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Friday, 7 August 2026

योगी के गढ़ गोरखपुर में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का सख्त रुख: यूनिवर्सिटी होस्टल की बुनियादी खामियों पर खोली पोल, तीन महीने में सुधार का अल्टीमेटम

योगी के गढ़ गोरखपुर में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का सख्त रुख: यूनिवर्सिटी होस्टल की बुनियादी खामियों पर खोली पोल, तीन महीने में सुधार का अल्टीमेटम
-Friday World 7 Aug 2026
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह नगर गोरखपुर में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 45वें दीक्षांत समारोह ने सिर्फ डिग्री वितरण का मंच नहीं बनाया, बल्कि राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के मुंह से निकले सख्त शब्दों ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया। औपचारिक भाषणों और मेडल वितरण के बीच राज्यपाल ने एक मां की तरह विद्यार्थियों की चिंता जताते हुए विश्वविद्यालय के छात्रावासों, भोजन व्यवस्था, स्वच्छता, बिजली-पानी और युवाओं में बढ़ते नशे की समस्या पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने साफ कहा कि अगर मुख्यमंत्री के अपने शहर में ऐसी खामियां हैं, तो बाकी जगहों की क्या हालत होगी।

दीक्षांत समारोह में उपस्थित हजारों विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और अधिकारियों के सामने राज्यपाल ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि कमियों को छिपाने की बजाय उन्हें बताना जरूरी है। “लोगों को शायद बुरा लगे, लेकिन जो हमारी कमियां हैं, वे तो हमें बतानी ही पड़ेगी। आने वाले तीन महीने में पूरा करके दिखाओ। और यह तो गोरखपुर है, जहां स्वयं हमारे मुख्यमंत्री विराजमान हैं। वहां ही ऐसी कमियां रहेंगी तो क्या होगा?” उनके ये शब्द पूरे हॉल में गूंज गए और सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुए।

 होस्टल व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में कुल नौ होस्टल होने की बात कही—छह बॉयज होस्टल और तीन गर्ल्स होस्टल। उन्होंने बताया कि गर्ल्स होस्टल में मेस चल रही है, लेकिन बॉयज होस्टल में मेस की व्यवस्था नहीं है। छात्र बाहर से टिफिन मंगाकर खाते हैं। “क्यों? क्या टिफिन अच्छा लगता है?” उन्होंने सीधा सवाल किया। राज्यपाल ने चेतावनी दी कि बिना निगरानी के बाहर से आने वाले टिफिन में सिर्फ खाना ही नहीं, ड्रग्स और अन्य गलत चीजें भी आ सकती हैं। उन्होंने कहा कि कई विश्वविद्यालयों में नशीले पदार्थों के सबूत मिले हैं और नशा मुक्त भारत का सपना तब तक अधूरा रहेगा जब तक छात्र नशे से दूर नहीं रहते।

एक मां की भावना से बोलते हुए उन्होंने जोर दिया कि बच्चों का आहार शुद्ध और पौष्टिक होना चाहिए। अशुद्ध भोजन मानसिक विकास को प्रभावित करता है। उन्होंने तुरंत बाहर से टिफिन मंगाने की प्रथा बंद करने और होस्टल में नियमित मेस शुरू करने के निर्देश दिए।

 रसोई की औचक जांच और तेल के सैंपल

दीक्षांत समारोह से पहले राज्यपाल ने खुद बॉयज होस्टल की रसोई का निरीक्षण किया। उन्होंने खाने की सामग्री के डिब्बे खोलकर देखे, इस्तेमाल हो रहे खाद्य तेल की जानकारी ली और संभावित छेड़छाड़ को ध्यान में रखते हुए तेल के दो सैंपल लिए। एक सैंपल की स्थानीय स्तर पर और दूसरे की लखनऊ में स्वतंत्र जांच कराने का आदेश दिया गया, ताकि छात्रों के स्वास्थ्य से कोई खिलवाड़ न हो।

इसके अलावा उन्होंने कई होस्टलों में गंदगी, पान मसाला के दाग, खराब पंखे, बिजली की समस्या, वाई-फाई की कमी और मरम्मत के अधूरे कामों का जिक्र किया। अलकनंदा होस्टल में इंटरनेट और रोशनी की कमी, आरपीएस होस्टल में सीढ़ियों पर गंदगी तथा अन्य जगहों पर पंखे उनके आने से ठीक पहले लगाने जैसी बातें उन्होंने खुलकर बताईं। उन्होंने तीन महीने के अंदर सभी मरम्मत और सुधार कार्य पूरे करने की सख्त समयसीमा तय की।

 डिग्री पहचान देती है, चरित्र सम्मान

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि डिग्री सिर्फ पहचान देती है, लेकिन असली सम्मान चरित्र से मिलता है। युवाओं को अपनी शिक्षा और कौशल का उपयोग समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा में करना चाहिए। गोरखपुर की पवित्र धरती की प्रेरणाओं को याद दिलाते हुए उन्होंने अंत्योदय की भावना के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने पर जोर दिया। उन्होंने नशे से दूर रहने, अनुशासन बनाए रखने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की।

समारोह में 74 हजार से अधिक विद्यार्थियों को उपाधियां दी गईं और कई मेधावियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। मुख्य अतिथि और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे। राज्यपाल ने सिर्फ आलोचना नहीं की, बल्कि सुधार की दिशा भी दिखाई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके निर्देशों के बाद तुरंत कार्रवाई शुरू करने की बात कही है। कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि होस्टल सुविधाओं में सुधार और मेस व्यवस्था पर काम चल रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना

यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गोरखपुर मुख्यमंत्री का गृह नगर है और राज्य सरकार उच्च शिक्षा तथा छात्र कल्याण पर जोर देती रही है। राज्यपाल का खुला बयान प्रशासनिक जवाबदेही की मिसाल बन गया है। शिक्षा संस्थानों में बुनियादी सुविधाएं—स्वच्छ पानी, नियमित बिजली, साफ-सुथरे होस्टल, पौष्टिक भोजन और नशा मुक्त वातावरण—विद्यार्थियों के भविष्य के लिए उतने ही जरूरी हैं जितनी अच्छी किताबें और शिक्षक।

आज के युवा पीढ़ी को सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, स्वच्छ मन और मजबूत चरित्र की जरूरत है। अगर विश्वविद्यालय परिसर में ही पानी, बिजली, पंखे और स्वच्छ भोजन जैसी मूलभूत चीजें उपलब्ध नहीं होंगी, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दावा खोखला रह जाएगा। राज्यपाल ने सही कहा कि कमियों को स्वीकार करना और समयबद्ध तरीके से दूर करना ही विकास का रास्ता है।

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर याद दिलाया कि उच्च शिक्षा संस्थान सिर्फ डिग्री बांटने वाले केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण के केंद्र होने चाहिए। गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन के पास अब तीन महीने का समय है। अगर इस अवधि में वाकई सुधार दिखाई देते हैं, तो यह सिर्फ एक विश्वविद्यालय की सफलता नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के शैक्षिक संस्थानों के लिए प्रेरणा बनेगी। विद्यार्थियों के हित में उठाया गया यह कदम लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का यह रुख साबित करता है कि वे सिर्फ औपचारिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने नहीं आतीं, बल्कि जमीनी हकीकत देखने और सुधार सुनिश्चित करने का प्रयास करती हैं। गोरखपुर जैसे महत्वपूर्ण शहर में हुई यह घटना पूरे उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए सबक है। बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। छात्रों का भविष्य सर्वोपरि है—यही संदेश इस दीक्षांत समारोह से निकलकर सामने आया है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 7 Aug 2026

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