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Tuesday, 15 September 2026

सीरिया में ईंधन की आग: 40% दाम बढ़ोतरी से सुलगा देश, नई सरकार की पहली बड़ी आर्थिक परीक्षा

सीरिया में ईंधन की आग: 40% दाम बढ़ोतरी से सुलगा देश, नई सरकार की पहली बड़ी आर्थिक परीक्षा
-Friday World September 15 2026
सितंबर 2026 के मध्य में सीरिया के कई शहरों और कस्बों की सड़कें फिर से गुस्से से भर गईं। असद शासन के पतन के लगभग दो साल बाद देश में सबसे व्यापक आर्थिक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। कारण था ईंधन की कीमतों में अचानक और भारी बढ़ोतरी। डीज़ल की कीमत लगभग 40 प्रतिशत बढ़ाकर 175 सीरियाई पाउंड प्रति लीटर कर दी गई, जबकि पेट्रोल में 26 से 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई। रसोई गैस के दाम भी बढ़े।

सरकार ने इसे अस्थायी कदम बताया। ऊर्जा मंत्री मोहम्मद अल-बशीर ने कहा कि देश की घरेलू तेल उत्पादन क्षमता मात्र करीब 1 लाख 2 हजार बैरल प्रतिदिन है, जबकि मांग लगभग 3 लाख 25 हजार बैरल है। बानियास रिफाइनरी के दो महीने लंबे रखरखाव और वैश्विक बाजार में ईंधन की ऊंची कीमतों (ईरान-अमेरिका तनाव तथा शिपिंग मार्गों में व्यवधान के कारण) ने आयात का खर्च बढ़ा दिया। सरकार का तर्क था कि कीमतें बढ़ाए बिना आपूर्ति बनाए रखना संभव नहीं।

लेकिन आम सीरियाई के लिए यह तर्क पर्याप्त नहीं था। विरोध इडलिब, रक़्क़ा, हसकाह, दैर एज़-ज़ोर, अलेप्पो के ग्रामीण इलाकों, हमा और यहां तक कि कुछ दक्षिणी क्षेत्रों तक फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कीं, टायर जलाए और तेल टैंकरों को रोक दिया। एम-5 और एम-4 जैसे महत्वपूर्ण राजमार्गों पर यातायात ठप हो गया। कई जगहों पर लोग ऊर्जा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इडलिब जैसे इलाके, जो पहले हायत तहरीर अल-शाम के गढ़ रहे, अब नई सरकार के खिलाफ भी आवाज उठा रहे थे। यह साफ संकेत था कि आर्थिक दबाव राजनीतिक स्थिरता के लिए भी चुनौती बन सकता है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार सीरिया की लगभग 90 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है। लंबे गृहयुद्ध, प्रतिबंधों, मुद्रास्फीति और बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने लोगों की कमर तोड़ रखी है। ईंधन महंगा होने से परिवहन, खेती, सब्जियों और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम और बढ़ने का खतरा है। टैक्सी चालक, मिनीबस चालक और छोटे व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। कई लोगों का कहना था कि वेतन बढ़ाने की बजाय कीमतें कम करो।

नई संक्रमणकालीन सरकार, जिसका नेतृत्व अहमद अल-शरा (पूर्व में अल-जुलानी के नाम से जाने जाते थे) कर रहे हैं, के लिए यह पहली बड़ी आर्थिक परीक्षा है। असद शासन गिरने के बाद खाड़ी देशों ने पुनर्निर्माण और सहायता के कई समझौते किए हैं। सऊदी अरब, क़तर और संयुक्त अरब अमीरात ने वेतन सहायता, विश्व बैंक बकाया चुकाने तथा बिजली, बंदरगाह और बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में रुचि दिखाई है। फिर भी देश की ऊर्जा क्षेत्र की संरचनात्मक कमजोरियां—कम उत्पादन, पुरानी रिफाइनरी और आयात पर निर्भरता—आसानी से दूर नहीं हो रहीं।

प्रदर्शनों ने यह भी दिखाया कि राजनीतिक परिवर्तन के बावजूद आम लोगों की जिंदगी में तुरंत सुधार नहीं आया है। बिजली सब्सिडी हटाने जैसे पिछले कदमों के बाद भी आर्थिक असंतोष बना हुआ था। अब ईंधन संकट ने उसे और व्यापक बना दिया। सरकार ने कीमतों की समीक्षा जारी रखने और लंबी अवधि में रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने का वादा किया है, लेकिन फिलहाल गुस्सा सड़कों पर है।

सीरिया आज पुनर्निर्माण, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की राह पर है। खाड़ी निवेश, प्रतिबंधों में ढील और कुछ कूटनीतिक प्रगति सकारात्मक संकेत हैं। लेकिन अगर आम नागरिक की जेब पर बोझ बढ़ता रहा तो राजनीतिक वैधता भी प्रभावित हो सकती है। ईंधन की यह आग सिर्फ कीमतों की नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही आर्थिक बदहाली और नई व्यवस्था की परीक्षा की भी है। देश को स्थायी समाधान की जरूरत है—उत्पादन बढ़ाने, आपूर्ति सुनिश्चित करने और लोगों के जीवन स्तर सुधारने की। वरना सड़कों का गुस्सा बार-बार भड़केगा।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 15 2026 

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