- Friday World September 19,2026
वाशिंगटन/नई दिल्ली - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरकार उस कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं जिसका इंतजार पूरी दुनिया कर रही थी। 18 सितंबर 2026 को व्हाइट हाउस ने ऐलान किया कि ट्रंप ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' (H.R. 5334) पर दस्तखत कर दिए हैं। यह कानून अमेरिका के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम को श्रद्धांजलि के तौर पर उनके नाम पर रखा गया है।
यह कानून सिर्फ रूस और ईरान पर प्रतिबंध नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा ब्रह्मास्त्र है जो भारत और चीन जैसे देशों की अर्थव्यवस्था को भी सीधे प्रभावित कर सकता है। 85f9
क्या है इस कानून में सबसे खतरनाक?
इस कानून का सबसे चर्चित प्रावधान है - अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार देना कि वह उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगा सकें जो रूसी तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं।
लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि यह टैरिफ ऑटोमेटिक नहीं लगेगा। कानून के मुताबिक, राष्ट्रपति उन 5 सबसे बड़े देशों पर टैरिफ लगा सकते हैं जिन्होंने कानून लागू होने से पिछले 12 महीनों में सबसे ज्यादा रूसी कच्चा तेल या गैस खरीदा है। इसमें भारत और चीन टॉप पर हैं। 24a4
व्हाइट हाउस ने साफ कहा है कि ट्रंप के पास यह तय करने की पूरी शक्ति होगी कि किस देश पर टैरिफ लगे, कितना लगे, और क्या छूट दी जाए।
कानून 30 दिन में होगा लागू: हस्ताक्षर के 30 दिन के भीतर यह कानून प्रभावी हो जाएगा, यानी अक्टूबर 2026 के मध्य से अमेरिका को कार्रवाई का अधिकार मिल जाएगा। ed1a
शैडो फ्लीट पर शिकंजा
इस कानून का दूसरा सबसे बड़ा निशाना है रूस की 'शैडो फ्लीट'। ये वो सैकड़ों पुराने टैंकर जहाज हैं जिनका इस्तेमाल रूस पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने के लिए कर रहा है।
नए कानून के तहत सिर्फ जहाज ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े मालिक, ऑपरेटर, इंश्योरेंस कंपनियां, मैनेजर और यहां तक कि उनको पैसा देने वाले बैंकों पर भी कार्रवाई होगी। ed1a
इसके अलावा ईरान पर लगे मौजूदा प्रतिबंधों को भी 5 साल के लिए बढ़ा दिया गया है।
भारत के लिए क्या मतलब है?
भारत दुनिया में रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। सस्ते रूसी तेल ने भारत को पिछले 3 सालों में अरबों डॉलर बचाए हैं। लेकिन अब खतरा सामने है।
अच्छी खबर यह है कि कानून में छूट का भी प्रावधान है। अगर कोई देश यह साबित कर दे कि उसका रूसी गैस आयात, रूस के कुल निर्यात का 15% से कम है और उसने आयात घटाने के लिए "महत्वपूर्ण कदम" उठाए हैं, तो उसे छूट मिल सकती है। ed1a
साथ ही राष्ट्रपति के पास 'नेशनल इंटरेस्ट वेवर' का अधिकार भी है। यानी अगर ट्रंप को लगता है कि भारत पर टैरिफ लगाना अमेरिका के हित में नहीं है, तो वह संसद को लिखित प्रमाण देकर छूट दे सकते हैं।
सीनेट और हाउस में बंपर जीत
यह कानून द्विदलीय समर्थन से पास हुआ है। सीनेट में 86-11 वोटों से और हाउस में 262-159 वोटों से इसे मंजूरी मिली। यह 1974 के बाद पहली बार है जब कांग्रेस ने राष्ट्रपति को इतनी बड़ी टैरिफ पावर दी है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने ट्रंप को धन्यवाद देते हुए कहा, "लिंडसे ग्राहम की याद को सम्मान देने का सबसे अच्छा तरीका इस कानून को पूरी तरह और तेजी से लागू करना होगा।"
आगे क्या होगा?
यह कानून ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिनों में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग वाशिंगटन आने वाले हैं। चीन ने पहले ही इस कानून को "लॉन्ग-आर्म जुरिस्डिक्शन" बताते हुए विरोध किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप इस कानून का इस्तेमाल सौदेबाजी के हथियार के तौर पर करेंगे। वह भारत और चीन पर दबाव बनाकर रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहते हैं।
भारत के लिए अगले 30 दिन बेहद अहम होंगे। विदेश मंत्रालय को अब अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत तेज करनी होगी ताकि 100% टैरिफ की तलवार को टाला जा सके।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 19,2026
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