- Friday World 31 Aug 2026
14 महीने, 7 IPS और अब एक चर्चित IAS का इस्तीफा। उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को भारतीय प्रशासनिक सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है। इस एक इस्तीफे ने फिर से वही सवाल खड़ा कर दिया है जो पिछले एक साल से ब्यूरोक्रेसी के गलियारों में गूंज रहा है - देश की सबसे पावरफुल मानी जाने वाली नौकरी से नई पीढ़ी का मोहभंग क्यों हो रहा है?
कौन हैं दिव्या मित्तल? एक कहानी जो फिल्मों से कम नहीं
दिव्या मित्तल का सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं। हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली दिव्या ने IIT दिल्ली से http://B.Tech और IIM बेंगलोर से MBA किया। इसके बाद लंदन में JPMorgan जैसी कंपनी में करोड़ों के पैकेज पर नौकरी। सब कुछ था, पर दिल में कुछ खाली था।
खुद अपने इस्तीफे वाले पोस्ट में उन्होंने लिखा, "सब कुछ पा लेने पर भी कुछ अधूरा लग रहा था। मैं अपने देश में नहीं हूं, ये बात खल रही थी। मेरी पढ़ाई, मेरा आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की हिम्मत - ये सब इस देश की देन है, इसे लौटाना है।"
इसी कर्ज को लौटाने के लिए वे भारत लौटीं और UPSC क्रैक कर IAS बनीं।
उनका सबसे चर्चित कार्यकाल मिर्जापुर में रहा। 2022-23 में डीएम रहते हुए उन्होंने लहुरियादह गांव में वो कर दिखाया जो 75 साल में कोई नहीं कर पाया था। पहाड़ों के बीच बसे इस गांव में पहली बार नल से जल पहुंचा। 125 परिवारों की जिंदगी बदल गई। इस काम के लिए वे हीरो बन गईं, लेकिन इसके बाद विवाद भी शुरू हुआ। 'जल पूजन' कार्यक्रम में स्थानीय विधायक-सांसद को न बुलाने पर सियासी शिकायत हुई और 1 सितंबर 2023 को उनका तबादला कर उन्हें वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया।
देवरिया में उन्होंने सिखाया कि "सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है।" और मिर्जापुर ने सिखाया कि "असंभव एक तथ्य नहीं, बल्कि एक राय है।"
14 महीने में 7 युवा IPS भी छोड़ चुके हैं वर्दी
दिव्या मित्तल अकेली नहीं हैं। पिछले 14 महीनों में देशभर से 7 युवा IPS अधिकारियों (40 साल से कम उम्र) ने भी इस्तीफा दिया है:
1. बिहार - सबसे ज्यादा चर्चा में:
- काम्या मिश्रा (2019 बैच): बिहार की सबसे युवा IPS मानी जाती थीं। इस्तीफे के बाद उनके राजनीति में आने की चर्चा तेज है।
- नुरुल होदा: वक्फ बोर्ड बिल के विरोध में वैचारिक कारणों से नौकरी छोड़ने की बात सामने आई।
2. ओडिशा:
- जगमोहन मीणा (37 साल): भुवनेश्वर में DCP के पद पर तैनात थे, हाल ही में इस्तीफा सौंपा।
3. अन्य राज्य:
- अभिषेक तिवारी (मध्य प्रदेश): साइबर सिक्योरिटी में अपना बिजनेस शुरू करने के लिए।
- सिद्धार्थ कौशल (आंध्र प्रदेश): रिलायंस जैसे बड़े कॉर्पोरेट में 3 गुना सैलरी पर गए।
- लोकेश्वर सिंह (उत्तराखंड): संयुक्त राष्ट्र (UN) में अंतरराष्ट्रीय अवसर के लिए देश छोड़ा।
सबसे ज्यादा इस्तीफे किस राज्य में?
DoPT और संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक, ऐसा नहीं है कि किसी एक राज्य में इस्तीफों की बाढ़ आई हो। उत्तर प्रदेश में IAS के सबसे ज्यादा 652 स्वीकृत पद हैं, इसलिए वहां का हर मामला नेशनल न्यूज बन जाता है। बिहार, ओडिशा, एमपी, आंध्र और उत्तराखंड के केस भी हाई-प्रोफाइल होने के कारण चर्चा में हैं। सरकार राज्य-वार इस्तीफों का अलग डेटा पब्लिश नहीं करती।
आखिर क्यों छोड़ रहे हैं अफसर करोड़ों की नौकरी? 3 बड़े कारण
1. राजनीतिक महत्वाकांक्षा और वैचारिक टकराव: नई पीढ़ी के अफसर अब सिर्फ फाइलों में साइन नहीं करना चाहते। वे खुलकर अपना पक्ष रखते हैं। जब सिस्टम से वैचारिक टकराव होता है या राजनीति में बड़ा बदलाव करने का जुनून होता है, तो वे वर्दी उतार देते हैं।
2. कॉर्पोरेट और ग्लोबल पैकेज का आकर्षण: IIT-IIM से पढ़े इन अफसरों के लिए प्राइवेट सेक्टर में 3 से 5 गुना सैलरी आम बात है। IPS का साइबर एक्सपर्ट आसानी से 2-3 करोड़ के पैकेज पर जाता है। IAS को पॉलिसी मेकर के तौर पर UN, World Bank में जगह मिलती है।
3. पर्सनल फ्रीडम और नया इम्पैक्ट: दिव्या मित्तल ने साफ कहा है कि उन्होंने अभी भविष्य का फैसला नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक वे लेखन, सामाजिक कार्य और शिक्षा के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं। नई पीढ़ी के लिए 'DM की लाल बत्ती' से ज्यादा 'खुद की पहचान' जरूरी हो गई है। वे बंधे हुए स्ट्रक्चर में पूरी जिंदगी नहीं बिताना चाहते।
क्या वाकई ब्यूरोक्रेसी में भगदड़ है? आंकड़े क्या कहते हैं
सोशल मीडिया पर इसे "बाबुओं की भगदड़" कहा जा रहा है, लेकिन सच्चाई अलग है। संसदीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले 30 सालों में IAS, IPS और IFS तीनों सेवाओं को मिलाकर कुल 300 अधिकारियों ने ही इस्तीफा या VRS लिया है। यह कुल स्ट्रेंथ का 1% से भी कम है।
असली इस्तीफा तो IRS (Indian Revenue Service) में हो रहा है। 2014 से 2024 के बीच 853 IRS अफसरों ने नौकरी छोड़ी, क्योंकि CA और फाइनेंस की दुनिया में उन्हें तुरंत बड़ी नौकरी मिल जाती है।
तो हकीकत ये है कि IAS-IPS में सामूहिक इस्तीफा जैसा कुछ नहीं है। बदलाव सिर्फ इतना है कि अब जो जा रहे हैं, वो युवा हैं, टैलेंटेड हैं, और सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हैं, इसलिए हर इस्तीफा बड़ी खबर बन जाता है।
आज का युवा अफसर पूछ रहा है - क्या देश सेवा सिर्फ कलेक्ट्रेट से ही हो सकती है? दिव्या मित्तल का जवाब है - नहीं। सपने अब कुर्सी से बड़े हो गए हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 31 Aug 2026
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