-Friday World 15 Aug 2026
चंडीगढ़ में 15 अगस्त 2026 को आजादी के दिन एक बड़ा और तनावपूर्ण प्रदर्शन देखने को मिला। कौमी इंसाफ मोर्चा (Qaumi Insaf Morcha) के आह्वान पर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सिख कैदियों (बंदी सिंहों) की रिहाई की मांग को लेकर पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के आवास की ओर मार्च करने की कोशिश की। चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड्स हटाने और आगे बढ़ने का प्रयास किया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोले दागे। कुछ रिपोर्ट्स में ड्रोन से भी आंसू गैस के गोले गिराए जाने की बात कही गई है। इस घटना के तुरंत बाद संगठन ने 21 अगस्त को पूरे पंजाब में ‘पंजाब बंद’ का ऐलान कर दिया है।
प्रदर्शन का मुख्य मकसद उन सिख कैदियों की रिहाई था, जिनके बारे में मोर्चा का दावा है कि उन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है या लंबे समय से जेल में बंद हैं, फिर भी उन्हें रिहा नहीं किया जा रहा। इनमें जगतार सिंह हवारा (जिनके लिए पैरोल की भी मांग की गई), बलवंत सिंह राजोआना, देविंदरपाल सिंह भुल्लर सहित कई नाम शामिल हैं। मोर्चा 7 जनवरी 2023 से चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर के पास धरना दे रहा है और अब यह आंदोलन व्यापक समर्थन हासिल कर रहा है।
शनिवार सुबह से ही चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई थी। सभी बॉर्डर पॉइंट्स सील कर दिए गए, कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई और कांटेदार तार लगाए गए। दंगा-रोधी वाहन, रैपिड एक्शन फोर्स और बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। प्रदर्शनकारियों ने YPS चौक से आगे बढ़ने की कोशिश की और कुछ जगहों पर ट्रैक्टर की मदद से बैरिकेड्स हटाने का प्रयास किया। इसके जवाब में पुलिस ने बल प्रयोग किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से राज्यपाल आवास तक पहुंचकर अपनी मांग रखना चाहते थे। वहीं पुलिस का रुख रहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और किसी भी अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की खबरें भी आईं। शि रोमणि अकाली दल (अमृतसर) के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान को भी हिरासत में लिया गया।
यह मुद्दा नया नहीं है। 1980 और 1990 के दशक के मामलों में सजा काट रहे कई कैदियों की रिहाई को लेकर लंबे समय से आवाजें उठ रही हैं। मोर्चा मानवीय और कानूनी आधार पर रिहाई की मांग कर रहा है। समर्थक कहते हैं कि कई कैदी दशकों से जेल में हैं और उनकी उम्र बढ़ चुकी है। वहीं प्रशासन सुरक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं का हवाला देता रहा है।
15 अगस्त का प्रदर्शन आजादी के दिन होने के कारण और भी संवेदनशील बन गया। चंडीगढ़ जैसे शहर में इस तरह के प्रदर्शन सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती पैदा करते हैं। पुलिस की तैयारी पहले से ही दिख रही थी, फिर भी कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड तोड़ने की कोशिश ने स्थिति को बिगाड़ दिया।
प्रदर्शन के बाद कौमी इंसाफ मोर्चा ने 21 अगस्त को पंजाब बंद का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। बंद के दौरान आम जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है। बाजार, परिवहन और दैनिक गतिविधियां बाधित हो सकती हैं। प्रशासन से सतर्क रहने की अपील की जा रही है।
यह आंदोलन अब सिर्फ एक संगठन तक सीमित नहीं रह गया है। विभिन्न पंथिक संगठनों और कुछ राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिल रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग कैदियों की रिहाई का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ सुरक्षा चिंताओं को रेखांकित कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में 21 अगस्त का बंद कितना प्रभावी होता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। अगर बंद सफल होता है तो यह आंदोलन को नई ताकत दे सकता है। वहीं प्रशासन की कड़ी कार्रवाई तनाव बढ़ा सकती है। दोनों पक्षों के बीच संवाद की जरूरत महसूस की जा रही है ताकि मुद्दे का स्थायी समाधान निकल सके।
कौमी इंसाफ मोर्चा द्वारा मांग की जा रही सूची में शामिल कैदियों के मामलों की समीक्षा लंबे समय से की जा रही है। संगठन का आरोप है कि कुछ कैदी दशकों से जेल में हैं। मानवीय आधार पर रिहाई की अपील भी की जाती रही है। कानूनी विशेषज्ञ कहते हैं कि प्रत्येक मामले में अदालती प्रक्रिया और सरकार के फैसले मायने रखते हैं।
चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर शनिवार को देखी गई सुरक्षा व्यवस्था से साफ था कि प्रशासन इस प्रदर्शन को लेकर गंभीर था। कई परतों में बैरिकेडिंग, कांटेदार तार, दंगा-रोधी वाहन और बड़ी संख्या में जवान तैनात किए गए थे। इसके बावजूद कुछ प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके चलते पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।
यह घटनाक्रम याद दिलाता है कि पंजाब और चंडीगढ़ में पुराने मुद्दे अभी भी जीवित हैं। समय के साथ नई पीढ़ियां भी इन मुद्दों से जुड़ रही हैं। साथ ही सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क बनी हुई हैं।
21 अगस्त को होने वाले बंद के मद्देनजर पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन दोनों को तैयार रहना होगा। आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। यातायात, बाजार और दैनिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, 15 अगस्त का प्रदर्शन पंजाब की संवेदनशील राजनीति और लंबे समय से चले आ रहे इस मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। अब देखना यह है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कोई संवाद होता है या स्थिति और बिगड़ती है। शांतिपूर्ण समाधान ही दोनों पक्षों और आम जनता के हित में होगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 15 Aug 2026
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