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Sunday, 13 September 2026

हॉर्मुज पर ईरान की दोहरी चाल! ओमान से डील पक्की, फिर भी पूरी तरह नहीं खुलेगा दुनिया का सबसे अहम तेल-रूट, अमेरिका के सामने रखी बड़ी शर्त

हॉर्मुज पर ईरान की दोहरी चाल! ओमान से डील पक्की, फिर भी पूरी तरह नहीं खुलेगा दुनिया का सबसे अहम तेल-रूट, अमेरिका के सामने रखी बड़ी शर्त
-Friday World September 13,2026 
      ईरान ने फिर बढ़ाया दुनिया का टेंशन!

दुनिया की एनर्जी लाइफलाइन कही जाने वाली होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है जिसने अमेरिका से लेकर भारत तक सभी देशों की चिंता बढ़ा दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरानी मीडिया में दिए अपने ताजा बयान में कहा है कि ईरान इस वक्त अपने पड़ोसी देश ओमान के साथ एक नए समुद्री मार्ग (New Maritime Route) को लेकर बातचीत कर रहा है। लेकिन इस डील का मतलब ये नहीं है कि होर्मुज पूरी तरह से खुल जाएगा।

ईरान के इस बयान ने साफ कर दिया है कि वह होर्मुज को एक बड़े कूटनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है।

ओमान के साथ क्या है नई डील?

अराघची के मुताबिक, ओमान के मस्कट में जल्द ही एक अहम बैठक होने वाली है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा होर्मुज स्ट्रेट से होकर एक नए समुद्री रूट की स्थापना करना है।

ईरान का कहना है कि इस नए रूट से जुड़े नक्शे, एंट्री-एग्जिट पॉइंट और करार की पूरी डिटेल्स बैठक में शामिल होने वाले देशों के साथ शेयर की जाएंगी। रविवार को ही खबर आई थी कि ईरान और ओमान के बीच इस नए एंट्री-एग्जिट रूट को लेकर सैद्धांतिक सहमति बन गई है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग रूट है। यह महज 33 किलोमीटर चौड़ा है, लेकिन दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और 25% LNG यहीं से गुजरता है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला यह रास्ता अगर बंद होता है तो दुनिया में तेल के दाम 150 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकते हैं।

फिर भी पूरा नहीं खुलेगा होर्मुज - ईरान ने क्यों कहा ऐसा?

यहाँ पर ईरान ने सबसे बड़ा ट्विस्ट दिया। अराघची ने दो-टूक कहा - "ओमान के साथ हमारा यह करार किसी भी हालत में इस बात का संकेत नहीं है कि हम होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से फिर से खोल रहे हैं।"

यानी ईरान ने ओमान को तो एक वैकल्पिक रास्ता दे दिया, लेकिन पूरी दुनिया के लिए होर्मुज को अभी भी बंधक बना कर रखा है। यह ईरान की दबाव बनाने की पुरानी रणनीति है - बातचीत का रास्ता दिखाओ, लेकिन पूरा दरवाजा मत खोलो।

अमेरिका के सामने रखी इस्लामाबाद MoU की शर्त

होर्मुज को पूरी तरह खोलने के लिए ईरान ने अमेरिका के सामने एक कड़ी शर्त रख दी है। अराघची ने कहा कि ईरान तभी होर्मुज को सामान्य करेगा जब अमेरिका इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (Islamabad MoU) के तहत अपनी जिम्मेदारियों पर वापस लौटेगा।

यह Islamabad MoU दरअसल क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु प्रतिबंधों से जुड़ा एक अनौपचारिक समझौता है, जिसके तहत अमेरिका पर कुछ प्रतिबंधों में ढील देने का दबाव है। ईरान का सीधा संदेश है - "जब तक आप अपना वादा पूरा नहीं करोगे, हम अपना रास्ता नहीं खोलेंगे।"

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अमेरिका पर सीधा दबाव बनाकर प्रतिबंधों में राहत चाहता है।

समंदर में अभी भी तनाव, हमले और एक मौत

जमीनी कूटनीति के बीच समंदर में हालात अभी भी विस्फोटक हैं। ईरानी अधिकारियों ने खुद माना है कि पिछले कुछ दिनों में होर्मुज के पास तनाव बढ़ा है।

इसी बीच एक ईरानी जहाज पर हमले की भी खबर आई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। यह घटना बताती है कि यह इलाका सिर्फ कूटनीतिक बयानबाजी का नहीं, बल्कि सीधे सैन्य टकराव का भी केंद्र बन चुका है। अमेरिका, ब्रिटेन और ईरान की नौसेनाएं अक्सर यहाँ आमने-सामने आ जाती हैं।

ईरान का क्षेत्रीय सुरक्षा पर बड़ा बयान

अराघची ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर ईरान का नजरिया भी साफ किया। उन्होंने कहा, "इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता की प्राथमिक जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ इस क्षेत्र के देशों की ही होनी चाहिए, बाहर की ताकतों की नहीं।"

यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका और उसके खाड़ी में मौजूद सैन्य बेसों पर निशाना था। ईरान चाहता है कि अमेरिका खाड़ी से बाहर निकले और सुरक्षा की कमान ईरान, ओमान, सऊदी अरब जैसे देशों के हाथ में रहे।

उन्होंने उम्मीद जताई कि ओमान में होने वाली यह बैठक सिर्फ समुद्री रास्ते तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आगे चलकर क्षेत्रीय हितों से जुड़े दूसरे बड़े मुद्दों पर भी सकारात्मक बातचीत का रास्ता खोलेगी।

दुनिया पर क्या असर पड़ेगा? खासकर भारत पर

भारत अपनी 60% से ज्यादा तेल जरूरत इसी होर्मुज रूट से पूरी करता है। अगर ईरान ने होर्मुज को लंबे समय तक आंशिक रूप से बंद रखा, तो भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, शिपिंग इंश्योरेंस महंगा हो जाएगा और महंगाई बढ़ेगी।

इसलिए ओमान के साथ ईरान की यह डील भले ही छोटी लगे, लेकिन इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। आने वाले हफ्तों में मस्कट में होने वाली बैठक पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

निष्कर्ष: ईरान ने शतरंज की बिसात पर एक सोचा-समझा कदम चला है - एक तरफ ओमान को साथ लेकर दुनिया को दिखा रहा है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, दूसरी तरफ अमेरिका के सामने शर्त रखकर होर्मुज को अभी भी अपना सबसे बड़ा तुरुप का पत्ता बनाए हुए है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 13,2026 

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