- Friday World 2 Sep 2026
"हमने यह संकट पैदा नहीं किया, पर कीमत हम चुका रहे हैं" - नेपाल ने अमेरिका, चीन और भारत को ठहराया जिम्मेदार, 5 बिलियन डॉलर के क्लाइमेट हर्जाने की मांग
नेपाल ने अब भीख मांगना बंद कर दिया है। उसने इंसाफ मांगना शुरू कर दिया है।
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर और चट्टान का एक बड़ा हिस्सा टूटकर गिरा। वैज्ञानिकों ने इसे 'हिमालयन सुनामी' नाम दिया। 20-30 मीटर ऊंची और 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पानी की दीवार भोटेकोशी नदी में घुसी। रास्ते में जो आया बह गया - घर, पुल, सड़कें, गाड़ियां और 5 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट।
एक हफ्ते बाद आंकड़ा दिल दहला रहा है - नेपाल में 1000 से ज्यादा मौतें, 1050 की पुष्टि हो चुकी है। 4000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक भी हैं। तिब्बत में 16 की मौत और 550 लापता। 12,000 लोगों को अब तक रेस्क्यू किया गया है, 639 लोग अभी भी टूटे हुए पावर स्टेशन में फंसे हैं। नुवाकोट जिले के बिदुर नगरपालिका में एक ही घर के मलबे से 24 शव निकले - 13 महिलाएं, 11 पुरुष और एक बच्चा।
काठमांडू में लावारिस शवों का सामूहिक अंतिम संस्कार शुरू हो चुका है। UNDP के मुताबिक 22 लाख टन मलबा जमा है। नुकसान का अंदाजा 4 से 5 बिलियन डॉलर, जो नेपाल की GDP का 10% है।
और इसी मलबे के बीच से नेपाल ने एक नई विदेश नीति का ऐलान किया है।
दान से न्याय की ओर
विदेश मंत्री शिसिर खनल ने कांतिपुर TV को दिए इंटरव्यू में कहा - "नेपाल का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन न के बराबर है। फिर भी हम एक ऐसे वैश्विक संकट की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं जिसे हमने बनाया ही नहीं। ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना और ये पहाड़ी सुनामी सीधे ग्लोबल वॉर्मिंग का नतीजा हैं।"
उन्होंने साफ कहा - "हम अपनी डिप्लोमेसी को 'सहायता' से हटाकर 'न्याय और मुआवजे' की तरफ ले जा रहे हैं। यह चैरिटी का मामला नहीं है, यह कानूनी और नैतिक देनदारी का मामला है।"
नेपाल के वित्त मंत्रालय ने अमेरिका, चीन, भारत और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को औपचारिक क्लाइमेट कंपनसेशन क्लेम लेटर भेज दिया है। साथ ही UN के Loss and Damage Fund में भी 5 बिलियन डॉलर की मांग दायर की है।
खनल ने तीन सबसे बड़े उत्सर्जकों का नाम लिया - चीन, अमेरिका और भारत। उन्होंने कहा इन देशों की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है कि वे नेपाल जैसे कमजोर देशों को मुआवजा दें।
सिर्फ नेपाल नहीं, 2 अरब लोगों का सवाल
नेपाल ने इस मुद्दे को सिर्फ अपने तक सीमित नहीं रखा। खनल ने चेतावनी दी - "यह सभ्यता के अस्तित्व का सवाल है। अगर हिमालय के ग्लेशियर खत्म हुए तो गंगा, त्रिशूली समेत तमाम नदियों में पानी का संकट पैदा होगा। 2 अरब से ज्यादा दक्षिण एशियाई लोगों की जल सुरक्षा हमेशा के लिए खतरे में पड़ जाएगी। हम सिर्फ नेपाल के लिए नहीं, पूरे दक्षिण एशिया की सभ्यता के लिए आवाज उठा रहे हैं।"
यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्लाइमेट चेंज पर दुनिया का ध्यान फिर बंट रहा है। 2022 में COP27 में Loss and Damage Fund बनाने का वादा हुआ था, लेकिन पैसा अभी भी कागजों पर है।
बेफाम औद्योगीकरण ने कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन जैसी गैसों की चादर बना दी है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं, पहाड़ खोखले हो रहे हैं। नेपाल जैसा देश जिसने धुएं के कारखाने नहीं लगाए, वह आज सबसे पहले डूब रहा है।
नेपाल का संदेश साफ है - हमें आपकी दया नहीं, आपका कर्ज चुकाना है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 2 Sep 2026
#NepalFloods #ClimateJustice #ClimateCompensation #HimalayanTsunami #GlobalWarming #LossAndDamage #BhotekoshiFlood #NepalNews #ClimateCrisis #SouthAsiaWaterCrisis