-Friday World 23 Aug 2026
लखनऊ/ग्वालियर -प्रतिभा जब संस्कारों से जुड़ती है तो इतिहास बनता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है मध्य प्रदेश की बेटी और देश की होनहार युवा आईएएस अधिकारी आकांक्षा सिंह राजावत ने। परसों लखनऊ में आयोजित उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में आकांक्षा को पूरे बैच में सर्वश्रेष्ठ शोध (Best Research Award) से सम्मानित किया गया। यह केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उनकी बौद्धिक क्षमता, प्रशासनिक दृष्टिकोण और जमीनी समस्याओं को वैज्ञानिक नजरिए से समझने की अद्वितीय प्रतिभा का प्रमाण है।
तालियों की गड़गड़ाहट के बीच जब मंच से आकांक्षा का नाम पुकारा गया, तो पूरा सभागार गर्व से भर उठा। यह क्षण उनके परिवार के लिए ही नहीं, पूरे ग्वालियर-चंबल अंचल और युवा सिविल सेवा आकांक्षियों के लिए प्रेरणा बन गया।
IIT कानपुर से IAS तक का असाधारण सफर
आकांक्षा की कहानी आम नहीं है। देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर से केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट की चकाचौंध वाली दुनिया के बजाय देश सेवा का कठिन रास्ता चुना।
IIT में रहते हुए ही उनमें रिसर्च और इनोवेशन की गहरी समझ विकसित हुई। केमिकल इंजीनियरिंग की जटिल प्रयोगशालाओं में जहाँ अणुओं के व्यवहार को समझा जाता है, वहीं आकांक्षा ने समाज के अणुओं यानी आम लोगों की समस्याओं को समझने की ठानी। उनके प्रोफेसर बताते हैं कि वे हमेशा पूछती थीं - "इस टेक्नोलॉजी का उपयोग गांव के आखिरी व्यक्ति तक कैसे पहुंचेगा?"
यही वैज्ञानिक सोच उनके शोध को दूसरों से अलग बनाती है। लखनऊ प्रशिक्षण के दौरान प्रस्तुत उनके शोध प्रबंध में प्रशासन में डेटा-ड्रिवन डिसीजन मेकिंग, ग्रामीण विकास में तकनीक का समावेश और सुशासन के लिए नवाचार पर गहन अध्ययन था, जिसे निर्णायक मंडल ने सर्वश्रेष्ठ माना।
संस्कारों की जड़ें: एक ऐसा परिवार जो राष्ट्र सेवा का पर्याय है
आकांक्षा की सफलता के पीछे एक ऐसे परिवार का त्याग, अनुशासन और संस्कार है जो पिछले कई दशकों से राष्ट्र के चार अलग-अलग स्तंभों को संभाल रहा है। यह परिवार इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे एक ही वटवृक्ष की शाखाएं देश के अलग-अलग क्षेत्रों में राष्ट्र-निर्माण कर रही हैं।
पिता - मानवेंद्र सिंह राजावत: आकांक्षा के पिता श्री मानवेंद्र सिंह राजावत मध्य प्रदेश पुलिस में ग्वालियर में एडिशनल SP के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और अपराध नियंत्रण में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें प्रतिष्ठित IPS अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। पिता की वर्दी, उनकी ईमानदारी और जनता के प्रति समर्पण ने ही बचपन से आकांक्षा के मन में सिविल सेवा का बीज बोया।
बड़े चाचा - लेफ्टिनेंट जनरल धीरेन्द्र सिंह राजावत: परिवार के बड़े स्तंभ भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर हैं। उन्होंने देश के कई बड़े और संवेदनशील मिलिट्री ऑपरेशनों का सफल नेतृत्व किया है। सीमा पर देश की सुरक्षा करने वाले चाचा से आकांक्षा ने अनुशासन, नेतृत्व और विपरीत परिस्थितियों में निर्णय लेने की कला सीखी।
दूसरे चाचा - शैलेन्द्र सिंह राजावत: जब एक भाई सीमा संभाल रहा है तो दूसरा भाई खेत संभाल रहा है। श्री शैलेन्द्र सिंह राजावत एक वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक हैं और गवालियर KVK (कृषि विज्ञान केंद्र) के हेड हैं। किसानों की आय दोगुनी करने और नई कृषि तकनीकों को खेत तक पहुंचाने में उनका योगदान अतुलनीय है। कृषि और ग्रामीण भारत की समझ आकांक्षा को यहीं से मिली।
तीसरे चाचा - अविनाश सिंह राजावत: परिवार के तीसरे स्तंभ भारतीय रेल के भविष्य को गढ़ रहे हैं। श्री अविनाश सिंह राजावत भारतीय रेल में EDEE (Executive Director Electrical Engineering) को हेड करते हैं और भारत के ड्रीम प्रोजेक्ट, जापान के सहयोग से बन रहे बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लीड कर रहे हैं। उनसे आकांक्षा ने तकनीक, इंजीनियरिंग और बड़े विजन को जमीन पर उतारने की प्रेरणा ली।
पुलिस, सेना, विज्ञान और तकनीक - चारों दिशाओं से मिले इस ज्ञान और संस्कार के संगम ने ही आकांक्षा को एक परिपूर्ण प्रशासक बनाया है।
क्यों खास है यह 'बेस्ट रिसर्च' अवार्ड?
IAS प्रशिक्षण में बेस्ट रिसर्च अवार्ड केवल किताबी ज्ञान के लिए नहीं मिलता। इसके लिए अधिकारी को एक ऐसी समस्या चुननी होती है जो जमीनी हकीकत से जुड़ी हो, उस पर फील्ड में जाकर काम करना होता है, डेटा जुटाना होता है और ऐसा समाधान देना होता है जो सरकार की नीति में बदलाव ला सके।
सूत्रों के अनुसार आकांक्षा के शोध का विषय प्रशासनिक पारदर्शिता और ग्रामीण स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने IIT की अपनी तकनीकी पृष्ठभूमि का बेहतरीन उपयोग किया। यही कारण है कि उनका शोध मॉडल अब अन्य जिलों के लिए भी एक केस स्टडी के रूप में देखा जा रहा है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
आज जब युवा भ्रमित हैं कि इंजीनियरिंग के बाद क्या करें, आकांक्षा की कहानी उन्हें रास्ता दिखाती है। वे साबित करती हैं कि IIT का मतलब सिर्फ विदेश में नौकरी नहीं, बल्कि अपनी इंजीनियरिंग का उपयोग भारत के प्रशासन को बेहतर बनाने में भी किया जा सकता है।
लखनऊ में मिला यह सम्मान उनके उज्ज्वल प्रशासनिक भविष्य की सिर्फ शुरुआत है। ग्वालियर से लखनऊ तक, और IIT कानपुर से LBSNAA तक का उनका सफर हर बेटी को यह संदेश देता है - सपना बड़ा देखो, जड़ें मजबूत रखो और देश के लिए काम करो, सम्मान खुद-ब-खुद आपके कदम चूमेगा।
आकांक्षा सिंह राजावत Friday World की ओर से हार्दिक बधाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 23 Aug 2026
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