-Friday World September 06 2026
10 दिन पहले 22 हजार करोड़ की कर्ज माफी में शामिल था LIC HFL का पैसा, और अब फ्रॉड का केस - Yes Bank, IDBI के बाद क्या 1 लाख करोड़ के साम्राज्य की पोल खुलेगी?
नई दिल्ली / मुंबई : Zee वाले सुभाष चंद्रा फिर सुर्खियों में हैं, पर इस बार TRP के लिए नहीं, CBI की FIR के लिए। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के खिलाफ 1322 करोड़ रुपये से ज्यादा के फ्रॉड के मामले में केस दर्ज किया है। आरोप बेहद संगीन है - फर्जी नेटवर्थ सर्टिफिकेट दिखाकर LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) से कर्ज लेना और फिर डिफॉल्ट कर देना।
LICHFL की शिकायत पर दर्ज हुई इस FIR ने एक बार फिर उस सवाल को जिंदा कर दिया है जो पिछले 5 साल से दबाया जा रहा था - सुभाष चंद्रा का असली लोन पोर्टफोलियो कितना बड़ा है?
कहानी 980 करोड़ से शुरू, 1322 करोड़ तक पहुंची
CBI के मुताबिक पूरा खेल 2018 में शुरू हुआ। दो कर्ज लिए गए, कुल 980 करोड़ रुपये के।
पहला कर्ज - 500 करोड़ : वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया, जिसमें पैन इंडिया इंफ्रा प्रोजेक्ट्स सह-उधारकर्ता थी। 28 मार्च 2018 को सुभाष चंद्रा ने इसके लिए लगातार बनी रहने वाली पर्सनल गारंटी दी थी।
दूसरा कर्ज - 480 करोड़ : डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को रेंटल सिक्योरिटाइजेशन स्कीम के तहत दिया गया, जिसमें स्पिरिट इंफ्रा पावर सह-उधारकर्ता थी।
इन दोनों कर्ज को मंजूर कराने के लिए जो नेटवर्थ सर्टिफिकेट जमा किए गए, वहीं से फ्रॉड की कहानी शुरू होती है। LICHFL का आरोप है कि चंद्रा ने अपनी नेटवर्थ से जुड़े ऐसे प्रमाण पत्र जमा किए जिनका इस्तेमाल कर्ज मंजूरी के लिए किया गया।
मार्च 2018 में एक CA फर्म DIM एंड कंपनी के सर्टिफिकेट में नेटवर्थ 59,113 करोड़ रुपये दिखाई गई। जुलाई 2018 में दूसरी फर्म MPJ एंड कंपनी के सर्टिफिकेट में इसे 40,562 करोड़ बताया गया।
और फिर जब दिवालिया प्रक्रिया शुरू हुई तो 2024 में खुद सुभाष चंद्रा ने अपनी नेटवर्थ सिर्फ 31.79 करोड़ रुपये बताई और कहा कि 2017-18 में भी वो 40,000 करोड़ से ज्यादा कभी थी ही नहीं।
59,113 करोड़ से सीधे 31.79 करोड़! मतलब 99.94% नेटवर्थ हवा हो गई? LICHFL का कहना है यही फर्जी दस्तावेजों का खेल है। दोनों लोन डिफॉल्ट हो गए - वसंत सागर पर 570.50 करोड़ और डिजिटल पर 507.25 करोड़ बकाया निकल गया, ब्याज जोड़कर 1322 करोड़ से ज्यादा का नुकसान।
टाइमिंग पर सबसे बड़ा सवाल - कर्ज माफी और फिर केस
सबसे चौंकाने वाली बात टाइमिंग की है। बाजार में चर्चा है कि 10 दिन पहले ही लगभग 22,000 करोड़ के कर्ज माफी / सेटलमेंट में LIC का यह 1322 करोड़ भी शामिल था, और आज CBI ने केस दर्ज कर दिया। यह पैटर्न नया नहीं है।
अनिल अंबानी वाले मामले में भी यही देखा गया - पहले कर्ज माफ, फिर CBI/ED पीछे लगा दो ताकि वो खामोश रहे। क्या सुभाष चंद्रा को भी उसी स्क्रिप्ट में उलझाया जा रहा है?
