- Friday World 28 Aug 2026
मध्य पूर्व की अस्थिरता के बीच पाकिस्तान ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गुरुवार को इस्लामाबाद (रावलपिंडी) में पाकिस्तान और कुवैत के बीच ‘प्रोटोकॉल एग्रीमेंट-2026’ पर हस्ताक्षर हुए। यह समझौता दोनों देशों के सैन्य सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए किया गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ और कुवैत के रक्षा मंत्री शेख अब्दुल्ला अली अब्दुल्ला अल-सालेम अल-सबाह ने इस पर दस्तखत किए।
यह समझौता 2023 के रक्षा सहयोग समझौते पर आधारित है, जिसे हाल ही में कुवैत ने औपचारिक रूप से अनुमोदित किया था। नए प्रोटोकॉल के तहत पाकिस्तानी सशस्त्र बल कुवैत की सेना को प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, सीमा प्रबंधन और अन्य आपसी सहमति वाले रक्षा क्षेत्रों में सहायता देंगे। दोनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास, सैन्य शिक्षा, विशेषज्ञता के आदान-प्रदान, खुफिया जानकारी और लॉजिस्टिक्स में सहयोग बढ़ाएंगे। समझौता पांच साल के लिए प्रभावी रहेगा।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है। कुवैत को क्षेत्रीय संघर्षों से ऊर्जा बुनियादी ढांचे और तेल निर्यात पर असर का सामना करना पड़ा है। ऐसे में खाड़ी देश अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभिन्न भागीदारों के साथ संबंध बढ़ा रहे हैं। पाकिस्तान पहले ही सऊदी अरब और तुर्की के साथ रक्षा सहयोग को आगे बढ़ा चुका है। कुवैत के साथ यह समझौता मध्य पूर्व में पाकिस्तान के सैन्य नेटवर्क को विस्तार देने वाला एक और कड़ी माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते में ‘एक पर हमला दोनों पर हमला’ जैसी पारस्परिक सुरक्षा गारंटी की कोई स्पष्ट धारा नहीं है। यह मुख्य रूप से प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण तक सीमित है। इसलिए इसे भारत के लिए तत्काल कोई सीधा सैन्य खतरा नहीं माना जा रहा। फिर भी खाड़ी क्षेत्र में पाकिस्तान के बढ़ते सैन्य प्रभाव और समुद्री मार्गों पर नजर रखने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। भारतीय नौसेना क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए पहले से सतर्क रहती है।
पाकिस्तान आंतरिक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद मध्य पूर्व के देशों के साथ रक्षा संबंध मजबूत कर रहा है। यह उसके लिए राजस्व, प्रशिक्षण अनुभव और रणनीतिक साझेदारी का माध्यम भी बन सकता है। कुवैत के लिए यह क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के बीच अतिरिक्त सहयोग का विकल्प है।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान-कुवैत प्रोटोकॉल एग्रीमेंट-2026 मध्य पूर्व के बदलते सुरक्षा समीकरण का हिस्सा है। यह सहयोग प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए दोनों पक्षों ने संकल्प दोहराया है। आगे का विकास इस बात पर निर्भर करेगा कि यह सहयोग व्यावहारिक रूप में कैसे आकार लेता है और क्षेत्रीय तनाव कैसे विकसित होते हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 28 Aug 2026
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