Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Saturday, 22 August 2026

पत्थर में सांस लेती सुंदरता: बेलूर की मदनिका, 900 साल पुरानी जीवंत कला

पत्थर में सांस लेती सुंदरता: बेलूर की मदनिका, 900 साल पुरानी जीवंत कला
- Friday World 22 Aug 2026
कर्नाटक के हासन जिले में बेलूर नामक ऐतिहासिक नगर यगची नदी के किनारे बसा है। यहां खड़ा चेन्नाकेशव मंदिर (Chennakesava Temple) सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि भारतीय शिल्पकला का एक जीवंत संग्रहालय है। 12वीं शताब्दी के होयसल साम्राज्य की इस अद्भुत कृति को देखकर लगता है मानो समय ठहर गया हो और पत्थरों ने खुद कहानी कहनी शुरू कर दी हो।

तस्वीर में दिख रही यह भव्य प्रतिमा ‘मदनिका’ या ‘सालभंजिका’ कहलाती है। ये ब्रैकेट फिगर्स मंदिर के स्तंभों और दीवारों पर अंकित हैं। मूल रूप से लगभग 40 ऐसी आकृतियां थीं, जिनमें से आज भी 38 मौजूद हैं। हर मदनिका किसी न किसी मुद्रा में खड़ी है—नाचती हुई, संगीत बजाती हुई, तोते से बात करती हुई या आभूषण संवारती हुई। इनकी मुद्राएं नाट्यशास्त्र की अभिनय मुद्राओं से प्रेरित लगती हैं।

होयसल शिल्पकारों ने सोपस्टोन (Soapstone या क्लोराइटिक शिस्ट) का चुनाव किया। यह पत्थर खदान से निकलने के समय नरम होता है, लगभग मोम जैसा। इसी वजह से कारीगरों ने गहनों की एक-एक लड़ी, सिर के केश-गुच्छे, अंगुलियों की सूक्ष्म भंगिमा, नाभि की रेखा और चेहरे के भाव इतनी गहराई से उकेरे कि आज भी देखने वाले दंग रह जाते हैं। हवा के संपर्क में आने के बाद यह पत्थर कठोर हो जाता है, इसलिए सदियों बाद भी नक्काशी सुरक्षित है।

राजा विष्णुवर्धन ने 1117 ईस्वी में इस मंदिर का निर्माण शुरू करवाया था। कुछ इतिहासकारों के अनुसार यह उनके चोलों पर विजय और वैष्णव धर्म अपनाने का प्रतीक था। मंदिर को पूरा होने में लगभग 103 वर्ष और तीन पीढ़ियों का समय लगा। मुख्य देवता चेन्नाकेशव (सुंदर केशव) यानी भगवान विष्णु हैं। मंदिर का स्थापत्य होयसल शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है—स्टार शेप्ड प्लेटफॉर्म, जटिल फ्रिज, हाथी-घोड़े की पंक्तियां, रामायण-महाभारत के दृश्य और सैकड़ों देव-देवियों की मूर्तियां।

मदनिका प्रतिमाओं की सबसे बड़ी विशेषता उनकी जीवंतता है। गहनों की लटकन हवा में झूमती नजर आती हैं, कपड़ों की तहें वास्तविक लगती हैं और चेहरे पर एक हल्की मुस्कान या गंभीर भाव दर्शकों को बांध लेता है। एक हाथ ऊपर उठाए, दूसरे से वस्त्र संभाले या आभूषण धारण किए—हर आकृति में गति और सौंदर्य का अद्भुत संतुलन है। इन मूर्तियों को देखकर लगता है कि शिल्पी ने पत्थर में प्राण फूंक दिए हों।

आज भी चेन्नाकेशव मंदिर कला प्रेमियों, इतिहासकारों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यूनेस्को से जुड़े होयसल मंदिर समूह का यह महत्वपूर्ण हिस्सा भारतीय संस्कृति की निरंतरता का प्रमाण है। 900 साल बीत गए, राजा बदल गए, साम्राज्य समाप्त हो गए, लेकिन ये पत्थर की नायिकाएं आज भी उसी अनुग्रह और गरिमा के साथ खड़ी हैं।

यह कला हमें याद दिलाती है कि सच्ची सुंदरता समय से परे होती है। जब कोई कारीगर पूरी श्रद्धा और कुशलता से काम करता है, तो उसकी कृति सदियों बाद भी लोगों के दिलों को छूती रहती है। बेलूर की मदनिकाएं सिर्फ मूर्तियां नहीं, बल्कि भारतीय शिल्प परंपरा की जीवित विरासत हैं—जो पत्थरों में कैद होकर भी स्वतंत्र और प्रेरणादायक बनी हुई हैं।

अगली बार जब आप कर्नाटक की यात्रा करें, तो बेलूर जरूर जाएं। वहां खड़े होकर इन मूर्तियों को ध्यान से देखें। शायद आपको भी लगे कि पत्थर में सांस चल रही है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 22 Aug 2026

#ChennakesavaTemple #Belur #HoysalaArchitecture #Madanika #Salabhanjika #IndianHeritage #SoapstoneSculpture #KarnatakaTourism #AncientArt #TempleArchitecture