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Saturday, 5 September 2026

100 रुपये = 1 डॉलर : जब रुपया डॉलर के बराबर होगा, तभी रुपये में होगा वर्ल्ड ट्रेड - सुधांशु त्रिवेदी का बड़ा विजन

100 रुपये = 1 डॉलर : जब रुपया डॉलर के बराबर होगा, तभी रुपये में होगा वर्ल्ड ट्रेड - सुधांशु त्रिवेदी का बड़ा विजन
- Friday World September 05 2026 
भारतीय राजनीति के तेज-तर्रार वक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने हाल ही में देश की अर्थव्यवस्था को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने आम आदमी से लेकर अर्थशास्त्रियों तक सबका ध्यान खींच लिया है। उनका कहना है कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार डॉलर के बजाय रुपये में होगा।

त्रिवेदी जी के अनुसार एक ऐसा दिन आएगा जब 100 रुपये 1 डॉलर के बराबर हो जाएंगे। उस दिन 100 रुपये का एक नोट और 1 डॉलर का एक नोट बराबर ताकत रखेंगे। यही रुपया और डॉलर की बराबरी का क्षण होगा और इसी बराबरी के बाद दुनिया भारत के साथ रुपये में व्यापार करने को मजबूर होगी।

यह सिर्फ एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि भारत की बदलती आर्थिक ताकत की कहानी है।

डॉलर का दबदबा और भारत की नई तैयारी
पिछले 80 सालों से दुनिया का व्यापार अमेरिकी डॉलर पर टिका है। तेल खरीदना हो या हथियार, सबका भुगतान डॉलर में होता है। इसे डी-डॉलराइजेशन कहा जाता है और भारत इस दिशा में सबसे तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने पहले ही 22 से ज्यादा देशों को रुपये में व्यापार करने की अनुमति दी है। रूस, श्रीलंका, ईरान और कई अफ्रीकी देश आज भारत से रुपये में ही लेन-देन कर रहे हैं। स्पेशल रुपी वोस्ट्रो अकाउंट (SRVA) इसी का एक बड़ा उदाहरण है।

100 रुपये = 1 डॉलर, कैसे होगा संभव?
आज 1 डॉलर लगभग 83-84 रुपये का है। इसे 100 रुपये तक लाने के पीछे का तर्क क्या है? दरअसल सुधांशु त्रिवेदी का तर्क यह नहीं है कि रुपया कमजोर होकर 100 तक पहुंचेगा, बल्कि उनका विजन यह है कि जब भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन से 10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचेगी, हमारी मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट और दुनिया में हमारी साख इतनी बढ़ जाएगी कि रुपया खुद एक ग्लोबल करेंसी बन जाएगा।

जब भारत दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा, जब दुनिया का 48% डिजिटल लेन-देन भारत में हो रहा है, तो दुनिया को रुपये की जरूरत पड़ेगी। मांग बढ़ेगी तो रुपये की ताकत बढ़ेगी। फिर 100 रुपये का नोट ही 1 डॉलर के समकक्ष सम्मान पाएगा।

इससे आम आदमी को क्या फायदा होगा?
1. आयात सस्ता होगा: कच्चा तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स डॉलर में महंगा पड़ता है। रुपये में व्यापार से डॉलर का कमीशन खत्म होगा।
2. विदेशी कर्ज का बोझ कम: भारत को डॉलर के उतार-चढ़ाव से मुक्ति मिलेगी।
3. *रुपया बनेगा ग्लोबल:* जैसे आज डॉलर लेकर आप किसी भी देश में जा सकते हैं, वैसे ही कल रुपया लेकर जा सकेंगे।

यह सपना रातों-रात पूरा नहीं होगा। इसके लिए मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और मजबूत निर्यात नीति को लगातार आगे बढ़ाना होगा। सुधांशु त्रिवेदी का यह बयान उसी आत्मविश्वास का प्रतीक है कि भारत अब सिर्फ बाजार नहीं, बल्कि बाजार बनाने वाला देश बन रहा है। जिस दिन सौ का नोट डॉलर के बराबर होगा, उस दिन असली आर्थिक आजादी का दिन होगा।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 05 2026 

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