-Friday World Jul 29 2026
इराक की धरती एक बार फिर खून से सनी है। इस बार निशाना वे जवान बने जो कानूनी तौर पर इराक की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं। सऊदी अरब और अमेरिका के कथित संयुक्त हमले में पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फोर्सेज़ यानी PMF के कई जवान शहीद हो गए।
यह घटना सिर्फ एक सैन्य टकराव नहीं है। यह इराक की संप्रभुता, उसके संविधान और उसकी संसद द्वारा लिए गए फैसलों पर हमला है।
PMF कौन है और कानूनी दर्जा क्या है
पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फोर्सेज़ को अक्सर बाहर की मीडिया में "मिलिशिया" कहकर पेश किया जाता है। लेकिन हकीकत अलग है।
2016 में इराकी संसद ने कानून पास करके PMF को इराकी सशस्त्र बलों का आधिकारिक हिस्सा घोषित किया। यह सीधे इराक के कमांडर इन चीफ यानी प्रधानमंत्री के अधीन काम करता है। इसका बजट, ट्रेनिंग और ऑपरेशन सब इराकी रक्षा ढांचे के तहत होते हैं।
ISIS के खिलाफ लड़ाई में PMF ने सबसे आगे रहकर कुर्बानी दी। मोसुल से लेकर फलूजा तक, हजारों PMF लड़ाकों ने अपनी जान देकर इराक को आतंक से बचाया। आज भी यह फोर्स इराक की सीमाओं, पवित्र स्थलों और आम नागरिकों की सुरक्षा में तैनात है।
इसलिए जब PMF के किसी जवान पर हमला होता है तो वह हमला किसी गैर-कानूनी समूह पर नहीं, बल्कि इराक की वर्दीधारी राष्ट्रीय सेना पर होता है।
हमले का संदर्भ और संप्रभुता का सवाल
इराकी धरती पर बिना बगदाद की इजाजत के कोई भी सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और इराक की संप्रभुता का उल्लंघन है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर भी यही कहता है कि किसी देश की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना हर राष्ट्र की जिम्मेदारी है।
जब हमले का निशाना PMF बनता है तो संदेश साफ है: इराक को अपने फैसले खुद लेने से रोका जा रहा है। इराक ने 2014 में आतंक के खिलाफ खुद खड़े होने का फैसला किया था। संसद ने PMF को मान्यता देकर यह तय किया कि इराक की सुरक्षा इराकी करेंगे।
बाहर से आकर इराकी सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाना, इसका मतलब है इराक की संसद, उसकी सरकार और उसके लोगों के फैसले को नकारना।
शहादत का मतलब
हर शहीद के पीछे एक परिवार है। एक मां है जिसने बेटे को देश के लिए भेजा। एक बच्चा है जो पिता की वर्दी देखकर बड़ा हुआ। PMF के जवान किसान, शिक्षक, इंजीनियर और मजदूरों के बेटे हैं। ISIS के खिलाफ युद्ध के बाद उन्होंने हथियार नहीं, बल्कि शांति को चुना। फिर भी जब देश को जरूरत पड़ी तो वे फिर सीमा पर खड़े हो गए।
शहादत सिर्फ आंकड़ा नहीं होती। यह उस इरादे की गवाही है जिसके साथ इराकी लोग अपना देश बनाना चाहते हैं: बिना बाहरी दखल के, बिना किसी की कठपुतली बने।
इराकी जनता और क्षेत्र की प्रतिक्रिया
हमले के बाद इराक के विभिन्न शहरों में शोक सभाएं हुईं। बगदाद, नजफ, कर्बला और बसरा में लोग सड़कों पर आए और शहीदों को श्रद्धांजलि दी। संसद के कई सदस्यों ने कहा कि इस हमले का जवाब कूटनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर दिया जाएगा।
क्षेत्र के विश्लेषक मानते हैं कि इराक को अस्थिर करने की कोशिशें नई नहीं हैं। लेकिन हर बार इराकी जनता ने एकजुट होकर इसका जवाब दिया है। PMF का गठन भी इसी एकजुटता का नतीजा था।
आगे का रास्ता
इराक आज पुनर्निर्माण के दौर में है। स्कूल बन रहे हैं, अस्पताल खुल रहे हैं, तेल के अलावा दूसरे उद्योगों पर काम हो रहा है। इस प्रगति को रोकने के लिए ही बाहरी ताकतें इराक की सुरक्षा व्यवस्था को निशाना बनाती हैं।
लेकिन इराक का संविधान और उसकी संसद मजबूत हैं। PMF का कानूनी दर्जा इस बात का सबूत है कि इराक अपने भविष्य के फैसले खुद लेगा। शहीदों का खून इस बात की गारंटी है कि इराकी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होगा।
अंत में एक बात साफ है। इराकी धरती पर इराकी सुरक्षा बलों की जान लेना कोई "आम हमला" नहीं कहा जा सकता। यह इराक के कानून, उसकी संसद और 4 करोड़ इराकियों की इच्छा पर हमला है।
आज पूरा इराक एक आवाज में कह रहा है: शहीदों को सलाम, संप्रभुता को सलाम।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Jul 29 2026
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