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Sunday, 13 September 2026

IRGC में 40 साल का करियर, मनोवैज्ञानिक युद्ध का मास्टरमाइंड - कौन थे जनरल अली मोहम्मद नैनी जिनकी इजरायली हमले में हुई शहादत से हिला ईरान?

IRGC में 40 साल का करियर, मनोवैज्ञानिक युद्ध का मास्टरमाइंड - कौन थे जनरल अली मोहम्मद नैनी जिनकी इजरायली हमले में हुई शहादत से हिला ईरान?
-Friday World September 13,2026 
तेहरान से बड़ी खबर - ईरान की बुलंद आवाज खामोश

इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रही भीषण जंग के बीच ईरान को एक बड़ा झटका लगा है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शुक्रवार को आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि उनके आधिकारिक प्रवक्ता *सेकंड ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नायानी इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हवाई हमले में शहीद हो गए हैं।

IRGC के बयान में कहा गया है - "जनरल नैनी आज सुबह अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एक आपराधिक, कायरतापूर्ण और आतंकवादी हमले में शहीद हुए।" यह हमला ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच 12 दिनों से लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले चल रहे हैं।
            कौन थे जनरल अली मोहम्मद नायानी?

अगर ईरान की सेना का कोई चेहरा था जो दुनिया के सामने सबसे ज्यादा आता था, तो वह अली मोहम्मद नैनी ही थे।

- पद: उनके पास IRGC में सेकंड ब्रिगेडियर जनरल का रैंक था।
- प्रवक्ता कब बने: साल 2024 में उन्होंने ब्रिगेडियर जनरल रमजान शरीफ की जगह ली थी। उन्हें खुद IRGC के कमांडर-इन-चीफ मेजर जनरल हुसैन सलामी ने इस अहम पद पर नियुक्त किया था। - 
- विशेषज्ञता: जनरल नैनी सिर्फ एक सैन्य अधिकारी नहीं थे। उन्हें IRGC के 

मनोवैज्ञानिक अभियानों (Psychological Operations), सॉफ्ट पावर और कॉग्निटिव वॉरफेयर का सबसे बड़ा एक्सपर्ट माना जाता था। यानी दुश्मन के दिमाग पर असर डालने वाली जंग का पूरा प्लान वही बनाते थे। यही वजह थी कि ईरानी मीडिया में उन्हें "ईरान की बुलंद आवाज" कहा जाता था।

40 साल का शानदार सैन्य करियर - जंग के मैदान से प्रवक्ता तक

जनरल नैनी का करियर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था।

सेना में उन्हें 40 साल का लंबा अनुभव था। उन्होंने 1980 के दशक में हुए खूनी ईरान-इराक युद्ध में भी हिस्सा लिया था, जहाँ से उनकी पहचान एक बहादुर सिपाही के तौर पर बनी।

अपने 40 साल के करियर में उन्होंने कई बड़े पदों पर काम किया:
1. IRGC के सांस्कृतिक विभाग के उप-प्रमुख
2. बसीज (ईरान की अर्धसैनिक स्वयंसेवी सेना) के सांस्कृतिक और सामाजिक मामलों के उप-प्रमुख
3. IRGC के थिंक टैंक और मीडिया रणनीति के प्रमुख

2024 में जब ईरान ने इजरायल पर "ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस" के तहत सैकड़ों मिसाइलें दागी थीं, तब ब्रिटेन ने जिन चुनिंदा वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए थे, उनमें जनरल नैनी का नाम सबसे ऊपर था। ब्रिटेन का मानना था कि नैनी ही ईरान के प्रोपेगेंडा वार को लीड कर रहे हैं।

आखिरी 24 घंटे - फारस की खाड़ी में अमेरिका को चुनौती

जनरल नैनी की शहादत से ठीक एक दिन पहले ही उन्होंने ईरानी सरकारी टेलीविजन पर एक जोशीला संदेश दिया था। उन्होंने सीधे फारस की खाड़ी में तैनात 

अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े को चुनौती दी थी और कहा था कि ईरान की नौसेना किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है।

युद्ध के दौरान उनके कई बयान चर्चा में रहे:
- 28 फरवरी को उन्होंने कहा था - "जिस दिन अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, हम उसी दिन से इस स्थिति के लिए तैयार हैं।"
- उन्होंने दावा किया था - "12 दिन के इस युद्ध ने साबित कर दिया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प पूरी तरह विफल है। हमारी सेनाएं ही युद्ध का परिणाम तय करती हैं।"
- मिसाइल प्रोडक्शन पर उन्होंने कहा था - "इस जंग का हमारे मिसाइल उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ा है। तेहरान के पास ऐसे हथियार हैं जो 12 दिन की जंग के बाद ही तैयार किए गए हैं।"

उनके इन बयानों ने ईरान के भीतर लोगों में जोश भरने का काम किया था।

ईरान के लिए कितना बड़ा नुकसान?

विश्लेषकों का मानना है कि जनरल नैनी की मौत IRGC के लिए एक सामरिक और मनोवैज्ञानिक दोनों तरह का नुकसान है। वह सिर्फ एक प्रवक्ता नहीं, बल्कि IRGC की पूरी नैरेटिव वॉर के आर्किटेक्ट थे। अब ईरान को जल्द ही नया चेहरा सामने लाना होगा जो दुनिया के सामने उसी बुलंदी से ईरान का पक्ष रख सके।

उनकी शहादत के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई के करीबी हलकों में शोक का माहौल है और बदले की बात कही जा रही है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 13,2026 

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