- Friday World September 13,2026
यमन के एक बड़े नेता ने सऊदी अरब की जनता को सीधे संबोधित करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यमन की लड़ाई सऊदी अरब के आम लोगों से नहीं है, बल्कि उन नीतियों से है जो एक तरफ विदेशी ताकतों को एयरबेस और सैन्य सुविधाएं देती हैं, और दूसरी तरफ यमन के आम नागरिकों को हज जैसे धार्मिक फर्ज़ से रोकती हैं।
इस बयान के बाद अरब सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है।
खिताब में क्या कहा गया?
अपने संबोधन में यमनी नेता ने कहा कि यमन और सऊदी अरब दोनों अरब और इस्लामी भाई हैं। उनका आरोप था कि सऊदी हुकूमत ने अपने फैसलों से पवित्र भूमि को आम मुसलमानों के लिए मुश्किल बना दिया है।
उनके शब्दों में - "हम सऊदी अवाम के खिलाफ नहीं लड़ रहे। हमारी लड़ाई उस निज़ाम से है जो सहयूनियों (ज़ायोनिस्ट ताकतों) को अपना एयरबेस देता है, मगर पड़ोसी यमनी को हज करने की इजाजत नहीं देता।"
उन्होंने आगे यह भी कहा कि वर्तमान सऊदी शासन ने, उनके मुताबिक, सऊदी अरब के मूल चरित्र को बदलने की कोशिश की है। उनके समर्थक इसे "यहूदी अरब" जैसे सख्त शब्दों में कह रहे हैं, जिसका मतलब है कि फैसले इस्लामी हितों के बजाय बाहरी ताकतों के हित में लिए जा रहे हैं। यमनी पक्ष का कहना है कि वे इस पवित्र भूमि को बाहरी प्रभाव से आजाद कराने की जंग लड़ रहे हैं।
हज का मुद्दा क्यों उठा?
पिछले कुछ सालों से यमन से हज यात्रियों को जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। युद्ध, एयरपोर्ट बंद होने और राजनीतिक प्रतिबंधों के कारण हजारों यमनी हज नहीं कर पाए। यमनी नेताओं का आरोप है कि रियाद जानबूझकर यह रोक लगाता है, जबकि सऊदी सरकार इसे सुरक्षा और लॉजिस्टिक कारण बताती है।
वहीं एयरबेस का मुद्दा भी गरम है। अमेरिका और इजरायल से जुड़े सैन्य सहयोग को लेकर यमन में लगातार यह प्रचार किया जाता रहा है कि सऊदी धरती से यमन पर हमले होते हैं। रियाद हमेशा से इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
सऊदी अवाम की प्रतिक्रिया क्या है?
दिलचस्प बात यह है कि इस बयान को दो तरह से देखा जा रहा है। सऊदी अरब के आम लोग इस जंग से थक चुके हैं। 2015 से चल रही यमन जंग में दोनों तरफ भारी नुकसान हुआ है। सऊदी बॉर्डर शहरों जैसे जिजान और नजरान में रहने वाले लोग शांति चाहते हैं।
यमनी नेता ने इसी भावना को पकड़ा है। सऊदी जनता को दुश्मन न बताकर, सीधे हुक्मरानों को निशाना बनाया है।
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हकीकत क्या है?
सऊदी अरब कहता है कि उसने हमेशा हज को राजनीति से अलग रखा है और यमन समेत सभी देशों के हाजियों का स्वागत किया है, लेकिन सुरक्षा सर्वोपरि है।
बहरहाल, इस एक बयान ने फिर से वही पुराना सवाल खड़ा कर दिया है - क्या मक्का और मदीना की सरजमीं पर सियासत हावी हो रही है? क्या हज जैसे इबादत के रास्ते में सियासत रुकावट बन रही है?
आने वाले दिनों में इस बयान पर रियाद की तरफ से क्या जवाब आता है, इस पर पूरे खाड़ी क्षेत्र की नजर रहेगी।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 13,2026
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