानों के संचालन का अहम केंद्र है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने चेतावनी दी: "अगर आप सुरक्षित रहना चाहते हैं तो हमारे क्षेत्र से चले जाइए"।
आगे क्या?
1. कूटनीतिक दबाव: संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों पर चिंता जताई है।
2. सैन्य विकल्प: US ने कहा है कि उन्होंने "आत्मरक्षा में" हमले किए, जबकि IRGC ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने फिर हमला किया तो अन्य अमेरिकी बेस भी सुरक्षित नहीं रहेंगे।
3. आर्थिक झटका: होरमुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की लड़ाई से ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक महंगाई को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं।
अल-अज़राक पर दावा किया गया हमला अमेरिका-ईरान युद्ध को जॉर्डन तक ले आया है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि जमीनी नुकसान कितना हुआ, लेकिन बयानबाजी और हमलों की आवृत्ति से साफ है कि पूरा खाड़ी क्षेत्र अब युद्ध के दायरे में आ चुका है।
आने वाले 48 घंटे निर्णायक होंगे। क्या कूटनीति इस आग को बुझा पाएगी, या खाड़ी एक और बड़े संघर्ष की तरफ बढ़ रही है - यह दुनिया देख रही है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Jul 20 2026
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