- Friday World Jul 29 2026
पश्चिम एशिया में हालात हर दिन नए मोड़ ले रहे हैं। गाजा में महीनों से जारी संघर्ष, होर्मुज स्ट्रेट में कार्गो जहाजों पर हमले और लाल सागर में बढ़ती अस्थिरता ने पूरी दुनिया के व्यापार और ऊर्जा सप्लाई चेन को हिला कर रख दिया है। ऐसे संवेदनशील समय में भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में अपना रुख बेहद साफ शब्दों में रखा।
भारत का संदेश एक लाइन में था - तत्काल हमले बंद करो'।
1. नागरिकों की सुरक्षा: भारत की पहली प्राथमिकता
UNSC में भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर वाणिज्यिक जहाजों और आम नागरिकों को निशाना बनाना किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इस बात के पीछे ठोस वजह भी है। पिछले कुछ हफ्तों में होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे जहाजों पर हुए हमलों में 1 भारतीय नागरिक की मौत हो गई, कई घायल हुए और 1 भारतीय अभी भी लापता है। खाड़ी देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय रहते हैं और काम करते हैं। ये लोग डॉक्टर, इंजीनियर, मजदूर और कारोबारी हैं जिनकी मेहनत से भारत को हर साल अरबों डॉलर का रेमिटेंस मिलता है।
भारत ने दुनिया के सामने स्पष्ट किया कि अपने नागरिकों की जान-माल की रक्षा उसके लिए सर्वोच्च है। संकट के समय में भारतीय दूतावास लगातार लोगों के संपर्क में हैं और सुरक्षित निकासी के लिए तैयार हैं।
2. ऊर्जा और व्यापार की रीढ़ है पश्चिम एशिया
भारत के लिए पश्चिम एशिया सिर्फ भू-राजनीति का मुद्दा नहीं है, ये हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
आंकड़े खुद बोलते हैं:
- 180 अरब डॉलर: पश्चिम एशिया के साथ भारत का सालाना कुल व्यापार
- 31 अरब डॉलर से ज्यादा: इस क्षेत्र से भारत में आने वाला सीधा विदेशी निवेश यानी FDI
- 52 अरब डॉलर से ज्यादा: हर साल भारत आने वाला रेमिटेंस
भारत का 60% से ज्यादा कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है। अगर होर्मुज स्ट्रेट या लाल सागर असुरक्षित हो गए तो तेल की कीमतें बढ़ेंगी, शिपिंग का खर्च बढ़ेगा और इसका सीधा असर भारत में महंगाई पर पड़ेगा। इसलिए भारत के लिए इस इलाके में शांति बनाए रखना जरूरी है।
3. UNSC में भारत ने किन हमलों की निंदा की
भारत ने सुरक्षा परिषद में हाल में हुए कई हमलों का जिक्र करते हुए कड़ी निंदा की। इनमें GFSL Galaxy, MT Al Bahia और MT Mombasa जैसे वाणिज्यिक जहाज शामिल हैं। भारत ने कहा कि ये हमले न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं बल्कि वैश्विक खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं।
साथ ही भारत ने यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में शिपिंग लाइनों पर किए जा रहे हमलों की भी आलोचना की। भारत का मानना है कि किसी भी राजनीतिक मतभेद को सुलझाने के लिए आम नागरिकों और व्यापार को मोहरा नहीं बनाया जा सकता।
4. गाजा पर भारत का स्टैंड: मानवता पहले
गाजा में चल रहे भीषण मानवीय संकट पर भारत ने गहरी चिंता जताई। हजारों मासूमों की मौत, अस्पतालों और स्कूलों पर हमले और जरूरी सामान की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
UNSC में भारत ने दोहराया कि वह फिलिस्तीन के मुद्दे पर "दो-राष्ट्र समाधान" का समर्थन करता है। इसका मतलब है - इजराइल और एक स्वतंत्र, व्यवहारिक फिलिस्तीन राज्य, दोनों शांति से साथ रहें। भारत का मानना है कि बातचीत और कूटनीति से ही इस दशकों पुराने संघर्ष का स्थायी हल निकल सकता है।
5. भारत का बड़ा संदेश दुनिया के लिए
UNSC में भारत की 3 मुख्य बातें थीं:
पहली: समुद्री मार्ग सबके हैं। किसी एक देश या समूह को इन्हें बंद करने या धमकाने का अधिकार नहीं है। ये अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
दूसरी: आतंकवाद और उग्रवाद को किसी भी रूप में जायज नहीं ठहराया जा सकता। नागरिक ठिकानों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना कायरता है।
तीसरी: संवाद ही रास्ता है। चाहे गाजा हो या होर्मुज, सभी पक्षों को तुरंत तनाव कम करना होगा और शांति की मेज पर लौटना होगा।
आगे क्या?
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत का ये बयान संतुलित लेकिन मजबूत है। एक तरफ भारत अपने नागरिकों और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आवाज उठा रहा है, तो दूसरी तरफ वो शांति और कूटनीति का रास्ता भी दिखा रहा है।
जैसे-जैसे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है, भारत की भूमिका और अहम हो जाती है। दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और 1.4 अरब लोगों का देश होने के नाते भारत से उम्मीद की जाती है कि वो ग्लोबल साउथ की आवाज बने और शांति के लिए पुल का काम करे।
फिलहाल UNSC में भारत का संदेश साफ है - जंग नहीं, बातचीत। हमले नहीं, मानवता। और सबसे जरूरी - अपने लोगों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Jul 29 2026
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