फर्क सिर्फ इतना है कि सुभाष चंद्रा को मीडिया का आदमी कहा जाता है। वो खामोश बैठने वालों में से नहीं हैं।
Yes Bank और IDBI - दो बैंक तो पहले ही डूब चुके हैं
यह पहला मौका नहीं है जब सुभाष चंद्रा का नाम बैंकों के डूबने से जुड़ा है। Yes Bank के 24,000 करोड़ के संकट में एस्सेल ग्रुप का बड़ा रोल सामने आया था। राणा कपूर के दौर में बिना सिक्योरिटी के दिए गए कर्जों की लिस्ट में Zee / Essel सबसे ऊपर था।
IDBI बैंक की बर्बादी की कहानी भी इसी से जुड़ी है। उस वक्त IDBI ने एस्सेल इन्फ्रा और दूसरी कंपनियों को हजारों करोड़ दिए, जो कभी लौटे ही नहीं। सरकार को आखिर में IDBI को LIC के हवाले करना पड़ा - यानी एक सरकारी कंपनी का पैसा दूसरी सरकारी कंपनी के घाटे को पाटने में लगा दिया गया।
अगर सिर्फ LIC HFL के 1322 करोड़ पर FIR हो रही है तो सवाल उठता है कि SBI, PNB, Bank of Baroda, Axis, ICICI समेत 30 से ज्यादा बैंकों का क्या हुआ? अलग-अलग रिपोर्ट्स में एस्सेल ग्रुप पर 20 हजार करोड़ से 30 हजार करोड़ तक का कर्ज बताया जाता रहा है।
इसीलिए मांग उठ रही है कि सरकार सुभाष चंद्रा का पूरा लोन पोर्टफोलियो सार्वजनिक करे। मेरा अंदाजा है कि अगर सारे बैंक, NBFC, म्यूचुअल फंड और विदेशी कर्ज जोड़ दिए जाएं तो आंकड़ा 1 लाख करोड़ के पार निकलेगा। 1 लाख करोड़ से ज्यादा ही होगा।
फॉरेंसिक ऑडिट ही एक रास्ता - मनी ट्रेल कहां गई?
CBI ने FIR में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट की धाराएं लगाई हैं। आरोप है कि चंद्रा ने लोन लेने वाली कंपनियों, उनके डायरेक्टर्स पंकज सुरोलिया, अमिश पांड्या, राजीव ढोलकिया के साथ मिलकर साजिश रची।
लेकिन असली सवाल यह है कि 980 करोड़ गया कहां? LICHFL ने कहा है कि फंड का गलत इस्तेमाल हुआ।
क्या यह पैसा Zee की दूसरी कंपनियों में घुमाया गया? क्या विदेश भेजा गया? क्या इसी पैसे से शेयरों को संभाला गया? इसका जवाब सिर्फ फॉरेंसिक ऑडिट दे सकता है। सुभाष चंद्रा और उनकी सभी 100 से ज्यादा शेल कंपनियों की पिछले 10 साल की मनी ट्रेल निकाली जाए, तो बहुत बड़ी मनी लॉन्ड्रिंग सामने आ सकती है।
न्यूक्लियर जंग की आहट?
सुभाष चंद्रा ने कुछ साल पहले सार्वजनिक तौर पर मुकेश अंबानी को लेकर बयान दिया था। उस वक्त कहा गया था कि मुकेश को धमकी देना और सिस्टम को धमकी देना एक जैसा है।
आज हालात ऐसे हैं कि मीडिया इंडस्ट्री में सबसे बड़ी लड़ाई Zee vs Jio / Disney के बीच है। अगर सुभाष चंद्रा मुंह खोलते हैं तो कई राज बाहर आएंगे - किसके कहने पर कर्ज मिला, किस नेता ने फोन किया, किस रेगुलेटर ने आंख बंद की।
सरकार के सामने चुनौती है कि वह इस केस को सिर्फ 1322 करोड़ तक सीमित रखेगी या पूरे साम्राज्य की जांच करेगी। देश को पूरा सच जानने का हक है - यह सिर्फ एक बिजनेसमैन का फ्रॉड नहीं, बल्कि जनता के पैसे - LIC के पैसे - की बैंक रॉबरी है। LIC में 30 करोड़ पॉलिसी होल्डर्स का पैसा लगा है।
अब देखना है कि CBI जांच कहां तक जाती है, और क्या यह वाकई अंजाम तक पहुंचेगी, या फिर एक और सेटलमेंट में बदल जाएगी।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 06 2026
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